कुछ पाने के लिये
दौड़ता है आदमी इधर से उधर
देने का ख्याल कभी उसके
अंदर नहीं आता
भरता है जमाने का सामान अपने घर में
पर दिल से खाली हो जाता
दूसरे के दिलों में ढूंढता प्यार
अपना तो खाली कर आता
कोई बताये कौन लायेगा
इस धरती पर हमदर्दी का दरिया
नहाने को सभी तैयार खड़े हैं
दिल से बहने वाली गंगा में
पर किसी [...]
Author Archives: दीपक भारतदीप
शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी
ख्वाहिश है कि जमाना उनको सलाम करे- हिन्दी शायरी
जिंदगी जीने का उनको बिल्कुल सलीका नहीं है
उनके पास वफा बेचने का कोई एक तरीका नहीं है
भीड़ में मचायें शोर अपनी जिंदगी के तजूर्बे का
पर उससे कभी कुछ खुद सीखा नही है
ख्वाहिश है कि जमाना उनको सलाम करे
आवाजें हैं उनकी बहुत तेज,पर शब्द तीखा नहीं है
बेअसर बोलते हैं पर जमाना फिर भी मानता [...]
नहीं मिलते उनकी करतूतों के निशान-हिंदी शायरी
कई किताबें पढ़कर बेचते है ज्ञान
अपने व्यापार को नाम देते अभियान
चार दिशाओं के चौराहे पर खड़े होकर
देते हैं हांका
समाज की भीड़ भागती है भेड़ों की तरह
नाम लेते हैं शांति का
पहले कराते हैं सिद्धांतों के नाम पर झगड़ा
बह जाता है खून सड़कों पर
उनका नहीं होता बाल बांका
कोई तनाव से कट जाता
कोई गोली से उड़ जाता
पर किसी [...]
मौसम अच्छा हो तो घर पर ही मन जाती है पिकनिक -व्यंग्य
अपने जीवन में मैं अनेक बार पिकनिक गया हूं पर कहीं से भी प्रसन्न मन के साथ नहीं लौटा। वजह यह कि बरसात का मौसम चाहे कितना भी सुहाना क्यों न हो अगर दोपहर में पानी नहीं बरस रहा तो विकट गर्मी और उमस अच्छे खासे आदमी को बीमार बना देती है।
वैसे अधिकतर [...]
पाठ का इतना हिट होना मेरे लिये विस्मय का विषय-आलेख
मुझे विस्मय इस बात का है कि कबीरदास जी के मात्र दोहे और उनका अनुवाद प्रस्तुत करने वाले उस पाठ पर पाठकों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। कल उस पर चालीस व्यूज थे। मैंने पाठकों के आने का मार्ग देखा तो पाया कि गूगल के अनुवाद टूल पर अंग्रेजी में [...]
इंसान कभी चिराग नहीं हो सकते-हिन्दी शायरी
यूं तो चमकता चाँद देखकर
अपना दिल बहला लेते
पर जब आकाश में नहीं दिखता वह
छोटा चिराग जला लेते हैं
जिन्दगी में अपने
रौशनी के लिए क्यों
किसी एक के आसरे रहें
इसलिए कई इंतजाम कर लेते हैं
इंसानों का भी क्या भरोसा
उजियाले में करते हैं
हमेशा साथ निभाने का
अँधेरा ही होते मुहँ फेर लेते हैं
—————————————
मांगी थी उनसे कुछ पल के लिए [...]
कबीर साहित्य के पाठ की पाठक संख्या एक हजार के पार
मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। इसको मैं पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं और मूल पाठ को पढ़ने के लिये यहां क्लिक भी कर कर सकते हैं। जिस समय में इस पाठ को लिख रहा हूं तब उस पर [...]
अकेले होने के गम में इसलिये रोते रहे-कविता
भीड़ में हमेशा खोते रहे
अपने से न मिलने के गम में रोते रहे
नहीं ढूंढा अपने को अंदर
आदमी होकर भी रहा बंदर
लोगों के शोर को सुनकर ही बहलाया दिल
अपनी अक्ल की आंख बंद कर सोते रहे
जमाने भर का बेजान सामान
जुटाते हुए सभी पल गंवा दिये
दिल का चैन फिर नहीं मिला
जो आज आया था घर में
उसी से [...]
फिर भी तुम बरसते रहना-कविता
सूरज की गर्मी में झुलसते हुए
पानी में नहा गया था बदन
जलती हवाओं में
गर्म मोम की तरह पिघल रहा था मन
चारों तरफ फैला था क्रंदन
ऐसे में जो आये आकाश पर बादल
बिछ गयी पानी की चादर
जैसे स्वर्ग का अनुभव हुआ जमीन पर
लहराने लगा जलती धूप से त्रस्त लोगों का बदन
कहैं महाकवि दीपक बापू
तुम सभी जगह [...]
hasya kavita-प्यार कोई कारखाने में बनने वाली चीज नहीं है-कविता
मन में प्यास थी प्यार की
एक बूंद भी मिल जाती तो
अमृत पीने जैसा आनंद आता
पर लोग खुद ही तरसे हैं
तो हमें कौन पिलाता
स्वार्थों की वजह से सूख गयी है
लोगों के हृदय में बहने वाली
प्यार की नदी
जज्बातों से परे होती सोच में
मतलब की रेत बसे बीत गईं कई सदी
कहानियों और किस्सों में
प्यार की बहती है [...]
