Author Archives: दीपक भारतदीप

मेरा परिचय
प्रात: योग साधना करना एव गीता का पाठ करना। इसके अलावा लेखन के द्वारा मित्र बनाना । अर्थाजन में अधिक रूचि नहीं । मेरी मान्यता है कि आदमी की देह शाश्वत नहीं है पर जीवन शाश्वत है,लिखने के साथ उसका मजा भी लेता हूँ। देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। इन्टरनेट पर पिछले साल ही लिखना शुरू किया। ग्वालियर में निवास है
इसके अलावा मेरे दूसरे ब्लोग की सूची मुख्य पृष्ठ पर अंकित है।
दीपक भारतदीप, ग्वालियर मेरे दूसरे ब्लोग की सूची मुख्य पृष्ठ पर अंकित है।
दीपक भारतदीप, ग्वालियर

शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी

कुछ पाने के लिये
दौड़ता है आदमी इधर से उधर
देने का ख्याल कभी उसके
अंदर नहीं आता
भरता है जमाने का सामान अपने घर में
पर दिल से खाली हो जाता
दूसरे के दिलों में ढूंढता प्यार
अपना तो खाली कर आता
कोई बताये कौन लायेगा
इस धरती पर हमदर्दी का दरिया
नहाने को सभी तैयार खड़े हैं
दिल से बहने वाली गंगा में
पर किसी [...]

ख्वाहिश है कि जमाना उनको सलाम करे- हिन्दी शायरी

जिंदगी जीने का उनको बिल्कुल सलीका नहीं है
उनके पास वफा बेचने का कोई एक तरीका नहीं है
भीड़ में मचायें शोर अपनी जिंदगी के तजूर्बे का
पर उससे कभी कुछ खुद सीखा नही है
ख्वाहिश है कि जमाना उनको सलाम करे
आवाजें हैं उनकी बहुत तेज,पर शब्द तीखा नहीं है
बेअसर बोलते हैं पर जमाना फिर भी मानता [...]

नहीं मिलते उनकी करतूतों के निशान-हिंदी शायरी

कई किताबें पढ़कर बेचते है ज्ञान
अपने व्यापार को नाम देते अभियान
चार दिशाओं के चौराहे पर खड़े होकर
देते हैं हांका
समाज की भीड़ भागती है भेड़ों की तरह
नाम लेते हैं शांति का
पहले कराते हैं सिद्धांतों के नाम पर झगड़ा
बह जाता है खून सड़कों पर
उनका नहीं होता बाल बांका
कोई तनाव से कट जाता
कोई गोली से उड़ जाता
पर किसी [...]

मौसम अच्छा हो तो घर पर ही मन जाती है पिकनिक -व्यंग्य

अपने जीवन में मैं अनेक बार पिकनिक गया हूं पर कहीं से भी प्रसन्न मन के साथ नहीं लौटा। वजह यह कि बरसात का मौसम चाहे कितना भी सुहाना क्यों न हो अगर दोपहर में पानी नहीं बरस रहा तो विकट गर्मी और उमस अच्छे खासे आदमी को बीमार बना देती है।
वैसे अधिकतर [...]

पाठ का इतना हिट होना मेरे लिये विस्मय का विषय-आलेख

मुझे विस्मय इस बात का है कि कबीरदास जी के मात्र दोहे और उनका अनुवाद प्रस्तुत करने वाले उस पाठ पर पाठकों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। कल उस पर चालीस व्यूज थे। मैंने पाठकों के आने का मार्ग देखा तो पाया कि गूगल के अनुवाद टूल पर अंग्रेजी में [...]

इंसान कभी चिराग नहीं हो सकते-हिन्दी शायरी

यूं तो चमकता चाँद देखकर
अपना दिल बहला लेते
पर जब आकाश में नहीं दिखता वह
छोटा चिराग जला लेते हैं
जिन्दगी में अपने
रौशनी के लिए क्यों
किसी एक के आसरे रहें
इसलिए कई इंतजाम कर लेते हैं
इंसानों का भी क्या भरोसा
उजियाले में करते हैं
हमेशा साथ निभाने का
अँधेरा ही होते मुहँ फेर लेते हैं
—————————————
मांगी थी उनसे कुछ पल के लिए [...]

कबीर साहित्य के पाठ की पाठक संख्या एक हजार के पार

मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। इसको मैं पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं और मूल पाठ को पढ़ने के लिये यहां क्लिक भी कर कर सकते हैं। जिस समय में इस पाठ को लिख रहा हूं तब उस पर [...]

अकेले होने के गम में इसलिये रोते रहे-कविता

भीड़ में हमेशा खोते रहे
अपने से न मिलने के गम में रोते रहे
नहीं ढूंढा अपने को अंदर
आदमी होकर भी रहा बंदर
लोगों के शोर को सुनकर ही बहलाया दिल
अपनी अक्ल की आंख बंद कर सोते रहे
जमाने भर का बेजान सामान
जुटाते हुए सभी पल गंवा दिये
दिल का चैन फिर नहीं मिला
जो आज आया था घर में
उसी से [...]

फिर भी तुम बरसते रहना-कविता

सूरज की गर्मी में झुलसते हुए
पानी में नहा गया था बदन
जलती हवाओं में
गर्म मोम की तरह पिघल रहा था मन
चारों तरफ फैला था क्रंदन
ऐसे में जो आये आकाश पर बादल
बिछ गयी पानी की चादर
जैसे स्वर्ग का अनुभव हुआ जमीन पर
लहराने लगा जलती धूप से त्रस्त लोगों का बदन
कहैं महाकवि दीपक बापू
तुम सभी जगह [...]

hasya kavita-प्यार कोई कारखाने में बनने वाली चीज नहीं है-कविता

मन में प्यास थी प्यार की
एक बूंद भी मिल जाती तो
अमृत पीने जैसा आनंद आता
पर लोग खुद ही तरसे हैं
तो हमें कौन पिलाता
स्वार्थों की वजह से सूख गयी है
लोगों के हृदय में बहने वाली
प्यार की नदी
जज्बातों से परे होती सोच में
मतलब की रेत बसे बीत गईं कई सदी
कहानियों और किस्सों में
प्यार की बहती है [...]

कभी खिलता हूं, कभी मुरझा जाता हूं-कविता

अपने घर पर रखे गमलों में
पौधों को लगाते हुए देखकर माली को
बहुत खुश होता हूं
उनमें कुछ मुरझा जाते हैं
कुछ खिलकर फूलों के झुंड बन जाते है
फिर वह भी मुरझा जाते हैं
अपना जीवन जीते हैं
फिर साथ छोड़ जाते हैं
फिर लगवाता हूं नये पौधे
इस तरह वह मेरे जीवन को
कभी महकाते हैं
तो कभी मुरझाकर दर्द दे जाते हैं
घर [...]

सभी की सोच मतलब के घर में बंद है-हिंदी शायरी

कोई लिखकर कहे या
अपनी जुबां से बोले
कोई ऐसे शब्द कान में अमृत घोले
मन में छा जाये प्रसन्नता की सरिता
इसी चाहत में उम्र गुजार दी
पर प्यासे रहे हमेशा
कोई नहीं बोल पाया
नहीं लिख पाया कुछ मीठे शब्द
हमने बोले कुछ प्यार के
तो लिखे भी बहुत
पर जमाना ही है लाचार और बेबस
जूझता है अपने दर्द और गमों [...]

