दिल के चिराग जलाते नहीं-hindi shayri


जिनका हम करते हैं इन्तजार
वह हमसे मिलने आते नहीं
जो हमारे लिए बिछाये बैठे हैं पलकें
उनके यहां हम जाते नहीं
अपने दिल के आगे क्यों हो जाते हैं मजबूर
क्यों होता है हमको अपने पर गरूर
जो आसानी से मिल सकता है
उससे आँखें फेर जाते हैं
जिसे ढूँढने के लिए बरसों
बरबाद हो जाते हैं
उसे कभी पाते नहीं
तकलीफों पर रोते हैं
पर अपनी मुश्किलें
खुद ही बोते हैं
अमन और चैन से लगती हैं बोरियत
और जज्बातों से परे अंधेरी गली में
दिल के चिराग के लिए
रौशनी ढूँढने निकल जाते हैं
——————–

दुर्घटनाएं अब अँधेरे में नहीं
तेज रौशनी में ही होतीं है
रास्ते पर चलते वाहनों से
रौशनी की जगह बरसती है आग
आंखों को कर देती हैं अंधा
जागते हुए भी सोती हैं
—————————-
हमें तेज रौशनी चाहिए
इतनी तेज चले जा रहे हैं
उन्हें पता ही नहीं आगे
और अँधेरे आ रहे हैं
दिल के चिराग जलाते नहीं
बाहर रौशनी ढूँढने जा रहे हैं

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टिप्पणियाँ

  • राजीव तनेजा  On 30/11/2007 at 00:59

    इसे मृगतृष्णा कह लें या कुछ और….

    कस्तूरी की सुगन्ध के पीछे -पीछे हम भागते रहते हैँ…

    मिलता कुछ नहीं है…नज़र आता कुछ नहीं है ..

    रह जाता है हाथ खाली का खाली..

  • mehhekk  On 30/11/2007 at 13:42

    bahut hi badiya,amtarman tak ko zanzod ke rekha hai.shayad tarif ke liye shabh apure hai hamare pas.

  • mehhekk  On 30/11/2007 at 13:43

    bahut badiya,antarman tak zanzod ke rakha hai.

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