Tag Archives: हिन्दी शायरियाँ

हँसते नगमे दिल पर परचम फहराते-हिन्दी कविता


पत्थरों के खेल होते हैं
मगर वह जीते नहीं जाते,
कुछ घायल होते
कुछ बेमौत मर जाते।
कहें दीपक बापू
आओ
चंद शब्द मन में दुहराएँ,
कलम से होते जो कागज पर उतार आयें,
इंसान खुशनसीब है
भाषा मिली है बोलने के वास्ते,
क्यों चुने फिर पत्थर के रास्ते,
जज़्बातों में कुब्बत हो तो
दहशत के माहौल में भी
हँसते नगमे दिल पर परचम फहराते।
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
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भीड़ और तन्हाई-हिन्दी शायरियाँ


भीड़ का शोरशराबा देखकर
अब अपनी तन्हाई की तड़प नहीं सताती है,
कहें दीपक बापू
अकेलेपर से घबड़ाये लोग
ढूंढते हैं मेलों में खुशी का सामान
खरीदते ही हो जाता जो पुराना
फिर दौड़ते हैं दूसरी के लिये
उम्र उनकी भी ऐसे ही
तड़पते बीत जाती है
………………………………
उन दोस्तों के लिये क्या कहें
जिनसे छिपने की कोशिश हम करें
वह हमारे ठिकानों को ढूंढ ही डालते हैं,
कहें दीपक बापू
अपना चेहरा लेकर
बदल बदल कर अदाएँ
वह हर जगह सामने आते हैं
जिनसे मिलना हमेशा हम टालते हैं।
कवि, लेखक और संपादक-दीपक “भारतदीप”,ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak “BharatDeep”,Gwalior