जैसी अभिव्यक्ति वैसी ही अनुभूति-हिन्दी शायरी

राह पर चलते हुए जो
मैंने देखी जोर से चिल्लाते लोगों की भीड़
वहां एक खड़े एक आदमी से पूछा
‘यहां क्या हो रहा है’
उसने कहा-‘झगड़ा हो रहा है’
मैं कुछ दूर चला तो जोर जोर से
लोगों को स्तुतिगान गाते सुना
मैंने एक आदमी से पूछा
‘यह इतना शोर क्यों हो रहा है’
उसने गुस्से से कहा

फ्लाप ब्लाग/पत्रिका ने पार की दस हजार पाठक संख्या

मेरा यह ब्लाग आज पढ़े गये पाठों की संख्या की दृष्टि से दस हजार संख्या पार गया। कुछ लोगों के लिए यह मामूली बात है। अंग्रेजी के कई ब्लाग पर मैं आठ लाख व्यूज देख चुका हूं। हिंदी में मेरा वर्डप्रेस का यह चैथा ब्लाग है जिसने इस संख्या को पार किया। दो पहले बीस [...]

पाठक रूपी सारथि ही बनाता है लेखक महारथी-आलेख

सभी पाठक लेखक हों यह आवश्यक नहीं है पर सभी लेखकों को पाठक अवश्य होना चाहिए। एक लेखक को कभी किसी अन्य की रचना एक लेखक के रूप में नही बल्कि एक पाठके के रूप में पढ़ना चाहिए। एक लेखक में बैठा उसका पाठक ही उसकी रचना रूपी रथ का सारथि हो सकता [...]

मौसम पर कविता नहीं लिखेंगे-हास्य कविता

आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापू, गर्मी में हो रही बरसात
जहां रुलाता पसीना, वहां करती बहार अपनी बात
लिखो कोई जोरदार कविता
बहने लगे श्रृंगार रस की सरिता
शायद तुम्हारे नाम से फ्लाप का लेबल हट जाये
हिट होकर तुम्हारा नाम आकाश पर चमक जाये
कोई कुछ भी कहे तुम करो
अपनी पत्रिका पर मौसम पर कविता की बरसात’
जाने को तैयार [...]

अपनी असली पहचान खोते जाते-कविता

प्रसिद्ध होने के लिए
चले जाते है उस राह पर
जहां बुरे नाम वाले हो जाते हैं
अगर नाम चमका आकाश में तो
जमीन पर गिरकर चकनाचूर
होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं
पत्थरों पर नाम लिखवाने से
लोगों के हृदय में जगह नहीं मिल जाती
हंसी की करतूतों पर लोगों के ताली बजाने से
कुछ पल अच्छा लगता है
पर कोई इज्जत नहीं [...]

दिल बहलाने के लिए देख लो सुंदर तस्वीरें कहीं-कविता

हंसते चेहरे देखकर हंसता हूं
दिल बहलाने के लिये दूसरों की
हंसी भी सहारा बन जाती है
किसी के दर्द पर हंसने वाले बहुत हैं
दूसरों को हंसा दें ऐसी सूरतें
कभी कभी नजर आती हैं
नहीं मिलता तो देख लेता हूं
हंसते हुए लोगों तस्वीरें
दर्द से परे जो ले जातीं हैं
………………………………………………
आंखों से देखने का उम्र से
कभी कोई वास्ता नहीं
अगर बहलता हो [...]

सदियों से धोखा देता आया चांद-कविता

 
आज महक जी  के ब्लाग पर एक फोटो और अच्छी गजल देखी। ऐसे में मेरा कवित्व मन जाग उठा। कुछ पंक्तियां मेरे हृदय में इस तरह आईं-

समंदर किनारे खड़े होकर
चंद्रमा को देखते हुए मत बहक जाना
अपने हृदय का समंदर भी कम गहरा नहीं
उसमें ही डूब कर आनंद उठाओ
वहां  से फिर भी निकल सकते हो
अपनी सोच [...]

विचारों की धारा-कविता

विचारों की धारा मस्तिष्क में
बहती चली जाती है
जब तक बहती है
अच्छा लगता है
जब एक विचार अटक जाता है
रुकी धारा से दुर्गंध आती है
प्रसन्न्ता का समय
बहता जाता हे
पर दुःख के पल में
घड़ी बंद नजर आती है
एकांत से हटकर भीड़ में जाकर
भला कहां मिलती है शांति
अकेले में भी अपनों के दर्द की
याद आकर सताती है
मन में जगह [...]

कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख

सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में  हैं और आपको लगता है कि उसमें कड़वाहट का अश है तो वह उसके समक्ष कभी व्यक्त मत करिये। ऐसा कर आप न  केवल उसे बल्कि उसके चाहने वालों को भी अपना विरोधी बना लेते हैं। हां, मैं [...]

तंबाकू, एकता और योगसाधना-आलेख

 
पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर  के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर पड़ने वाले मंदिरों को देखने का फैसला किया। हम जब बिड़ला मंदिर पहुंचे तो उस समय उमस बहुत थी। हम दोनों अंदर गये और कुछ देर ध्यान लगाने के बाद बाहर निकले। मैंने वहां पानी पिया [...]

ईमानदारी का न्यूनतम स्तर-व्यंग्य चिंतन

कल सुबह बिजली न होने के कारण मैं घर से अपने किसी भी ब्लाग पर कोई भी पाठ प्रकाशित किये बिना ही चला गया। वैसे भी परसों रात मेरे सारे पाठ हिंदी के सभी ब्लाग एक जगह दिखाने वाले फोरमों पर फ्लाप हो गये थे तो मैं और आधा घंटा बिजली का इंतजार कर कोई [...]

जैसी दी शिक्षा वैसा ही शिष्य पाया-हास्य कविता

गुरू चेले थे बरसों से साथ
पर उस दिन गुरू को गुस्सा आया
लग चेले पर बरसने
‘मैने कई बरस तक दी तुझे सीख
पर तू मेरे किसी काम न आया
देश की प्राचीन गुरू-परंपरा पर
तू ने बहुत बड़ा कलंक लगाया’
अभी तक कभी जवाब न देने वाले
शिष्य को भी उस दिन ताव आया
और पलटकर बोला
‘साथ-साथ रहे पर बड़े होने से
तुमकों [...]

स्टार्ट अप को समोसा मान लेते हैं-व्यंग्य चिंतन

 
गूगल के अंग्रेजी हिंदी टूल आने का भारत के अनेक क्षेत्रों के प्रतीक्षा थी। भारत मेें भी हिंदी ब्लाग जगत पर इसकी चर्चा कुछ समय से हो रही  थी।मेरे एक ब्लाग पर एक  अंग्रेजी ब्लाग लेखक ने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि एसा टूल आ रहा है इससे भाषा की दीवार समाप्त हो जायेगी।  [...]

लिखने और प्रयोग करने में क्या हर्ज है- व्यंग्य

बहुत दिन से लोगों ने ऐसी हिंदी लिखी नहीं होगी जैसी उसे अंग्रेजी में अनुवाद टूल देखने का इच्छुक है। मैने गूगल के हिंदी टूल से समझौता करने का निर्णय किया तो मुझे जितना आसान लग रहा था उतना है नहीं।
पिछले कई वर्षों से मन में हिंदी का विख्यात लेखक बनने की इच्छा रही जो [...]

इंसान तो कठपुतली है-हास्य कविता

आदमी के पंख नहीं होते
जो वह आसमान में उड़ सके
पर उसका मन बिना पंख के ही
उड़ता चला जाता है
उसके पांव आदमी की काबू में होते नहीं
पंरिदे बनाते हैं लोगों के घर में भी घरोंदे
पर उनके बिस्तर पर सोते नहीं
खुशी में झूमकर नाचता इंसान
दुःख  में अपने ही आंखो से बहती
अश्रुधारा में करता स्नान
पर परिंदे कभी रोते [...]

महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य

सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के  दिमाग  में ‘बुद्धिजीवी महिला सम्मेलन’ करवाने का विचार आया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कुछ लोगों ने समझाया। एक समझदार ने कहा-‘‘इस देश की शिक्षा पद्धति ने लोगों को गहरे ज्ञान से वंचित किया है और सभी प्रकार के बुद्धिजीवी चाहे [...]

अंग्रेजी नाम, हिंदी नाम-आलेख

अंतर्र्जाल पर हिंदी लिखते हुए मुझे एक बात अनुभव हो रही है कि यहां रूढ़ता का भाव अपने हृदय में रखने को कोई मायने नहीं है। अंतर्जाल पर अनेक वेब साइटों और ब्लाग पर निकल रही हिंदी  पत्र-पत्रिकाओं के नाम हिंदी में है तो अंग्रेजी में नहीं और अंग्रेजी में है तो हिंदी में नहीं। [...]

मोबाइल मोहब्बत हो गई-हास्य कविता

प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की
घंटी बड़ी उम्मीद से बजाई
जा रही थी वह गाड़ी पर
चलते चलते ही उसने
अपने मार्ग में होने की बात उसे बताई
फिर भी वह बातें करता रहा
वह भी सुनती रही
सफर गाड़ी पर उसका चलता रहा
अचानक वह कार  से टकराई
प्रेमी को भी फोन पर आवाज आई
प्रेमी ने पूछा
‘क्या हुआ प्रिये
यह कैसी आवाज आई
कोई [...]

गरीबों का खाना सहता कौन है? हास्य व्यंग्य

अमेरिका के राष्ट्रपति जार्जबुश ने कहा है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिये भारत के लोग ही जिम्मेदार हैं क्योंकि वह ज्यादा खाते हैं। उनके इस बयान पर यहां बवाल बचेगा यह तय बात है और यह भी  कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय भी अब वहां संदेह की दृष्टि से देखें जायेंगे। अगर [...]

संत कबीर वाणीःभक्ति के लिये हृदय में शुद्ध भावना जरूरी

पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार
भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार
 
संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि पत्थर और पानी को पूज कर सारे संसार के लोग नष्ट हो गये पर अपने तत्व ज्ञान को नहीं जान पाये। वह ज्ञान तो एकदम अलग है। अगर कोई ज्ञानी गुरु मिल जाये तो उसे प्राप्त कर [...]

चाणक्य नीतिःधन कमाने वाले धर्म की स्थापना नहीं कर सकते

अर्थाधीतांश्च  यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः
मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः
जिस प्रकार विषहीन सर्प किसी को हानि नहीं पहुंचा सकता, उसी प्रकार जिस विद्वान ने धन कमाने के लिए वेदों का अध्ययन किया है वह कोई उपयोगी कार्य नहीं कर सकता क्योंकि वेदों का माया से कोई संबंध नहीं है। जो विद्वान प्रकृति के लोग असंस्कार [...]

क्रिकेट में अब देशप्रेम का सुख नहीं उठाते-हास्य कविता

आया फंदेबाज और बोला
‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना
पता नहीं तुम्हें अब यहां
क्रिकेट मैच चल रहे हैं
तुम्हारे नेत्र उनका आनंद उठाने की बजाय
कंप्यूटर में जल रहे हैं
क्यों नहीं कुछ मजा उठाते’
सुन कर पहले उदास हुए
फिर टोपी लहराते हुए कहें दीपक बापू
‘जजबातों में बहकर देख लिया
जिनकी जीत पर हंसे
और हारने पर रोए
उनके खिलवाड़ को सहकर [...]

आठ साल की बच्ची का हाथ कैसे कुचला जा सकता है-आलेख

आज श्री सुरेश चिपलूनकर जी ने कुछ फोटो की श्रृंखला भेजी जिसने मेरा मन विचलित कर दिया। वह अकेले ऐसे ब्लागर हैं जिनसे मैं व्यक्तिगत रूप से मिल चुका हूं। मुलाकात के बाद वह अपने ब्लाग और ऐसे फोटो ईमेल से भेज देते हैं। उनका लेखन कितना प्रभावी है यह बताने की आवश्यकता नहीं है [...]

तब तक बहुत देर हो जायेगी-हास्य कविता

हर शाख पर उल्लू बिठा दो
जब बिजली चली जायेगी
वह तरक्की-तरक्की के नारे लगायेगा
लोग समझेंगे सब ठीक-ठाक है
अंधेरे में भला किसे तरक्की नजर आयेगी
………………………………………………………………………..
तरक्की हो रही चारों तरफ
भ्रमित लोग चले जा रहे यह सोचकर कि 
कहीं हमें भी मिल जायेगी
जमीन में धंसता जा रहा  है पानी
आदमी में कहां रहेगा
घर में बढ़ते कबाड़ में खोया
जब गला तरसेगा  पानी [...]

बंधे सबके अपनी मजबूरी से हाथ-हिन्दी शायरी

यूं दर्द बांटने चले थे जमाने के साथ
शायद बढे मदद के लिए अपनी तरफ हाथ
हम खड़े देखते रहे
लोग हंसते रहे
जो हमने पूछी वजह तो
बताया‘यहां सब सुनाने आते हैं दर्द
कोई नहीं बनता  किसी का हमदर्द
मूंहजुबानी बहुत वादे करने की
होड़ सभी लोग करते
पर देता कोई नहीं साथ
बंधे सबके  अपनी मजबूरी से हाथ

हमने भी कुछ खोया नहीं-हिन्दी शायरी

अपनी राह चलते जाना है
कहीं फूल बरसेंगे
तो कहीं लोग ताने कसेंगे
थोड़ी खुशी के लिये
बहुत दूर तक ढूंढते बहाने
निराश होने पर
भागने लगते हैं गम भुलाने
ऐसे लोगों के इशारे पर
अगर चले जिंदगी की राह पर
तो ताउम्र अपनी मंजिल को तरसेंगे
……………………………………………….
उनके इशारे पर लड़ते रहे जमाने से
वह तो रहे पर्दे में, मतलब रख कमाने से
जो वक्त आया तो [...]

मानसिक गुलामी किसी को दिखाई नहीं देती-आलेख

मनोरंजन के नाम पर जिस तरह के कार्यक्रम विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में अंधविश्वासों और रूढियों को प्रतिपादित किया जा रहा है उससे तो ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के मन में आज भी यह बात है कि इस देश के लोग ज्ञान की दृष्टि से अंधेरे में [...]

जो बडे हैं वह कभी संयम नहीं गंवाते-हास्य कविता

आया फंदेबाज और बोला
”क्या दीपक बापू हम तो
समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को
पर हम अब समझे हमें भरमाते हो
सभ्य शब्दों की बात करते हो
गालियाँ लिखने में शर्माते हो
देखो अंतर्जाल पर बडे-बडे लेखकों के नाम का
लेखक गालिया चाप (छाप) जाते
और लोग तारीफ भी कर आते”
सुन पहले चौंके
फिर कुर्सी से उठकर
टोपी को घुमाते कहानी [...]

एक ढूंढो हजार मूर्ख मिलते हैं-आलेख

कल बिहार में एक स्थान पर एक महिला को जादूटोना करने के आरोप जिस बहशी ढंग से अपमानित किया गया हैं वह देश के लिये शर्म की बात है। यह कोई पहली घटना नहीं है जो ऐसा हुआ है और न शायद यह आखिरी अवसर है। पहले भी ऐसी [...]

देशी कुत्तों की तस्करी की खबर सुनकर आयी मुझे अपने कुत्ते की याद-आलेख

देशी कुतों की तस्करी भी हो सकती है कि यह कभी हमें सोचा भी नहीं था। आज टीवी में यह खबर सुनकर हम हैरान हो गए, पर खबर तो खबर है। बाकायदा नागालेंड भेजने के लिए उनको तैयार किया गया था। वहां उसके मांस से खाद्य सामग्री बनायी जाती है जिसे बडे शौक से खाया [...]

