दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)


 
कभी गम तो कभी खुशी
कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ
कविता लिखने का ख्याल किया
तब भाषा सजाने के साथ  
शब्द को जोर से बजाने का सोच  नहीं आया.
कोशिश की रस के रंग दिखाने 
और   अलंकार से कविता  सजाने की 
मिले जिससे भाषा विद्वान की उपाधि 
तब कविता को अपने दिल के  भाव से दूर पाया..
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कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • Brajbhooshan Goswami  On 22/03/2012 at 21:24

    उन पन्तियो की बात ही कुछ और हे .
    लिख जाय कुछ खास तुक बंदिया
    जबकि वो कवी न हो .

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