कभी खिलता हूं, कभी मुरझा जाता हूं-कविता
अपने घर पर रखे गमलों में
पौधों को लगाते हुए देखकर माली को
बहुत खुश होता हूं
उनमें कुछ मुरझा जाते हैं
कुछ खिलकर फूलों के झुंड बन जाते है
फिर वह भी मुरझा जाते हैं
अपना जीवन जीते हैं
फिर साथ छोड़ जाते हैं
फिर लगवाता हूं नये पौधे
इस तरह वह मेरे जीवन को
कभी महकाते हैं
तो कभी मुरझाकर दर्द दे जाते हैं
घर [...]
सभी की सोच मतलब के घर में बंद है-हिंदी शायरी
कोई लिखकर कहे या
अपनी जुबां से बोले
कोई ऐसे शब्द कान में अमृत घोले
मन में छा जाये प्रसन्नता की सरिता
इसी चाहत में उम्र गुजार दी
पर प्यासे रहे हमेशा
कोई नहीं बोल पाया
नहीं लिख पाया कुछ मीठे शब्द
हमने बोले कुछ प्यार के
तो लिखे भी बहुत
पर जमाना ही है लाचार और बेबस
जूझता है अपने दर्द और गमों [...]
जैसी अभिव्यक्ति वैसी ही अनुभूति-हिन्दी शायरी
राह पर चलते हुए जो
मैंने देखी जोर से चिल्लाते लोगों की भीड़
वहां एक खड़े एक आदमी से पूछा
‘यहां क्या हो रहा है’
उसने कहा-‘झगड़ा हो रहा है’
मैं कुछ दूर चला तो जोर जोर से
लोगों को स्तुतिगान गाते सुना
मैंने एक आदमी से पूछा
‘यह इतना शोर क्यों हो रहा है’
उसने गुस्से से कहा
‘
फ्लाप ब्लाग/पत्रिका ने पार की दस हजार पाठक संख्या
मेरा यह ब्लाग आज पढ़े गये पाठों की संख्या की दृष्टि से दस हजार संख्या पार गया। कुछ लोगों के लिए यह मामूली बात है। अंग्रेजी के कई ब्लाग पर मैं आठ लाख व्यूज देख चुका हूं। हिंदी में मेरा वर्डप्रेस का यह चैथा ब्लाग है जिसने इस संख्या को पार किया। दो पहले बीस [...]
पाठक रूपी सारथि ही बनाता है लेखक महारथी-आलेख
सभी पाठक लेखक हों यह आवश्यक नहीं है पर सभी लेखकों को पाठक अवश्य होना चाहिए। एक लेखक को कभी किसी अन्य की रचना एक लेखक के रूप में नही बल्कि एक पाठके के रूप में पढ़ना चाहिए। एक लेखक में बैठा उसका पाठक ही उसकी रचना रूपी रथ का सारथि हो सकता [...]
मौसम पर कविता नहीं लिखेंगे-हास्य कविता
आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापू, गर्मी में हो रही बरसात
जहां रुलाता पसीना, वहां करती बहार अपनी बात
लिखो कोई जोरदार कविता
बहने लगे श्रृंगार रस की सरिता
शायद तुम्हारे नाम से फ्लाप का लेबल हट जाये
हिट होकर तुम्हारा नाम आकाश पर चमक जाये
कोई कुछ भी कहे तुम करो
अपनी पत्रिका पर मौसम पर कविता की बरसात’
जाने को तैयार [...]
अपनी असली पहचान खोते जाते-कविता
प्रसिद्ध होने के लिए
चले जाते है उस राह पर
जहां बुरे नाम वाले हो जाते हैं
अगर नाम चमका आकाश में तो
जमीन पर गिरकर चकनाचूर
होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं
पत्थरों पर नाम लिखवाने से
लोगों के हृदय में जगह नहीं मिल जाती
हंसी की करतूतों पर लोगों के ताली बजाने से
कुछ पल अच्छा लगता है
पर कोई इज्जत नहीं [...]
दिल बहलाने के लिए देख लो सुंदर तस्वीरें कहीं-कविता
हंसते चेहरे देखकर हंसता हूं
दिल बहलाने के लिये दूसरों की
हंसी भी सहारा बन जाती है
किसी के दर्द पर हंसने वाले बहुत हैं
दूसरों को हंसा दें ऐसी सूरतें
कभी कभी नजर आती हैं
नहीं मिलता तो देख लेता हूं
हंसते हुए लोगों तस्वीरें
दर्द से परे जो ले जातीं हैं
………………………………………………
आंखों से देखने का उम्र से
कभी कोई वास्ता नहीं
अगर बहलता हो [...]
