लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)


जिंदगी की इस धारा में
किस किसकी नाव पार लगाओगे।
समंदर से गहरी है इसकी धारा
लहरे इतनी ऊंची कि
आकाश का भी तोड़ दे तारा
अपनी सोच को इस किनारे से
उस किनारे तक ले जाते हुए
स्वयं ही ख्यालों में डूब जाओगे।
दूसरे को मझधार से तभी तो निकाल सकते हो
जब पहले अपनी नाव संभाल पाओगे।
दूर उठती लहरें देखकर
खेलने का मन करता है
पर उनकी ताकत तभी समझ आयेगी
जब उनसे लड़ने जाओगे।

……………………………..

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
लेखक संपादक-दीपक भारतदीप अन्य ब्लाग

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टिप्पणियाँ

  • परमजीत बाली  On 13/10/2009 at 22:36

    बहुत बढिया रचना है।

  • M Verma  On 14/10/2009 at 04:53

    पर उनकी ताकत तभी समझ आयेगी
    जब उनसे लड़ने जाओगे।
    सही है लहरो से खेलते तो सभी है पर लडने की हिम्मत कितने कर पाते है.

  • manoj  On 08/07/2010 at 12:25

    i like kavita my favourate kavita and best my job and watching and reading

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