होली के दिन सबका चरित्र बदल जाता है-हास्य कविता

घर से नेकर और कैप पहनकर
निकले घर से बाहर निकले लेने किराने का सामान
तो सामने से आता दिखा फंदेबाज
और बिना देख आगे बढ़ गया किया नही मान
तब चिल्ला कर आवाज दी उसे
”क्यों आँखें बंद कर जा रहे हो
अभी तो दोपहर है
बिना हमें देखे चले जा रहे हो
क्या अभी से ही लगा [...]

संत कबीर वाणी:मुहँ में डाले तेल से आंखों देखा घी भला

आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल
साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल
आंखों से देखा घी का दर्शन भी अच्छा है और तेल तो मुख में डाला हुआ भी अच्छा नहीं है। साधू-संतो से झगडा भी अच्छा है परन्तु निगुरा (जिसका कोई गुरू नहीं है) से मेल-मिलाप कदापि अच्छा नहीं है, क्योंकि साधू [...]

संत कबीर वाणी:जैसा भोजन और पानी वैसा मन और वाणी

आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक
कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक
संत कबीर जी का कहना है की गाली आते हुए एक होती है, परन्तु उसके प्रत्युत्तर में जब दूसरा भी गाली देता है, तो वह एक की अनेक रूप होती जातीं हैं। अगर कोई गाली देता है तो उसे सह जाओ [...]

रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है

रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि
दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि
कविवर रहीम का कथन है कि नीच व्यक्ति के संपर्क में रहने से सबको कलंक ही लगता है। मद्य बेचने वाले व्यक्ति के हाथ में दूध होने पर भी लोग उसे मदिरा ही समझते हैं।
रहिमन निज संपत्ति बिना, कोउ [...]

नंबर वन और टू का खेल-हास्य व्यंग्य

मुझे कल ही लग रहा था कि कोई चालाकी है और इन्तजार कर रहा था कि आज उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है। कल चाकलेटी चेहरे वाले हीरो ने कहा-” मैं नंबर वन हूँ वह जो क्रिकेट के व्यापार में लगा है वह दो नम्बर है।”
लोग भले ही कड़ी प्रतिक्रिया उम्मीद लगा रहे थे [...]

अपने मुहँ से अपनी तारीफ़-हास्य व्यंग्य

अब दो फिल्म अभिनेताओं में झगडा शुरू हो गया है कि वह नंबर वन हैं। आज जब मैंने यह खबर एक टीवी चैनल पर सुनी तो मुझे हैरानी नहीं हुई क्योंकि हमारे बुजुर्ग कहते रहे हैं कि चूहे को मिली हल्दी की गाँठ तो गाने लगा कि ”मैं भी पंसारी, मैं भी [...]

हॉकी में ओलंपिक से बाहर होने के मायने-आलेख

ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम नहीं होगी। टीम ओलंपिक जाती थी तो कौनसे तीर मारती थी कहने वाले तो कह सकते हैं। ओलंपिक दुनिया का सबसे बड़ा महाकुंभ है और उसमें भारत की पहचान केवल हॉकी से ही है और किसी खेल में भारत का नाम इतना नहीं है। जब ओलंपिक में सारे [...]

दुआएं ही कर सकते हैं कि हाकी का अस्तित्व बचे-आलेख

अगले ओलंपिक में भारत की हाकी टीम नहीं खेलेगी। देश के नये खेल प्रेमियों को शायद ही इससे मतलब हो पर फिर भी पुराने खेल प्रेमियों को लिए यह खबर सदमें से कम नहीं है। इस देश के अधिकतर खेल प्रेमियों को क्रिकेट पसंद हैं पर सभी को नहीं वरना हाकी खेलने के लिए [...]

आंकडों का खेल भी इन्द्रजाल जैसा -आलेख

आज एक ब्लोग पर हमने वह वेब साईट देखी जिसमें सभी ब्लोग की कीमत का मूल्यांकन किया जा सकता है. उत्सुकतावश हमें उसे खोल कर देखा और अपने सभी ब्लोग की रेट लिस्ट ले आये. देखकर हैरान रह गए कि हमारे सभी ब्लोग फ्लॉप श्रेणी में हैं पर कुल जमा हम फ्लॉप नहीं [...]

सुनने से पहले ही लोग भूल जाते बात-कविता

पहले तोड़कर फिर जोड़ने की बात
पहले रुलाकर फिर हँसाने की बात
अपनी नाकामियों को छिपाने के
लिए रोज नया मोर्चा खोलने की बात
बौना चरित्र, खोखला ख्याल और
खोटी नीयत से समाज में बदलाव की बात
बरसों से चल रही है यहाँ
कहने वालों को लोग सिर उठा लेते हैं
सौंप देते अपने दिल के ताज
फिर भी चल रही है [...]

तुम्हारी रक्षा करेगा ज्ञान-साहित्यक कविता

गुरु ने शिष्य को विदा
करने से पहले पूछा
”तुम अब जाओगे
जीवन के पथ पर
चल्रते जाओगे प्रगति पथ पर
सेवा करोगे या चाहोगे सम्मान
शिष्य ने कहा
”गुरु आपने कहा था
ज्ञान कभी पूरा किसी का हो नहीं सकता
मैं तो अभी भी चाहूंगा ज्ञान”
गुरु ने खुश होकर कहा
”तब तो तुम सेवा से स्वत: बडे हो जाओगे
हर सम्मान से [...]

अप्रवासी और प्रवासी हिन्दी लेखक-आलेख

अप्रवासी ब्लोगरों को लेकर मेरे मन में बहुत जिज्ञासा रहती है क्योंकि उनके लिखे पर उस देश के परिवेश और संस्कृति की जानकारी मिल जाती है जो अन्य कहीं नहीं मिल पाती. हांलांकि समाचार पत्र-पत्रिकाओं में इस बारे में अक्सर छपता है पर वह अधिकतर सारे देश को इकाई मानकर लिखा जाता है और [...]

संत कबीर वाणी:ज्ञान रुपी हाथी की सवारी कीजिए, भौंकने पर ध्यान न दीजिये

हस्ती चढ़िए ज्ञान की, सहज दुलीचा डार
श्वान रूप संसार है, भूंकन दे झकमार
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं की ज्ञान रूपी हाथी पर सहज भाव से दुलीचा डालकर उस पर सवारी कीजिए और संसार के दुष्ट पुरुषों को कुत्ते की तरह भोंकने दीजिये, उनकी पवाह मत करिये.
कहते को कहि जान दे, गुरु की सीख [...]

चाणक्य नीति:समय का ख्याल करना पशु-पक्षियों से सीखें

1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई करने में खुश होते हैं। अपने वचनों द्वारा से कभी-कभी अपने ही वाचों द्वारा बिछाए जाल में स्वयं ही घिर जाते हैं और उसी तरह नष्ट हो जाते हैं जिस तरह रेत की टीले के भीतर [...]

चाणक्य नीति:देवता तो बस भावना में बसते हैं

1.जिस प्रकार फूल में गंध, तिल में तेल, लकडी में आग, दूध में घी और ईख में गुड होता है वैसे ही शरीर में आत्मा होती है यह विचार करना चाहिऐ।
2.देवता न कंठ में, न मिटटी की मूर्ति में होते हैं। वह तो केवल भावना में बसते हैं। इसलिए ही भावना ही सब कुछ [...]