सदियों से धोखा देता आया चांद-कविता
आज महक जी के ब्लाग पर एक फोटो और अच्छी गजल देखी। ऐसे में मेरा कवित्व मन जाग उठा। कुछ पंक्तियां मेरे हृदय में इस तरह आईं-
समंदर किनारे खड़े होकर
चंद्रमा को देखते हुए मत बहक जाना
अपने हृदय का समंदर भी कम गहरा नहीं
उसमें ही डूब कर आनंद उठाओ
वहां से फिर भी निकल सकते हो
अपनी सोच [...]
विचारों की धारा-कविता
विचारों की धारा मस्तिष्क में
बहती चली जाती है
जब तक बहती है
अच्छा लगता है
जब एक विचार अटक जाता है
रुकी धारा से दुर्गंध आती है
प्रसन्न्ता का समय
बहता जाता हे
पर दुःख के पल में
घड़ी बंद नजर आती है
एकांत से हटकर भीड़ में जाकर
भला कहां मिलती है शांति
अकेले में भी अपनों के दर्द की
याद आकर सताती है
मन में जगह [...]
कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख
सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में हैं और आपको लगता है कि उसमें कड़वाहट का अश है तो वह उसके समक्ष कभी व्यक्त मत करिये। ऐसा कर आप न केवल उसे बल्कि उसके चाहने वालों को भी अपना विरोधी बना लेते हैं। हां, मैं [...]
तंबाकू, एकता और योगसाधना-आलेख
पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर पड़ने वाले मंदिरों को देखने का फैसला किया। हम जब बिड़ला मंदिर पहुंचे तो उस समय उमस बहुत थी। हम दोनों अंदर गये और कुछ देर ध्यान लगाने के बाद बाहर निकले। मैंने वहां पानी पिया [...]
ईमानदारी का न्यूनतम स्तर-व्यंग्य चिंतन
कल सुबह बिजली न होने के कारण मैं घर से अपने किसी भी ब्लाग पर कोई भी पाठ प्रकाशित किये बिना ही चला गया। वैसे भी परसों रात मेरे सारे पाठ हिंदी के सभी ब्लाग एक जगह दिखाने वाले फोरमों पर फ्लाप हो गये थे तो मैं और आधा घंटा बिजली का इंतजार कर कोई [...]
जैसी दी शिक्षा वैसा ही शिष्य पाया-हास्य कविता
गुरू चेले थे बरसों से साथ
पर उस दिन गुरू को गुस्सा आया
लग चेले पर बरसने
‘मैने कई बरस तक दी तुझे सीख
पर तू मेरे किसी काम न आया
देश की प्राचीन गुरू-परंपरा पर
तू ने बहुत बड़ा कलंक लगाया’
अभी तक कभी जवाब न देने वाले
शिष्य को भी उस दिन ताव आया
और पलटकर बोला
‘साथ-साथ रहे पर बड़े होने से
तुमकों [...]
स्टार्ट अप को समोसा मान लेते हैं-व्यंग्य चिंतन
गूगल के अंग्रेजी हिंदी टूल आने का भारत के अनेक क्षेत्रों के प्रतीक्षा थी। भारत मेें भी हिंदी ब्लाग जगत पर इसकी चर्चा कुछ समय से हो रही थी।मेरे एक ब्लाग पर एक अंग्रेजी ब्लाग लेखक ने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि एसा टूल आ रहा है इससे भाषा की दीवार समाप्त हो जायेगी। [...]
लिखने और प्रयोग करने में क्या हर्ज है- व्यंग्य
बहुत दिन से लोगों ने ऐसी हिंदी लिखी नहीं होगी जैसी उसे अंग्रेजी में अनुवाद टूल देखने का इच्छुक है। मैने गूगल के हिंदी टूल से समझौता करने का निर्णय किया तो मुझे जितना आसान लग रहा था उतना है नहीं।
पिछले कई वर्षों से मन में हिंदी का विख्यात लेखक बनने की इच्छा रही जो [...]
इंसान तो कठपुतली है-हास्य कविता
आदमी के पंख नहीं होते
जो वह आसमान में उड़ सके
पर उसका मन बिना पंख के ही
उड़ता चला जाता है
उसके पांव आदमी की काबू में होते नहीं
पंरिदे बनाते हैं लोगों के घर में भी घरोंदे
पर उनके बिस्तर पर सोते नहीं
खुशी में झूमकर नाचता इंसान
दुःख में अपने ही आंखो से बहती
अश्रुधारा में करता स्नान
पर परिंदे कभी रोते [...]
महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य
सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के दिमाग में ‘बुद्धिजीवी महिला सम्मेलन’ करवाने का विचार आया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कुछ लोगों ने समझाया। एक समझदार ने कहा-‘‘इस देश की शिक्षा पद्धति ने लोगों को गहरे ज्ञान से वंचित किया है और सभी प्रकार के बुद्धिजीवी चाहे [...]
अंग्रेजी नाम, हिंदी नाम-आलेख
अंतर्र्जाल पर हिंदी लिखते हुए मुझे एक बात अनुभव हो रही है कि यहां रूढ़ता का भाव अपने हृदय में रखने को कोई मायने नहीं है। अंतर्जाल पर अनेक वेब साइटों और ब्लाग पर निकल रही हिंदी पत्र-पत्रिकाओं के नाम हिंदी में है तो अंग्रेजी में नहीं और अंग्रेजी में है तो हिंदी में नहीं। [...]
मोबाइल मोहब्बत हो गई-हास्य कविता
प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की
घंटी बड़ी उम्मीद से बजाई
जा रही थी वह गाड़ी पर
चलते चलते ही उसने
अपने मार्ग में होने की बात उसे बताई
फिर भी वह बातें करता रहा
वह भी सुनती रही
सफर गाड़ी पर उसका चलता रहा
अचानक वह कार से टकराई
प्रेमी को भी फोन पर आवाज आई
प्रेमी ने पूछा
‘क्या हुआ प्रिये
यह कैसी आवाज आई
कोई [...]
गरीबों का खाना सहता कौन है? हास्य व्यंग्य
अमेरिका के राष्ट्रपति जार्जबुश ने कहा है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिये भारत के लोग ही जिम्मेदार हैं क्योंकि वह ज्यादा खाते हैं। उनके इस बयान पर यहां बवाल बचेगा यह तय बात है और यह भी कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय भी अब वहां संदेह की दृष्टि से देखें जायेंगे। अगर [...]
संत कबीर वाणीःभक्ति के लिये हृदय में शुद्ध भावना जरूरी
पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार
भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार
संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि पत्थर और पानी को पूज कर सारे संसार के लोग नष्ट हो गये पर अपने तत्व ज्ञान को नहीं जान पाये। वह ज्ञान तो एकदम अलग है। अगर कोई ज्ञानी गुरु मिल जाये तो उसे प्राप्त कर [...]
चाणक्य नीतिःधन कमाने वाले धर्म की स्थापना नहीं कर सकते
अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः
मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः
जिस प्रकार विषहीन सर्प किसी को हानि नहीं पहुंचा सकता, उसी प्रकार जिस विद्वान ने धन कमाने के लिए वेदों का अध्ययन किया है वह कोई उपयोगी कार्य नहीं कर सकता क्योंकि वेदों का माया से कोई संबंध नहीं है। जो विद्वान प्रकृति के लोग असंस्कार [...]
क्रिकेट में अब देशप्रेम का सुख नहीं उठाते-हास्य कविता
आया फंदेबाज और बोला
‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना
पता नहीं तुम्हें अब यहां
क्रिकेट मैच चल रहे हैं
तुम्हारे नेत्र उनका आनंद उठाने की बजाय
कंप्यूटर में जल रहे हैं
क्यों नहीं कुछ मजा उठाते’
सुन कर पहले उदास हुए
फिर टोपी लहराते हुए कहें दीपक बापू
‘जजबातों में बहकर देख लिया
जिनकी जीत पर हंसे
और हारने पर रोए
उनके खिलवाड़ को सहकर [...]
आठ साल की बच्ची का हाथ कैसे कुचला जा सकता है-आलेख
आज श्री सुरेश चिपलूनकर जी ने कुछ फोटो की श्रृंखला भेजी जिसने मेरा मन विचलित कर दिया। वह अकेले ऐसे ब्लागर हैं जिनसे मैं व्यक्तिगत रूप से मिल चुका हूं। मुलाकात के बाद वह अपने ब्लाग और ऐसे फोटो ईमेल से भेज देते हैं। उनका लेखन कितना प्रभावी है यह बताने की आवश्यकता नहीं है [...]
तब तक बहुत देर हो जायेगी-हास्य कविता
हर शाख पर उल्लू बिठा दो
जब बिजली चली जायेगी
वह तरक्की-तरक्की के नारे लगायेगा
लोग समझेंगे सब ठीक-ठाक है
अंधेरे में भला किसे तरक्की नजर आयेगी
………………………………………………………………………..
तरक्की हो रही चारों तरफ
भ्रमित लोग चले जा रहे यह सोचकर कि
कहीं हमें भी मिल जायेगी
जमीन में धंसता जा रहा है पानी
आदमी में कहां रहेगा
घर में बढ़ते कबाड़ में खोया
जब गला तरसेगा पानी [...]
