शायद कोई हालात बदल दे-हिंदी कविता(shayad koyee halat badal de-hindi poem


जमाने को बदल देंगे
यह ख्याल अच्छा है
पर कोई चाबुक नहीं
किसी इंसान के पास
जिससे दूसरे का ख्याल बदल दे।
अमीरी खूंखार ख्याल लाती है,
कहर बरपाने के कदमों में
ताकत का सबूत पाती है,
गरीबी मदद के लिये
भटकाती है इधर से उधर,
दरियादिली के इंतजार में खड़े टूटे घर,
न बदलती किस्मत
न होती हिम्मत
बस उम्मीद जिंदा रहती है कि
शायद कोई हालात बदल दे।
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’ग्वालियर
jpoet, Writer and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
 
यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • हालत अगर बदल दी, इस अहले जमाने की /
    ईंटें कहां से लाओगे, बिल्डिन्ग को बनाने की //
    आलम में सभी नन्गे हैं, पर्दे में कौन है ?
    क्यों सिर खपा रहे हो, जहमत में फसाने की //
    बेहतर है भूल जाओ, कानों में रूई डालो /
    क्या है कोई जरूरत, लोगों को जगाने की ?

  • AJAY SAWAN  On 07/08/2011 at 14:16

    Dil Se Mai Teri Ibadat Karuga,
    Jab Bhi Karuga “Mohbbat” Karuga,
    Jab Hmne hi “khud” ko Samjha Hi Nahi,
    Gairo Se Kaise Sikayat Karuga,/……

    AJAY SAWAN,UP

  • manali mohan rahate  On 08/08/2011 at 22:33

    kya baat hai acha laga

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