रहीम के दोहे:हृदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता

गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि
कूपहु ते कहुं होत है, मन काहु को बाढि
कविवर रहीम कहते हैं की जिस प्रकार रस्सी के द्वारा कुएँ से पानी निकल लेते हैं, उसी प्रकार अच्छे गुणों द्वारा दूसरों के ह्रदय में अपने लिए प्रेम उत्पन्न कर सकते हैं, क्योंकि किसी [...]

विदुर नीति:अकेले वृक्ष के बलवान होने पर भी आंधी उसे गिरा देती है

*जलती लकडियाँ अलग-अलग होने पर धुआं और एक साथ होने पर अग्नि को प्रज्जवलित करतीं हैं इसी प्रकार फ़ुट होने पर लोग कष्ट उठाते हैं और एक होने पर सुखी होते हैं।
*यदि वृक्ष अकेला है तो बलवान, दृढ़ और बृहद होने पर भी एक ही क्षण में आंधी के द्वारा बलपूर्वक शाखाओं सहित धराशायी किया [...]

रहीम के दोहे:सज्जन सौ बार रूठे तो भी मनाएं

जैसी जाकी बुद्धि है, तैसे कहैं बनाय
ताकौं बुरो न मानी, लें कहाँ सो जाय
कविवर रहीम जी कहते हैं कि जिस मनुष्य की जैसी बुद्धि है वह उसके अनुरूप ही तो काम करता है। उस मनुष्य का बुरा मत मानिए क्योंकि वह और बुद्धि कहाँ लेने जायेगा।
टूटे सुजन मनाइये, जौ टूटे सौ बार
रहिमन [...]

सच का भला कौन साथी होता-कविता

अगर अकेले चल सकते हो
जिन्दगी की राह पर
तो सत्य बोलो जो
हमेशा कड़वा होता
अगर अपने इर्द-गिर्द जुटाना चाहते हो
लोगों की भीड़ तो
झूठ बड़ी सफाई से बोलो
जो हमेशा मीठा होता
यहाँ सब सच से घबडाए
भ्रम की छाया तले
जिंदा रहने के आदी हैं लोग
सर्वशक्तिमान के नाम पर
बताये संदेशों की दवा बनाकर
किया जाता है उसका दूर रोग
पर [...]

जहाँ ले जाता मन-कविता साहित्य

दिल में हो कड़वाहट तो मीठा कैसे लिखें
उदासी हो दिल में, चेहरे से हँसते कैसे दिखें
कितना कठिन अपने को छिपाना मन की आँखों से
जैसे अपने को लगें वैसे ही दूसरों को भी दिखें
जमाने के साथ कब तक चल सकती है चालाकी
कब तक अपने दिल का हाल छिपा कर लिखें
कहीं कोई आस नहीं, फिर [...]

महिला जाग्रति के लिए-हास्य कविता

प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में वह विद्वान
बोल रहे थे
”घर से कितना भी सजकर
सड़क पर खुले में जाएं
तो गाड़ियों के धुएं में
सबके चेहरे काले हो जाएं
अगर जाएं बंद गाडी में
करें अपना सफर पूरा तो
लोगों को अपनी सुन्दरता पर
ध्यान कैसे दिलाएं
दुनिया में फैले प्रदूषण से
महिलाओं को खास परेशानी है
हम चाहते हैं कि इस समस्या को सब
मिलकर [...]

रहीम के दोहे:जहाँ ईर्ष्या की गाँठ है वहाँ आनंद रस नहीं

जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं, यह रहीम जग होय
मंड़ए तर की गाँठ में, गाँठ गाँठ रस होय
कविवर रहीम कहते हैं कि यह संसार खोजकर देख लिया है, जहाँ परस्पर ईर्ष्या आदि की गाँठ है, वहाँ आनंद नहीं है. महुए के पेड़ की प्रत्येक गाँठ में रस ही रस होता है वे परस्पर जुडी [...]

सुबह और शाम का दृश्य-लघुकथा

वह एक गृह स्वामी की तरह अपने पोर्च के नीचे खडा था . कालोनी का चौकीदार पैसे मांगने आया और बोला-”बाबूजी नमस्कार.
उसने अपने पहले दोनों हाथ जोड़े और अपना एक हाथ मांगने के लिए बढाया.
उसके जेब में दस, बीस, पचास और सौ के नोट थे, पर उसे तीस रूपये देने का मन नहीं हुआ [...]

संत कबीर वाणी:जब फसल घर आये तभी उसे अपनी समझो

पकी कहती देखि के, गरब किया किसान
अजहूँ झोला बहुत हैं, घर आवै तब जान
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं की फसल को तैयार देखकर किसान खुशी से फूला नहीं समाता. उसे अत्यंत अभिमानी हो जाता. परतु यह उसका भ्रम है क्योंकि उसके बाद भी बहुत परेशानियाँ होतीं हैं और जब वह कटकर घर [...]

कमेन्ट ही रजाई का काम कर जायेगी-हास्य कविता

आकर फंदेबाज बोला
”दीपक बापू
इस ठंड में क्या
कीबोर्ड पर उंगली नचा रहे हो
लो लाया हूँ बोतल
तुम तो अब हो गए हो काईयाँ
शराब का नशा छोड़
ब्लोग पर पोस्ट पर लगे कमेन्ट के
पैग पीकर
जेब के पैसे बचा रहे हो’
सुनकर उखड़े दीपक बापू पहले
फिर सिर पर रखी टोपी घुमाते बोले
‘कह गए बुजुर्ग
अधिक नशा करना ठीक नहीं
साथ ही [...]

जल्दी टीवी बनवा लेना-हास्य कविता

घर में घुसते ही बाप ने बेटे से कहा
”बेटा तुम्हारी मां के कमरे में रखा टीवी
खराब हो गया है
अगर तुम बचना चाहते हो
गृहयुद्ध से तो आज
अपने कमरे में रखे टीवी के
प्लग में गडबडी कर देना
ताकि सास के मन को भी हो जाये तसल्ली
आज खामोश रहे
कल छुट्टी के दिन मां का टीवी
किसी भी तरह बनवा लेना
वैसे [...]

प्रभावपूर्ण दस्तक देते हैं सागरचंद नाहर-समीक्षा

अंतर्जाल पर बहुत लोग लिख रहे हैं और हर किसी को ब्लोग के बारे इस्तेमाल की पूरी जानकारी हो यह कोई जरूरी नहीं है और जिनको पूरी हो गयी है तो लिख कर व्यक्त नहीं करते. हालत यह है जिन ब्लॉगस्पोट और वर्डप्रेस ब्लोगों का पूरा इस्तेमाल भी [...]

एक सामान्य पहल से अधिक कुछ नहीं-आलेख

भारत में हिन्दी ब्लोग अभी शैशव काल में है और ब्लोगरों की संख्या देखें तो अपने देश के विशाल क्षेत्र को देखते हुए अभी भी नगण्य है, और जैसे जैसे इसका प्रचार होगा वैसे-वैसे ही इसमें बदलाव आयेंगे और उस समय जो स्वरूप होगा जिसकी कल्पना कोई इस समय तो नहीं कर सकता
किसी [...]

संत कबीर वाणी:माया के स्वरूप को भी कोई नहीं जानता

माया मया सब कहैं, माया लखै न कोय
जो मन में ना उतरे, माया कहिए सोय
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि माया-माया कहकर उसके पीछे तो सब पड़े हैं पर उसका सही स्वरूप कोई नहीं जानता. सभी एक दूसरे को सन्देश देते हैं कि माया के चक्कर में मत पडो पर पर सभी उसके [...]

संत कबीर वाणी:जो दंभ रखता है वह साधू नहीं

जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं
डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं
संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि जो आचरण संसार का वह साधू का हो नहीं सकता। जो अपने आचरण और करनी का दंभ रखता है उसको साधू मत कहो।
सोई आवै भाव ले, कोइ अभाव लै आव
साधू दौऊँ को पोषते, [...]

