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गलतफहमी-हिन्दी कविताऐं (galatfahami-hindi shayariyan)


धरती पर घूमते सितारों के चमकने की
असलियत जान ली,
जिन्होंने कुछ उधार पर तो
कुछ लूट पर अपनी
जेब भरने की ठान ली,
इसलिये आसमान के
सितारों पर भी यकीन नहीं रहा।
सोचते हैं
अपनी गलतफहमी में ही
बरसों तक यह कैसा भ्रम सहा।
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वह लुटेरे हैं या व्यापारी
पहचानना मुश्किल है,
दौलत से मिली शौहरत ने
मशहूर कर दिया उनको
पर पता लगा कि
हमारी तरह ही उनका भी मामूली दिल है।
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नैतिकता और बेईमानी का पैमाना
पता नहीं कब तय किया जायेगा,
वरना तो हर इंसान सौ फीसदी शुद्धता के फेरे में
हमेशा ही अपने को अकेला पायेगा।
सफेद ख्याल में काली नीयत की मिलावट का
सही पैमाना तय हो जाये
तब तोल तोलकर हर कोई
अपने जैसे लोग जुटायेगा।
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कत्ल करने वाला
कौन कातिल कौन पहरेदार
इसका भी पैमाना जब तय किया जायेगा,
तभी ज़माना रहेगा सुकून से
हर कत्ल पर शोर नहीं मचायेगा।
वैसे भी कातिल और पहरेदार
वर्दी पहनने लगे एक जैसी,
अक्लमंदों की भीड़ भी जुटी है वैसी,
कुछ इंसानों का बेकसूर मारने की
छूट भी मिल जाये तो कोई बात नहीं
बहसबाजों को भी अपने अपने हिसाब से
इंसानियत के पैमाने तय करने का
हक आसानी से मौका मिल जायेगा।
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यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘शब्दलेख सारथी’ पर लिखा गया है।
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