इस तरह सताते भविष्य के सपने-हिंदी शायरी


अतीत के गुजरे पल ही
दिमाग को इस तरह सताते
कि भविष्य के सपने
सामने चले आते
साथ चलता तो है
बस आज का सच
जो बहुत लगता है बहुत कठोर
उससे बचने के लिये
सपनों को ही बुने जाते
अगर सच हो गया तो ठीक
बिखर गया तो उस पर रोना क्या
जिंदगी है इसी का नाम
जिसमें सपनों के दौर आते जाते
……………………………………..

सपनों से जितना करते दूर होने की कोशिश
पास वह अपने चले आते
बहुत सोचते कि साथ ही
जिंदगी गुजारें
पर सपने बार-बारे बुलाते
जैसे कहते हों
‘बस कुछ करना नहीं है
कभी जमीन पर उतर कर
तेरे पास नहीं आयेंगे
तुम केवल ख्याल करने से क्यों घबड़ाते

…………………………….

यह आलेख ‘दीपक” भारतदीप की सिंधु केसरी-पत्रिका पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका 2.दीपक भारतदीप का चिंतन 3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

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