आओ लिखें-छटांक भर कविता


सागर की लहरे कितनी पास हों
किसी की प्यास नहीं बुझती
गागर की बूंदें ही काम आयें
दस दिशाऐं हैं धरती पर
जब चलें पांव एक ही दिशा में जायें
हाथी बड़ा बहुत है
महावत उस पर अंकुश की नौक से काबू पायें
बड़ा होने से क्या होता है
अगर कोई जमाने के का काम का न हो
छोटा है मजदूर तो क्या
उसी हाथ से बड़े-बड़े महल बन जायें
इतिहास में दर्ज है
बड़ों-बड़ों के पतन की कहानी
पढ़कर लोग भूल जाते
पर कवियों की छोटी छोटी
दिल को सहलाने वाले शब्द
कभी लोग भूल न पायें
बड़े बड़े ग्रंथ लिखकर भी
अगर जमाने को खुश न कर सके तो क्या फायदा
लिखे का असर दूर तो हो यही है कायदा
किलो की किताब लिखने से अच्छा है
आओ लिखें छटांक भर कवितायें
लोगों के दिमाग से उतरकर वापस न लौटें
उनके दिल में उतर जायें
बड़ी न हो, भले छोटी हो रचनायें

………………………………

यह आलेख ‘दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकापर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • pramod kumar  On 28/12/2009 at 19:22

    PYAR WALI SIYERI

  • Rajesh  On 07/02/2010 at 13:32

    सागर की लहरे कितनी पास हों
    किसी की प्यास नहीं बुझती
    गागर की बूंदें ही काम आयें
    दस दिशाऐं हैं धरती पर
    जब चलें पांव एक ही दिशा में जायें
    हाथी बड़ा बहुत है
    महावत उस पर अंकुश की नौक से काबू पायें
    बड़ा होने से क्या होता है
    अगर कोई जमाने के का काम का न हो
    छोटा है मजदूर तो क्या
    उसी हाथ से बड़े-बड़े महल बन जायें
    इतिहास में दर्ज है
    बड़ों-बड़ों के पतन की कहानी
    पढ़कर लोग भूल जाते
    पर कवियों की छोटी छोटी
    दिल को सहलाने वाले शब्द
    कभी लोग भूल न पायें
    बड़े बड़े ग्रंथ लिखकर भी
    अगर जमाने को खुश न कर सके तो क्या फायदा
    लिखे का असर दूर तो हो यही है कायदा
    किलो की किताब लिखने से अच्छा है
    आओ लिखें छटांक भर कवितायें
    लोगों के दिमाग से उतरकर वापस न लौटें
    उनके दिल में उतर जायें
    बड़ी न हो, भले छोटी हो रचनायें

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