Tag Archives: encrochment

आशियाने का दायरा-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ (ashiyane ke dayre-hindi comic poem’s


अपने आशियाने दायरों से बाहर तुम यूं ही बनाओगे,
मुफ्त के माल पर कब्जा कर जिंदगी को सजाओगे।
गुजर जाये कई बरस बड़े आराम और शांति से शायद
मगर जब आया बुलडोजर तो खून के आंसुओं से नहाओगे।
———–
तुम्हारे अतिक्रमण पर हुआ आक्रमण
भला कौन तुम्हें बचायेगा,
हदों से बाहर बने आशियानों में
रहने वाले तभी तक रहेंगे बेखौफ
जब तक जमींदौज करने कोई नहीं  आयेगा।
————
अपनी खिड़की से बाहर
यूं न झांका करो,
कोई परिंदा आंख से टकरा जायेगा,
हदों से बाहर है तुम्हारा आशियाना,
पर अहसास होगा इसको तब तुम्हारा
जब कोई लोहे का हरकारा खौफ बनकर आयेगा।
—————

कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
—————————

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका

4.दीपकबापू कहिन 
५.हिन्दी पत्रिका 
६.ईपत्रिका 
७.शब्द पत्रिका 
८.जागरण पत्रिका 
९.हिन्दी सरिता पत्रिका 
Advertisements