यह जिंदगी शब्दों का खेल है-हिंदी शायरी


महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी
आकाश से टपकेगी उम्मीद
ताकते हुए क्यों अपनी आंखें थकाते हो।
कोई दूसरा जलाकर चिराग
तुम्हारी जिंदगी का दूर कर देगा अंधेरा
यह सोचते हुए
क्यों नाउम्मीदी का भय ठहराते हो।।

खड़े हो जिन महलों के नीचे
कचड़ा ही उनकी खिड़कियों से
नीचे फैंका जायेगा
सोने के जेवर हो जायेंगे अलमारी में बंद
कागज का लिफाफा ही
जमीन पर आयेगा
निहारते हुए ऊपर
क्यों अपने आपको थकाते हो।

उधार की रौशनी से
घर को सजाकर
क्यों कर्ज के अंधेरे को बढ़ाते हो
जितना हिस्से में आया है तेल
उसमें ही खेलो अपना खेल
देखकर दूसरों के घर
खुश होना सीख लो
सच यह है कि महलों में रहने वाले लोग भी
झौंपड़ी में रहने वालों
से ज्यादा पेट नहीं भर पाते
तुम उनकी खोखली हंसी पर
क्यों अपना ही खून जलाते हो।

………………………………..
शब्दों के चिराग-हिंदी शायरी
—————-

यह जिंदगी शब्दों का खेल है
जो समझे वह पास
जो न समझे वही फेल है।
कहीं तीरों की तरह चलते हैं
कहीं वीरों की तरह मचलते हैं
लहु नहीं बहता किसी को लग जाने से
जिसे लगे उसे भी
घाव का पता नहीं लगता
दूसरों को ठगने वाले
को अपने ठगे जाने का
पता देर से लगता
कई बार अर्थ बदलकर
शब्द वार कर जाते हैं
जिसके असर देर से नजर आते हैं
जला पाते हैं वही शब्दों के चिराग
जिनमें अपनी रचना के प्रति समर्पण का तेल है।

……………………..

लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • brajesh mohan bhardw  On 18/05/2009 at 05:07

    yah sansar ek mayajal hai isi maya ke washibhut hokar manusya ye sare karm karta hai….aur isi ke kiye bo ek din apna jeevan nast kar deta hai…..manushya ka aadha jeevan to isi ke chakker mai khatm ho lata hai….

  • Naresh kuamr  On 07/09/2010 at 09:14

    ae mere watan ke logo,
    zara utho sambhlo, jago.,
    dekho-dekho ye rajnetik neta,
    kahan le chale tumhare desh ko.
    ab bhi waqt hai, cheen lo inke hathon se,
    apne desh ko,

    pata nahi kis khaee main
    fenkenge legakar isko.
    bahut kurbaniyo se jiti,
    hamne ye azadi ki jang
    aaj ki ye rajniti,

    pata nahi kya layegi rang.
    yadi chahte ho rehna azad,
    to utho, sambhalo apne desh ko
    mar kar in dhokhebaaz netaon ko dhakka
    jeet lo rajniti ki jang.

    aur bolo unki jaikar
    jinhone lekar di tumhe ye azadi ahirkaar.
    khel ke khoon ki holi,
    thama di tumhe desh ki doli.

    aao milkar sab yatan kare
    HINDUSTAN hamara azad rahe, khushaal rahe,
    abad rahe saugaat rahe ,
    duniya ke sar ka taj rahe,

    Happy Independence Day
    BE PROUD TO BE AN INDIAN

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