बंधे सबके अपनी मजबूरी से हाथ-हिन्दी शायरी
यूं दर्द बांटने चले थे जमाने के साथ
शायद बढे मदद के लिए अपनी तरफ हाथ
हम खड़े देखते रहे
लोग हंसते रहे
जो हमने पूछी वजह तो
बताया‘यहां सब सुनाने आते हैं दर्द
कोई नहीं बनता किसी का हमदर्द
मूंहजुबानी बहुत वादे करने की
होड़ सभी लोग करते
पर देता कोई नहीं साथ
बंधे सबके अपनी मजबूरी से हाथ
हमने भी कुछ खोया नहीं-हिन्दी शायरी
अपनी राह चलते जाना है
कहीं फूल बरसेंगे
तो कहीं लोग ताने कसेंगे
थोड़ी खुशी के लिये
बहुत दूर तक ढूंढते बहाने
निराश होने पर
भागने लगते हैं गम भुलाने
ऐसे लोगों के इशारे पर
अगर चले जिंदगी की राह पर
तो ताउम्र अपनी मंजिल को तरसेंगे
……………………………………………….
उनके इशारे पर लड़ते रहे जमाने से
वह तो रहे पर्दे में, मतलब रख कमाने से
जो वक्त आया तो [...]
मानसिक गुलामी किसी को दिखाई नहीं देती-आलेख
मनोरंजन के नाम पर जिस तरह के कार्यक्रम विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में अंधविश्वासों और रूढियों को प्रतिपादित किया जा रहा है उससे तो ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के मन में आज भी यह बात है कि इस देश के लोग ज्ञान की दृष्टि से अंधेरे में [...]
जो बडे हैं वह कभी संयम नहीं गंवाते-हास्य कविता
आया फंदेबाज और बोला
”क्या दीपक बापू हम तो
समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को
पर हम अब समझे हमें भरमाते हो
सभ्य शब्दों की बात करते हो
गालियाँ लिखने में शर्माते हो
देखो अंतर्जाल पर बडे-बडे लेखकों के नाम का
लेखक गालिया चाप (छाप) जाते
और लोग तारीफ भी कर आते”
सुन पहले चौंके
फिर कुर्सी से उठकर
टोपी को घुमाते कहानी [...]
एक ढूंढो हजार मूर्ख मिलते हैं-आलेख
कल बिहार में एक स्थान पर एक महिला को जादूटोना करने के आरोप जिस बहशी ढंग से अपमानित किया गया हैं वह देश के लिये शर्म की बात है। यह कोई पहली घटना नहीं है जो ऐसा हुआ है और न शायद यह आखिरी अवसर है। पहले भी ऐसी [...]
देशी कुत्तों की तस्करी की खबर सुनकर आयी मुझे अपने कुत्ते की याद-आलेख
देशी कुतों की तस्करी भी हो सकती है कि यह कभी हमें सोचा भी नहीं था। आज टीवी में यह खबर सुनकर हम हैरान हो गए, पर खबर तो खबर है। बाकायदा नागालेंड भेजने के लिए उनको तैयार किया गया था। वहां उसके मांस से खाद्य सामग्री बनायी जाती है जिसे बडे शौक से खाया [...]
होली के दिन सबका चरित्र बदल जाता है-हास्य कविता
घर से नेकर और कैप पहनकर
निकले घर से बाहर निकले लेने किराने का सामान
तो सामने से आता दिखा फंदेबाज
और बिना देख आगे बढ़ गया किया नही मान
तब चिल्ला कर आवाज दी उसे
”क्यों आँखें बंद कर जा रहे हो
अभी तो दोपहर है
बिना हमें देखे चले जा रहे हो
क्या अभी से ही लगा [...]
संत कबीर वाणी:मुहँ में डाले तेल से आंखों देखा घी भला
आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल
साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल
आंखों से देखा घी का दर्शन भी अच्छा है और तेल तो मुख में डाला हुआ भी अच्छा नहीं है। साधू-संतो से झगडा भी अच्छा है परन्तु निगुरा (जिसका कोई गुरू नहीं है) से मेल-मिलाप कदापि अच्छा नहीं है, क्योंकि साधू [...]
संत कबीर वाणी:जैसा भोजन और पानी वैसा मन और वाणी
आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक
कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक
संत कबीर जी का कहना है की गाली आते हुए एक होती है, परन्तु उसके प्रत्युत्तर में जब दूसरा भी गाली देता है, तो वह एक की अनेक रूप होती जातीं हैं। अगर कोई गाली देता है तो उसे सह जाओ [...]
रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है
रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि
दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि
कविवर रहीम का कथन है कि नीच व्यक्ति के संपर्क में रहने से सबको कलंक ही लगता है। मद्य बेचने वाले व्यक्ति के हाथ में दूध होने पर भी लोग उसे मदिरा ही समझते हैं।
रहिमन निज संपत्ति बिना, कोउ [...]