कूड़े में भी सोना हो सकता है-हास्य कविता

अभी तक दे रहे थे पहरा
तकनीकी ज्ञान का डंडा लेकर
इस घर के पहरेदार बनकर
करते रहे अपने मन की
उस समय कहते यहाँ सोना है
कभी कोई विचार नहीं आया
जो हटा दिया गया
उनको अपने काम से तो
बरस रहे हैं सब पर
कहते हैं ”मैंने सब छोड़ दिया
वहाँ तो सब कूडा है
बदबू आती है वहाँ
खडा नहीं रह सकता [...]

स्वेट मार्डेन-अपने को रोगी बताकर अपना रोग बढाओगे

1.निरंतर सोच-विचार भी मनुष्य को क्षति पहुंचाता है. अगर आप हमेशा अपने शरीर में रोग के लक्षणों पर ही उधेड़ बुन करते रहें तो आप निश्चित रूप से रोग ग्रस्त जो जायेंगे. आप वहमी कहे जाने लगेंगे.
2.बहुत से लोग रोग ग्रस्त होते हुए भी अपने को रोगी नहीं मानते. अत: वे जल्दी ही रोग मुक्त [...]

रहीम के दोहे:जागते हुए अनीति करे उसे शिक्षा देना अनुचित

जलहिं मिले रहीम ज्यों किल्यो आप सम छीर
अंगवहि आपुहि त्यों, सकल आंच की भीर
कविवर रहीम का कहाँ है की जिस प्रकार जल दूध में मिलकर दूध बना जाता है, उसी प्रकार जीव का शरीर अग्नि में मिलकर अग्नि हो जाता है.
जानि अनीति जे करै, जागत ही रह सोइ
ताहि सिखाइ जगाईयो, रहिमन उचित न होइ
समझ-बूझकर [...]

कबीर के दोहे:मन की कल्पना माया के विस्तार तक

गुरु कुम्हार शीश कुंभ है, गढ़िं-गढ़िं काढेँ खोट
अंतर हाथ सहार दे, बाहर बाहि चोट
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि गुरु कुम्हार के समान है और शिष्य मिट्टी के समान है। जैसे कुम्हार घडे या बर्तन को सुन्दर व सही आकार प्रदान कर अपने जीवन के प्रगति पथ पर चलने के लिए प्रस्तुत करता [...]

चजई-अक्ल का करो व्यायाम, लगाओ चालाकियों पर विराम-हास्य कविता

चतुरों के होते चार कान
सुने किसी की नहीं
हमेशा अपनी छेड़ें तान
ज्ञान, विज्ञान, पत्रकारिता, उद्योग और व्यापार में
जहाँ भी गए
मात खा जाते हैं हम
इधर से बचाएँ उधर से पकड़ लेते कान
हम ठहरे अल्हड़ और मस्त
सब जगह फ्लॉप हो जाते थे
वह दूसरों को टोपी पहनाकर
खुद भी हिट हो जाते थे
हम झेलते अपमान
कहते हैं कि काठ की [...]

सस्ती कार आने पर ही होगी शादी और सगाई-हास्य कविता

एक पडोसन दूसरी पडोसन के पास पहुँची
और बोली
‘बहिन तुम्हारे छोरे के लिए
एक रिश्ता मैं हूँ लाई
जल्दी करो सगाई
तुमने कहा था मोटर साइकिल चाहिए
दहेज़ में
वह तुम्हें मिल जायेगी
अगले महीने तक ही मुहूर्त हैं
कर लोग जल्दी-जल्दी
फिर न शादी होगी न सगाई’
दूसरी बोली
‘मुझे अब जल्दी नहीं है
अब आ रही है कुछ महीने में
सस्ती कार
उसके [...]

क्रिकेट में फिल्म जैसा एक्शन

फिल्म चल रही कि क्रिकेट
हो रहा है मतिभ्रम
बैट-बाल का खेल होते-होते
एक्शन सीन आ जाता है कि
फिल्म वालों को भी आये शर्म
जिसे फिल्म से परहेज जो
वह भी अपने खिलाड़ी को पिटते देख
हो जाता गर्म
कहैं दीपक बापू
विश्वास तो पहले भी नहीं था
अब भी नहीं होता
फिल्म वालों की संगत जब से
क्रिकेट वालों से हुई है
पटकथा लेखकों के [...]

पुराने रिकार्ड के सहारे अब नहीं चलेगा नाम-हास्य कविता

कितने दिनों के बाद
प्राचीनतम बल्लेबाज सह्बाग ने
बना शतक और अब
कगारुओं पर पर बरस रहे
तब तक मुहँ पर ताला जब
बल्ला खामोश
लोग अभी बडे मैच में उनके रनों को तरस रहे
कहै दीपक बापू
नाम ने उनका कंगारू
उनके लिए एक बकनर क्या
कई अंपायर उस जैसा बनने के लिए तरस रहे
पर अभी भी तुम्हारा इम्तहान बाकी है
छोटे मैच का [...]

चजइ-अंतर्जाल पर भी होंगे भेड़ की खाल में भेडिया

हिन्दी का परचम फहराने का
उनका तो बहाना है
बस उनको अपनी दुकान ज़माना है
बोलने में शब्द तो बह जाते
पर लिखते हुए हाथ काँप जाते
पर अपने लेखक होने का अहसास कराना
कहीं अखबारों से कटिंग ढूंढ कर लाते
कही उठा लाते किसी का छपा अफ़साना
जब कहीं हिन्दी के नाम पर
बनते पुरस्कार तो मुहँ में लार आ जाती
जब मिलते [...]

आसमान से अब फ़रिश्ते नहीं आते

आसमान से अब फ़रिश्ते नहीं आते
विचार खुले होना अच्छा है
पर आंख्ने भी खुली रखना
यकीन करना अच्छा है
पर कदम-कदम पर है
धोखे भीं हजार हैं
अपना हर कदम
सतर्कता से रखना
सुन्दर शब्दों का जाल
फैलाया जाता है चहूं ओर
अर्थहीन लाभ दिखाए जाते है
जिनका नहीं होता कहीं ठौर
शिकारी अब ऐसा जाल बिछाते हैं
पंक्षी बिना दाना डाले फंस जाते [...]

जो बीस में नहीं चला उसे सौ में चलाना आसान नहीं है

इधर-उधर की बात करते जाओ
लोगों का ध्यान बांटते जाओ
जो नोट बीस में नहीं चलता
उसे एक सौ मैं चलाना आसान नहीं है
एक दो आदमी को भ्रम में
डालकर खोटा सिक्का चलाना सहज है
पर जमाने भर को नचा दे
जाने और माने तभी
जब ऐसी कहानी लिखकर बताओ
एक फिल्म के हिट होने पर
उसका हीरो भी हिट हो जाता है
दूसरा [...]

जब बन्दर क्रिकेट खेलने लगे

मैदान पर खेलते हुए
बोलर ने बैट्समैन से कहा ‘बन्दर’
बैट्समैन ने कहा-”तू होगा बन्दर”
दोनों में झगडा हो गया
साथियों ने सुलझाने की कोशिश
पर नहीं रहा उनके बस के अन्दर
अचानक एक खिलाड़ी चिल्लाया
”भागो, देखो आ रहे हैं झुंड बनाकर
जब हम खेल रहे थे
तब कुछ देख रहे थे बन्दर
और अब झुंड बनाकर लड़ने आ रहे हैं
अब हमें नहीं छोडेंगे [...]

