सच का भला कौन साथी होता-कविता


अगर अकेले चल सकते हो
जिन्दगी की राह पर
तो सत्य बोलो जो
हमेशा कड़वा होता
अगर अपने इर्द-गिर्द जुटाना चाहते हो
लोगों की भीड़ तो
झूठ बड़ी सफाई से बोलो
जो हमेशा मीठा होता

यहाँ सब सच से घबडाए
भ्रम की छाया तले
जिंदा रहने के आदी हैं लोग
सर्वशक्तिमान के नाम पर
बताये संदेशों की दवा बनाकर
किया जाता है उसका दूर रोग
पर सच यह कि
भ्रम का कोई इलाज नहीं होता
जिसने जीवन दिया
उसी सर्वशक्तिमान के क्रुद्ध होने का भय
दिखाते कई सयाने
तंत्र-मन्त्र से लगते दर्द भगाने
उनको ढोंगियों के चंगुल से
कभी कोई बचा नहीं सकता
जाली धंधे का जाल भी
इतना कमजोर नहीं होता

मन का अँधेरा आदमी को
खुशी की खातिर कहाँ-कहाँ ले जाता
मिलता रौशन चिराग का पता
वहाँ अपनी देह खींच ले जाता
जिन पर हैं जमाने के दिल को रौशन
करने का ठेका
वह भी नकली चिराग बेच रहे हैं
पुरानी किताबों के संदेशों पर
चुटकुलों के पैबंद लगाकर
लोगों से पैसे अपनी और खींच रहे हैं
सच कह पाना लोगों से कठिन है
क्योंकि उसमें आदमी अकेला होता
सच का भला कौन साथी होता

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टिप्पणियाँ

  • mehhekk  On 06/02/2008 at 15:48

    bahut khub yahan tho jeevan ka pura satya hi bayan kiya hai,wonderful.

  • mamta  On 06/02/2008 at 16:04

    मन का अँधेरा आदमी को
    खुशी की खातिर कहाँ-कहाँ ले जाता
    मिलता रौशन चिराग का पता
    वहाँ अपनी देह खींच ले जाता

    कितनी गहरी बात कह रही है ये लाईनें।
    और ये भी एक सच है कि सच को किसी की जरुरत नही होता है।

  • Rewa Smriti  On 14/02/2008 at 16:38

    यहाँ सब सच से घबडाए
    भ्रम की छाया तले
    जिंदा रहने के आदी हैं लोग
    सर्वशक्तिमान के नाम पर

    Bahut sahi likha hai aapne…..

    rgds

  • ruby sarkar  On 03/03/2008 at 14:39

    i read sum poit.

  • ruby sarkar  On 03/03/2008 at 14:42

    muje aapki kavita bahut bhai

  • indradev gupta  On 14/08/2010 at 22:11

    sab kuch sach lagata hai.

  • krishan gill  On 17/08/2010 at 15:31

    jo likh rhe ho bhut achha kar rhe ho eska rejult bhut achha milega krishan gill

  • krishan gill  On 17/08/2010 at 15:35

    aapki nity bhut achhi h aap ke vichar la jwab h k.k. gill

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