अड़ जाये तो ब्लोगर भी कम नहीं


बाबू ने एक हाथ में फाईल पकडी
और ब्लोगर की तरफ हाथ बढाया
पहले तो वह समझा नहीं और
जब समझा तो गुस्सा आया
उसने कहा
”तुम मेरी फाइल दो
मैं तुम्हें रिश्वत नहीं दे सकता
मैंने अपनी जिन्दगी में
कभी किसी को रिश्वत न देने का व्रत उठाया’

बाबू ने मूहं से पान की पीक थूकते हुए कहा
‘क्या पगला गए हो
यहाँ क्या धर्मादा खाता खोले बैठें है
नही देते तो जाओ फाईल नहीं है
मैंने भी बिना कुछ लिए
काम न करने का फास्ट उठाया”
दोनों में मूहंवाद हो गया
आसपास के लोगों का झुंड दोनों के
इर्द-गिर्द सिमट आया
उसमें था एक ब्लोगर का एक दोस्त
उसने जब पूरा माजरा समझा
तो ब्लोगर को समझाया
”यार, जब तुम ब्लोग पर कोई
पोस्ट लिखते तो कमेन्ट आती हैं कि नहीं
कोई लिखता है तो तुम उसे देते कि नहीं
ऐसे ही समझ लो
इसकी पोस्ट पर एक कमेन्ट रख दो
पांच सौ का पता ही दे दो
इतने बडे ब्लोगर होकर तुम्हें
लेनदेन का रिवाज समझ में नहीं आया’

ब्लोगर ने दिया पांच सौ का नोट
और फाईल हाथ में लेकर बाबू से हाथ मिलाया
और मोबाइल दिखाते हुए कहा
”धन्यवाद आपका
आपने एक के साथ दूसरा काम भी बनाया
इसम मोबाइल में सब रिकार्ड है
आज पोस्ट कर दूंगा
आपको दी है एक कमेन्ट
सब शाम तक वसूल कर लूंगा
वाह क्या आईडिया अपने आप बन आया’

वह चल पडा तो
दोस्त और वह बाबू पीछे दौडे
बाबू हाथ पांव जोड़ने लगा और पैसे
वापस करते हुए बोला
मैं मर जाऊंगा
आप ऐसा मत करना
यह आपका दोस्त ही दलाल है
इसके कहने पर चलने का मलाल है
आप कुछ मत करना
अपने बच्चों पर है मेरा ही साया’
दोस्त भी तन कर बोला
”नहीं यह धोखा है
तुम ब्लोग लिखते हो कोई
स्टिंग आपरेशन करने का कोई हक़ नहीं है
यार, अगर तुम मुझसे पहले मिलते तो
यह परेशानी नहीं आती.
मेरी दोस्ती की कसम
ऐसा कुछ मत करना
यह प्रपंच तुमने ठीक नहीं रचाया’
ब्लोगर हंस पडा
”चलो तुम्हें माफ़ किया
क्योंकि ब्लोग पर स्टिंग आपरेशन भी
कभी हो सकता है
यह आईडिया तुमने ही दिया”

वहाँ से चल कर उसने मोबाइल को देखा
और कहा
‘पर इसमें फोटो का तो कोई प्रोविजन नहीं है
अड़ जाये तो ब्लोगर भी कम नहीं है
कैसा दोनों का उल्लू बनाया
कैसा जोरदार ख्याल आया’

नोट-यह एक हास्य-व्यंग्य रचना है और किसी घटना या व्यक्ति से इक्सा कोई लेना देना नहीं है और अगर किसे से मेल खा जाये तो वही इसके लिए जिम्मेदार होगा

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टिप्पणियाँ

  • राजीव तनेजा  On 24/12/2007 at 16:11

    बहुत खूब…..मज़ा आ गया जी….फुल्ल फुल्ल…
    क्या आईडिया निकाला है आपने…
    काम भी बना लिया मुफ्त में और ब्लॉग खातिर रचना का जुगाड भी कर लिया…..एक पंथ दो काज…..

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