नंबर वन और टू का खेल-हास्य व्यंग्य
मुझे कल ही लग रहा था कि कोई चालाकी है और इन्तजार कर रहा था कि आज उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है। कल चाकलेटी चेहरे वाले हीरो ने कहा-” मैं नंबर वन हूँ वह जो क्रिकेट के व्यापार में लगा है वह दो नम्बर है।”
लोग भले ही कड़ी प्रतिक्रिया उम्मीद लगा रहे थे [...]
अपने मुहँ से अपनी तारीफ़-हास्य व्यंग्य
अब दो फिल्म अभिनेताओं में झगडा शुरू हो गया है कि वह नंबर वन हैं। आज जब मैंने यह खबर एक टीवी चैनल पर सुनी तो मुझे हैरानी नहीं हुई क्योंकि हमारे बुजुर्ग कहते रहे हैं कि चूहे को मिली हल्दी की गाँठ तो गाने लगा कि ”मैं भी पंसारी, मैं भी [...]
हॉकी में ओलंपिक से बाहर होने के मायने-आलेख
ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम नहीं होगी। टीम ओलंपिक जाती थी तो कौनसे तीर मारती थी कहने वाले तो कह सकते हैं। ओलंपिक दुनिया का सबसे बड़ा महाकुंभ है और उसमें भारत की पहचान केवल हॉकी से ही है और किसी खेल में भारत का नाम इतना नहीं है। जब ओलंपिक में सारे [...]
दुआएं ही कर सकते हैं कि हाकी का अस्तित्व बचे-आलेख
अगले ओलंपिक में भारत की हाकी टीम नहीं खेलेगी। देश के नये खेल प्रेमियों को शायद ही इससे मतलब हो पर फिर भी पुराने खेल प्रेमियों को लिए यह खबर सदमें से कम नहीं है। इस देश के अधिकतर खेल प्रेमियों को क्रिकेट पसंद हैं पर सभी को नहीं वरना हाकी खेलने के लिए [...]
आंकडों का खेल भी इन्द्रजाल जैसा -आलेख
आज एक ब्लोग पर हमने वह वेब साईट देखी जिसमें सभी ब्लोग की कीमत का मूल्यांकन किया जा सकता है. उत्सुकतावश हमें उसे खोल कर देखा और अपने सभी ब्लोग की रेट लिस्ट ले आये. देखकर हैरान रह गए कि हमारे सभी ब्लोग फ्लॉप श्रेणी में हैं पर कुल जमा हम फ्लॉप नहीं [...]
सुनने से पहले ही लोग भूल जाते बात-कविता
पहले तोड़कर फिर जोड़ने की बात
पहले रुलाकर फिर हँसाने की बात
अपनी नाकामियों को छिपाने के
लिए रोज नया मोर्चा खोलने की बात
बौना चरित्र, खोखला ख्याल और
खोटी नीयत से समाज में बदलाव की बात
बरसों से चल रही है यहाँ
कहने वालों को लोग सिर उठा लेते हैं
सौंप देते अपने दिल के ताज
फिर भी चल रही है [...]
तुम्हारी रक्षा करेगा ज्ञान-साहित्यक कविता
गुरु ने शिष्य को विदा
करने से पहले पूछा
”तुम अब जाओगे
जीवन के पथ पर
चल्रते जाओगे प्रगति पथ पर
सेवा करोगे या चाहोगे सम्मान
शिष्य ने कहा
”गुरु आपने कहा था
ज्ञान कभी पूरा किसी का हो नहीं सकता
मैं तो अभी भी चाहूंगा ज्ञान”
गुरु ने खुश होकर कहा
”तब तो तुम सेवा से स्वत: बडे हो जाओगे
हर सम्मान से [...]
अप्रवासी और प्रवासी हिन्दी लेखक-आलेख
अप्रवासी ब्लोगरों को लेकर मेरे मन में बहुत जिज्ञासा रहती है क्योंकि उनके लिखे पर उस देश के परिवेश और संस्कृति की जानकारी मिल जाती है जो अन्य कहीं नहीं मिल पाती. हांलांकि समाचार पत्र-पत्रिकाओं में इस बारे में अक्सर छपता है पर वह अधिकतर सारे देश को इकाई मानकर लिखा जाता है और [...]
संत कबीर वाणी:ज्ञान रुपी हाथी की सवारी कीजिए, भौंकने पर ध्यान न दीजिये
हस्ती चढ़िए ज्ञान की, सहज दुलीचा डार
श्वान रूप संसार है, भूंकन दे झकमार
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं की ज्ञान रूपी हाथी पर सहज भाव से दुलीचा डालकर उस पर सवारी कीजिए और संसार के दुष्ट पुरुषों को कुत्ते की तरह भोंकने दीजिये, उनकी पवाह मत करिये.
कहते को कहि जान दे, गुरु की सीख [...]
चाणक्य नीति:समय का ख्याल करना पशु-पक्षियों से सीखें
1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई करने में खुश होते हैं। अपने वचनों द्वारा से कभी-कभी अपने ही वाचों द्वारा बिछाए जाल में स्वयं ही घिर जाते हैं और उसी तरह नष्ट हो जाते हैं जिस तरह रेत की टीले के भीतर [...]