धर्म के रास्ते

दुनिया से ऊबकर लोग
धर्म के रास्ते जाते
ढूंढते ठिकाने वही
जहाँ तख्तियाँ लगी होती
सर्वशक्तिमान के नाम की
पीछे अधर्म के होते अहाते
अपने अन्दर बैठे शख्स को देख पाते
तो शायद जान पाते
जिन्दगी केवल पाते रहने का नाम नहीं
जिस पर अपने जीवन के सभी पल लुटाते
————————————-
शांति लाने का दावा
——————–
बारूद के ढेर चारों और लगाकर
हर समस्या के इलाज के [...]

समाज से कमाने वालों, बांटकर खाना सीखो

अमीरों के घर और होटलों पर
मनाते जश्न भला
गरीब कहाँ देख पाते हैं
पर भरते हैं जो आहें
अपनी गरीबी देखकर
उसे अमीर भी कहाँ सुन पाते हैं
दौलत से खुशियाँ खरीदी
जा सकती हैं पर दुआएं नहीं
पर आहें भी व्यर्थ नहीं जातीं
कहीं मन में ही रहतीं तो
कहीं अपराध के रूप में सामने आते हैं
============================
जब दौलतमंद हो जाते हैं तंगदिल
तब [...]

चिंता का रोग

टूटते-बिखरते समाज को
बचाने के लिए जूझते लोग
रिवाजों और रीतियों को निभाकर
अपने लिए सम्मान ढूंढते लोग
चिंताओं में पाल रहे हैं रोग
——————————-
चिंता देती है कई रोगों को जन्म
पर उनसे क्या कहेंगे
जिनको चिंता के साथ जीने की
आदत हो गयी
ज्ञान सब बघारते हैं सभी
‘करने वाला तो करतार है’
पर फिर आ जाता है ख्याल
तो कहते हैं कि
”चिंता तो करनी पड़ती [...]

नववर्ष नही कर सकता मैं तेरा अभिनन्दन

नववर्ष नही कर सकता मैं तेरा अभिनन्दन
जब चारों और देखता हूँ पीडा और क्रंदन
अच्छी खबरें ही मिलती रहेंगी तेरे इस दौर में
यकीन नही होता जब करता हूँ अपने मन में मंथन
लोग खुशी के आसमान में उड़ना चाहते हैं
पर तोड़ नही पाते अपने पुराने मन के बन्धन
उत्पात और अशांति [...]

पुराना साल, नया साल

पुराना अभी गया नहीं
और अभी दूर हैं नया साल
सजने लगे हैं लोगों के लिए
पहले से ही काकटेल के थाल
इतनी भी क्या जल्दी है
समझ में नहीं आती
शौकीन लोगों का
समय मुश्किल से निकल रहा है
पुराना भी क्या बुरा, जो चल रहा है
कैलेंडर की बदलती तारीखें
देखने से कोई तसल्ली नहीं होती
अगर दिमाग है अपने से बेहाल [...]

”मैं अपनी पोस्ट का शीर्षक बदलता हूँ”

एक ब्लोगर ने अपने ब्लोगर ने
अपनी पोस्ट पर लिखी कहानी
शीर्षक लिखा ”मैं प्यार करता चाहता हूँ’
पढ़ने वालों ने बस उसे ही
पढा और अपने लिए प्रस्ताव समझकर
कई ने लगा दिए
स्वीकृति भरे कमेन्ट
ब्लोगर हैरान हुआ
समझ गया केवल शीर्षक ने ही किया है
यह घोटाला
तब उसने दूसरी पोस्ट लिखी
”मैं अपनी पोस्ट का शीर्षक बदलता हूँ’
——————————–

पोस्ट भले [...]

रहीम के दोहे:अभिवादन करने वाले सभी मित्र नहीं हो जाते

सब को सब कोऊ करै, कै सलाम कै राम
हित रहीम तब जानिए, जब कछु अटकै काम
कविवर रहीम कहते हैं की सब एक दुसरे को सलाम और राम-राम कहकर अभिवादन तो सभी करते हैं पर मित्र तो उसे ही मानिए जो समय पर काम पर आये.
संपादकीय अभिमत-इसमें रहीम जी ने कितना बड़ा गूढ़ रहस्य प्रकट किया [...]

बेनजीर की हत्या: पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान की भूमिका भी संदेह के घेरे में

बेनजीर की हत्या से पूरा विश्व विचलित हुआ है क्योंकि एक औरत को इतनी बेरहमी से भी मारा जा सकता है इस पर लोग यकीन नहीं कर पा रहे. वर्तमान सभ्य समाज में यह एक ऐसी घटना है जिससे हर कोई सिहर उठा है. मैंने आज अंतरजाल पर अंग्रेजी और हिन्दी लेखों को देखा [...]

संत कबीर वाणी:संतों की निंदा करना ठीक नहीं

सीखै सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देय
बिना समझै शब्द गहै, कछु न लोहा लेय

 
संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति सत्य और न्याय के शब्दों को अच्छी तरह से ग्रहण करता है उसके लिए ही फलदायी होता है। परंतु जो बिना समझे, बिना सोचे-विचारे शब्द को ग्रहण करता है तथा रटता [...]

बेनजीर एक नजीर बन गयी

सुन्दर चेहरा
समुन्दर जैसे गहरी ऑंखें
खुशदिल और शिक्षित व्यक्तित्व
की मल्लिका बेनजीर को
किसकी  नजर लग गयी
५४ वर्ष में खिला एक
फूल पल भर में मसल डाला
दानव नहीं लगा सकते एक फूल भी
पर बाग़-बाग़ के उजाड़ डालते हैं
इंसानों के भेष में सब इंसान नहीं होते
भला क्या सब यह जानते हैं
भोली भाली एक औरत
मर्दों की राजनीति की बलि चढ़ गयी
हिंसा [...]

संत कबीर वाणी:प्रभु का दर्शन करने वाला गाता नहीं

कबीर जब हम गावते, तब जाना गुरु नाहीं
अब गुरु दिल में देखिया, गावन को कछु नाहिं
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जब तक हम गाते रहे, तब तक हम गुरु को जान ही नहीं पाए, परन्तु अब हृदय में दर्शन पा लिया, तो गाने को कुछ नहीं रहा.
भावार्थ- संत कबीरदास जी के दोहों में [...]

छोटा आदमी-बड़ा आदमी

आदमी बड़ा या उसकी माया
दौलत बड़ी की आदमी की काया
हर पल बदलती इस दुनिया में
रूप बदलती है माया
पर ढहती जाती है काया
कभी साइकिल थी अमीर की सवारी
आज हो गई है कार
कभी पैडल मार कर चलते हुए बडे आदमी को
देख रास्ता छोड़ देते थे कि
कहीं टक्कर न मारे साथ में
जड़ दे गाल पर दो हाथ
आज [...]

चाणक्य नीति:अपनों का अपमान अधिक दुख:दायी

1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि मित्रता के योग्य नहीं होता है। ऐसा व्यक्ति निकृष्ट श्रेणी का होता है और जो भी ऐसे व्यक्ति को मित्र बनाता है वह सदैव धोखा ही खाता है।
[...]

अपने मन में है बस व्यापार

जो हाथ मांगने के लिए उठते हैं
उनके हाथ कुछ तो आ जाता है
पर सम्मान पाने की आशा
उनको नहीं करना चाहिए
जिनकी जुबान का हर शब्द
मांगने में खर्च हो जाता है
———————————–
अपने मन में है बस व्यापार
बाहर ढूंढते हैं प्यार
मन में ख्वाहिश
सोने, चांदी और धन
के हों भण्डार
पर दूसरा करे प्यार
मन की भाषा में हैं लाखों [...]

