Tag Archives: matra bhasha ka mahatva

हिंदी भाषा और मनोरंजन -१४ सितम्बर हिंदी दिवस पर कविता


आकर्षक शब्द वाचन की

कला में जादू है

मगर सभी को नहीं आती।

लोग मधुर स्वर के

जाल में फंस ही जाते

अर्थ की अनुभूति

सभी  को नहीं आती।

बिना सृजन के

रचयिता  दिखने की छवि

सभी को नहीं बनानी आती।

मनोरंजन के पेशे में

नारा नया होना चाहिये

पुरानी अदाओं पर भी

भीड़ खिंची चली आती।

कहें दीपक सुविधा भोगी

मनुष्य समाज हो गया है,

उपभोग के शोर में खो गया है,

मायाजाल में फंसे सभी

चाहे जिसे बंधक बना लो

नया बुनने की नौबत ही

कभी नहीं आती है।

————

कवि एवं लेखक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’

ग्वालियर, मध्य प्रदेश

कवि, लेखक और संपादक-दीपक “भारतदीप”,ग्वालियर 

poet, writer and editor-Deepak “BharatDeep”,Gwalior

http://rajlekh-patrika.blogspot.com

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का चिंतन

४.हिन्दी पत्रिका

५.दीपकबापू कहिन

६. ईपत्रिका 

७.अमृत सन्देश पत्रिका

८.शब्द पत्रिका

Advertisements