चाणक्य नीति:देवता तो बस भावना में बसते हैं
1.जिस प्रकार फूल में गंध, तिल में तेल, लकडी में आग, दूध में घी और ईख में गुड होता है वैसे ही शरीर में आत्मा होती है यह विचार करना चाहिऐ।
2.देवता न कंठ में, न मिटटी की मूर्ति में होते हैं। वह तो केवल भावना में बसते हैं। इसलिए ही भावना ही सब कुछ [...]
रहीम के दोहे:हृदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता
गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि
कूपहु ते कहुं होत है, मन काहु को बाढि
कविवर रहीम कहते हैं की जिस प्रकार रस्सी के द्वारा कुएँ से पानी निकल लेते हैं, उसी प्रकार अच्छे गुणों द्वारा दूसरों के ह्रदय में अपने लिए प्रेम उत्पन्न कर सकते हैं, क्योंकि किसी [...]
विदुर नीति:अकेले वृक्ष के बलवान होने पर भी आंधी उसे गिरा देती है
*जलती लकडियाँ अलग-अलग होने पर धुआं और एक साथ होने पर अग्नि को प्रज्जवलित करतीं हैं इसी प्रकार फ़ुट होने पर लोग कष्ट उठाते हैं और एक होने पर सुखी होते हैं।
*यदि वृक्ष अकेला है तो बलवान, दृढ़ और बृहद होने पर भी एक ही क्षण में आंधी के द्वारा बलपूर्वक शाखाओं सहित धराशायी किया [...]
रहीम के दोहे:सज्जन सौ बार रूठे तो भी मनाएं
जैसी जाकी बुद्धि है, तैसे कहैं बनाय
ताकौं बुरो न मानी, लें कहाँ सो जाय
कविवर रहीम जी कहते हैं कि जिस मनुष्य की जैसी बुद्धि है वह उसके अनुरूप ही तो काम करता है। उस मनुष्य का बुरा मत मानिए क्योंकि वह और बुद्धि कहाँ लेने जायेगा।
टूटे सुजन मनाइये, जौ टूटे सौ बार
रहिमन [...]
सच का भला कौन साथी होता-कविता
अगर अकेले चल सकते हो
जिन्दगी की राह पर
तो सत्य बोलो जो
हमेशा कड़वा होता
अगर अपने इर्द-गिर्द जुटाना चाहते हो
लोगों की भीड़ तो
झूठ बड़ी सफाई से बोलो
जो हमेशा मीठा होता
यहाँ सब सच से घबडाए
भ्रम की छाया तले
जिंदा रहने के आदी हैं लोग
सर्वशक्तिमान के नाम पर
बताये संदेशों की दवा बनाकर
किया जाता है उसका दूर रोग
पर [...]
जहाँ ले जाता मन-कविता साहित्य
दिल में हो कड़वाहट तो मीठा कैसे लिखें
उदासी हो दिल में, चेहरे से हँसते कैसे दिखें
कितना कठिन अपने को छिपाना मन की आँखों से
जैसे अपने को लगें वैसे ही दूसरों को भी दिखें
जमाने के साथ कब तक चल सकती है चालाकी
कब तक अपने दिल का हाल छिपा कर लिखें
कहीं कोई आस नहीं, फिर [...]
महिला जाग्रति के लिए-हास्य कविता
प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में वह विद्वान
बोल रहे थे
”घर से कितना भी सजकर
सड़क पर खुले में जाएं
तो गाड़ियों के धुएं में
सबके चेहरे काले हो जाएं
अगर जाएं बंद गाडी में
करें अपना सफर पूरा तो
लोगों को अपनी सुन्दरता पर
ध्यान कैसे दिलाएं
दुनिया में फैले प्रदूषण से
महिलाओं को खास परेशानी है
हम चाहते हैं कि इस समस्या को सब
मिलकर [...]
रहीम के दोहे:जहाँ ईर्ष्या की गाँठ है वहाँ आनंद रस नहीं
जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं, यह रहीम जग होय
मंड़ए तर की गाँठ में, गाँठ गाँठ रस होय
कविवर रहीम कहते हैं कि यह संसार खोजकर देख लिया है, जहाँ परस्पर ईर्ष्या आदि की गाँठ है, वहाँ आनंद नहीं है. महुए के पेड़ की प्रत्येक गाँठ में रस ही रस होता है वे परस्पर जुडी [...]
सुबह और शाम का दृश्य-लघुकथा
वह एक गृह स्वामी की तरह अपने पोर्च के नीचे खडा था . कालोनी का चौकीदार पैसे मांगने आया और बोला-”बाबूजी नमस्कार.
उसने अपने पहले दोनों हाथ जोड़े और अपना एक हाथ मांगने के लिए बढाया.
