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मशविरों के चिराग-हिन्दी हास्य कविताएँ (mashviron ke chirag-hindi comic poem’s


घायल का दर्द हो
चाहे टूटे आशिक का गम हो
बाज़ार के लिए कमाए का जरिया है,
लोगों के आँखों के सामने
पर्दे पर  नज़ारे
मुफ्त में नहीं चलते,
चीजों को खरीदने के
मशविरों के चिराग भी साथ जलते,
दौलतमंदों के घर की खुशियां हों
चाहे नटों के जन्मदिन
बन जाता है
हर समय कमाई का दरिया।
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टीवी चैनल का संवाददाता
ज़ोर से चिल्लाया
“संपादक जी
बड़ी जोरदार रेल दुर्घटना हुई है
कई लोगों के मरने की आशंका है।”
सुनते ही संपादक ने खुश होकर
संवाददाता को आगे की खबर
थोड़ी देर बाद देने को कहा
और फिर अपने प्रबंधक से कहा
“जनाब, अपने विज्ञापन विभाग से कहें,
अगले 48 घंटे तक सजग रहें,
रेल दुर्घटना में जहां मरने के दर्द भी होंगे,
तो संजोग से बचे कुछ खुश मर्द भी होंगे,
इसलिए अपना समय अच्छा पास होगा
बजने वाला आपकी कमीशन का डंका है।
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संकलक लेखक  एवं संपादक-दीपक   ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
Editor and writer-Deepak  ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://deepkraj.blogspot.com

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