उसके जेब में दस, बीस, पचास और सौ के नोट थे, पर उसे तीस रूपये देने का मन नहीं हुआ [...]
संत कबीर वाणी:जब फसल घर आये तभी उसे अपनी समझो
पकी कहती देखि के, गरब किया किसान
अजहूँ झोला बहुत हैं, घर आवै तब जान
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं की फसल को तैयार देखकर किसान खुशी से फूला नहीं समाता. उसे अत्यंत अभिमानी हो जाता. परतु यह उसका भ्रम है क्योंकि उसके बाद भी बहुत परेशानियाँ होतीं हैं और जब वह कटकर घर [...]
कमेन्ट ही रजाई का काम कर जायेगी-हास्य कविता
आकर फंदेबाज बोला
”दीपक बापू
इस ठंड में क्या
कीबोर्ड पर उंगली नचा रहे हो
लो लाया हूँ बोतल
तुम तो अब हो गए हो काईयाँ
शराब का नशा छोड़
ब्लोग पर पोस्ट पर लगे कमेन्ट के
पैग पीकर
जेब के पैसे बचा रहे हो’
सुनकर उखड़े दीपक बापू पहले
फिर सिर पर रखी टोपी घुमाते बोले
‘कह गए बुजुर्ग
अधिक नशा करना ठीक नहीं
साथ ही [...]
जल्दी टीवी बनवा लेना-हास्य कविता
घर में घुसते ही बाप ने बेटे से कहा
”बेटा तुम्हारी मां के कमरे में रखा टीवी
खराब हो गया है
अगर तुम बचना चाहते हो
गृहयुद्ध से तो आज
अपने कमरे में रखे टीवी के
प्लग में गडबडी कर देना
ताकि सास के मन को भी हो जाये तसल्ली
आज खामोश रहे
कल छुट्टी के दिन मां का टीवी
किसी भी तरह बनवा लेना
वैसे [...]
प्रभावपूर्ण दस्तक देते हैं सागरचंद नाहर-समीक्षा
अंतर्जाल पर बहुत लोग लिख रहे हैं और हर किसी को ब्लोग के बारे इस्तेमाल की पूरी जानकारी हो यह कोई जरूरी नहीं है और जिनको पूरी हो गयी है तो लिख कर व्यक्त नहीं करते. हालत यह है जिन ब्लॉगस्पोट और वर्डप्रेस ब्लोगों का पूरा इस्तेमाल भी [...]
एक सामान्य पहल से अधिक कुछ नहीं-आलेख
भारत में हिन्दी ब्लोग अभी शैशव काल में है और ब्लोगरों की संख्या देखें तो अपने देश के विशाल क्षेत्र को देखते हुए अभी भी नगण्य है, और जैसे जैसे इसका प्रचार होगा वैसे-वैसे ही इसमें बदलाव आयेंगे और उस समय जो स्वरूप होगा जिसकी कल्पना कोई इस समय तो नहीं कर सकता
किसी [...]
संत कबीर वाणी:माया के स्वरूप को भी कोई नहीं जानता
माया मया सब कहैं, माया लखै न कोय
जो मन में ना उतरे, माया कहिए सोय
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि माया-माया कहकर उसके पीछे तो सब पड़े हैं पर उसका सही स्वरूप कोई नहीं जानता. सभी एक दूसरे को सन्देश देते हैं कि माया के चक्कर में मत पडो पर पर सभी उसके [...]
संत कबीर वाणी:जो दंभ रखता है वह साधू नहीं
जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं
डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं
संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि जो आचरण संसार का वह साधू का हो नहीं सकता। जो अपने आचरण और करनी का दंभ रखता है उसको साधू मत कहो।
सोई आवै भाव ले, कोइ अभाव लै आव
साधू दौऊँ को पोषते, [...]
कूड़े में भी सोना हो सकता है-हास्य कविता
अभी तक दे रहे थे पहरा
तकनीकी ज्ञान का डंडा लेकर
इस घर के पहरेदार बनकर
करते रहे अपने मन की
उस समय कहते यहाँ सोना है
कभी कोई विचार नहीं आया
जो हटा दिया गया
उनको अपने काम से तो
बरस रहे हैं सब पर
कहते हैं ”मैंने सब छोड़ दिया
वहाँ तो सब कूडा है
बदबू आती है वहाँ
खडा नहीं रह सकता [...]
स्वेट मार्डेन-अपने को रोगी बताकर अपना रोग बढाओगे
1.निरंतर सोच-विचार भी मनुष्य को क्षति पहुंचाता है. अगर आप हमेशा अपने शरीर में रोग के लक्षणों पर ही उधेड़ बुन करते रहें तो आप निश्चित रूप से रोग ग्रस्त जो जायेंगे. आप वहमी कहे जाने लगेंगे.
2.बहुत से लोग रोग ग्रस्त होते हुए भी अपने को रोगी नहीं मानते. अत: वे जल्दी ही रोग मुक्त [...]