मनुस्मृति:एक दिन से अधिक ठहरने वाला अतिथि नहीं

1.एक सज्जन व्यक्ति के घर से बैठने या विश्राम के लिए भूमि, तिनकों से बने आसन, जल तथा मृदु वचन कभी दूर नहीं रहते। यह सब आसानी से उपलब्ध रहते हैं। अत: अतिथि को यदि अन्न, फल-फूल और दूध आदि से सेवा करना संभव नहीं हो तो उसे सही स्थान पर आसन पर आदर सहित [...]

अड़ जाये तो ब्लोगर भी कम नहीं

बाबू ने एक हाथ में फाईल पकडी
और ब्लोगर की तरफ हाथ बढाया
पहले तो वह समझा नहीं और
जब समझा तो गुस्सा आया
उसने कहा
”तुम मेरी फाइल दो
मैं तुम्हें रिश्वत नहीं दे सकता
मैंने अपनी जिन्दगी में
कभी किसी को रिश्वत न देने का व्रत उठाया’
बाबू ने मूहं से पान की पीक थूकते हुए कहा
‘क्या पगला गए हो
यहाँ [...]

चाणक्य नीति:अपनी हानि किसी को नहीं बतानी

१.बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के दोष तथा किसी दुष्ट द्वारा अपने पर किये गए प्रहार और अपमान की भूलकर किसी से भी चर्चा किसी अन्य व्यक्ति से चर्चा न करे. इन सब बातों को यथासंभव गुप्त रखना चाहिए.
२.बुद्धिमान पुरुष को भय [...]

मनुस्मृति:अपराधियों को अनदेखा न करे राज्य

१.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से तंग होकर जो व्यक्ति रास्ते में पड़ने वाले खेत से कुछ कंद-मूल अथवा गन्ना ले लेता हैं उस पर दंड नहीं लगाना चाहिए.
२.जो व्यक्ति दुसरे के पशुओं को बांधता है, बंधे हुए पशुओं को खोल देता है तथा दासों, घोडों और रथों को हर [...]

जब ब्लोगर कार के मुहूर्त से बिना कमेन्ट के लौटा

ब्लोगर पहुंचा सर्वशक्तिमान के घर
ध्यान लगाने
कुछ पल का चैन पाने
निकला जब बाहर तो देखा
उसका मित्र अपनी नयी कार लेकर
खडा था
उस घर के सेवक से पुजवाने
ब्लोगर को देखकर मित्र खुश हो गया
और इशारा कर बुलाया और बोला
”यार, आज ही खरीदी है
लाया हूँ इसे इसकी नजर उतरवाने
तुम भी रुक जाओ
और प्रसाद पाओ
फिर कभी ले चलूँगा तुम्हें [...]

रहीम के दोहे:सूखा तालाब किसी की प्यास नहीं बुझाता

तासौं ही कछु पाइए, कीजै जाकी आस
रीते सरवर पर गए, कैसें बुझे पियास
कवि रहीम कहते हैं कि उसी व्यक्ति के पास जाइये जिससे आशा हो। सूखे तालाब के पास जाने से कभी भी किसी जीव की प्यास नहीं बुझ सकती।
संपादकीय अभिमत- इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिनके पास बहुत सारी [...]

कंप्यूटर के बाहर ब्लोगर नजरबंद

बिजली बंद तो पानी बंद
ब्लोग फिर भी चल रहा है
भले ही उसकी गति हो मंद
पर ब्लोगर खुद बैठा है
कंप्यूटर के बाहर नजरबंद
उसे इन्तजार है कब लाईट आये
तो वह अपने ब्लोग पर जाये
घड़ी चल रही है
पर ब्लोगर की सांस थम रही है
अक्ल काम कर रही है
पर सोच का सिलसिला है बंद
कलम हाथ में
कोरा कागज़ सामने है
पर [...]

ब्लोगरी की तो प्रेम के अध्याय बंद हो जायेंगे

प्रेयसी ने प्रियतमा को सुझाया
जब तक मेरा कोर्स पूरा न हो
तब तक ब्लोग बनाकर मजे कर लें
इसमें जब मशहूर हो जायेंगे
तब प्रियतम के माँ-बाप भी
मशहूर बहू को बिना दहेज़ के
लाने को तैयार हो जायेंगे
प्रियतम सोच में पड़ गया
और शहर के एक फ्लॉप ब्लोगर के
घर पहुंचा राय मांगने
सुनते ही उसने कहा
‘पगला गए हो जो [...]

अगर ब्लोग के लिए पुरस्कार घोषित हुए तो

एक ब्लोगर* ने दूसरे से कहा
”यार, तुम उम्मीद करते हो कि
कभी हमारे लिए भी पुरस्कार
घोषित किये जायेंगे’
दूसरे ने कहा
‘ख्याल तो अच्छा है पर
यह भी सोच लो
जब ऐसी संभावना बनी भी
तो अपुन तो बाहर हो जायेंगे
ढेर सारे छद्म ब्लोग आसमान से
जमीन पर उतर आयेंगे
औरों का तो छोडो
अपने ब्लोग के नाम भी हम भूल जायेंगे
और जो [...]

जब तक चेतना नहीं होगी

पेट भरते ही भले लोग
चूल्हे की बुझा देते आग
पर जिनके मन में है
दौलत और शौहरत की आग
वह कभी नहीं बुझती
वह कभी शहर तो कभी ग्राम में
गली और मुहल्ले में भड़काते हैं आग
हर गरीब को खिलाते ख्याली पुलाव
ऐसे रास्ते का पता देते
जिसकी मंजिल कहीं नहीं
बस है इधर से उधर घुमाव
दिन में गाली देते अमीर को
रात [...]

चाणक्य नीति:मन का लगाव न हो तो आत्मीयता नहीं बन पाती

1.जिसके प्रति लगाव(सच्चा प्यार) वह दूर होते हुए भी पास रहता है। इसके विपरीत जिसके प्रति लगाव नहीं है वह प्राणी समीप होते हुए भी दूर रहता है। मन का लगाव न होने पर आत्मीयता बन ही नहीं पाती और किसी प्रकार का संबंध बन ही नहीं पाता।
2.जिस किसी प्राणी से मनुष्य को किसी भी [...]

ब्लोगर लेखक और लेखक ब्लोगर (3)

मैं पिछले कई दिनों से लगातार देख रहा हूँ कि कुछ लोग अपने साथ कोई लेबल लगा कर रहना चाहते हैं. यह मानव प्रवृति है कि वह कोई समूह बनाने के लिए अपने साथ कोई न कोई लेबल लगाना चाहता है ताकि वैसे ही लेबल लगाने वाले उससे जुड़ें. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है [...]

संत कबीर वाणी:एक राम को जानिए

आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक
कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक
संत कबीर जी का कहना है की गाली आते हुए एक होती है, परन्तु उसके प्रत्युतर में जब दूसरा भी गाली देता है, तो वह एक की अनेक रूप होती जातीं हैं। अगर कोई गाली देता है तो उसे सह [...]

शीतल चांदनी का आनंद उठाए कौन

रात्रि में चन्दा बिखेरता
अब भी पहले की तरह
शीतल चांदनी
पर उसका आनन्द उठाएँ कौन
दूरदर्शन और कम्प्यूटर से
अपनी आखें लेकर जूझता आदमी
बाहर है प्राकृतिक सौन्दर्य
खङा है मौन
प्रथम किरणों के साथ
जीवन का संदेश देता सूर्य
रात को देर तक सोकर
सुबह देर बिस्तर छोड़ें आदमी
प्रात:काल नमन करे कौन
शीतल और शुद्ध पवन
आवारा फिरती है
वातानुकूलित कमरों में
उसका है प्रवेश वर्जित
सुखद अनुभूति पाए [...]

चाणक्य नीति:अपनी योजना गुप्त रखने पर ही सफलता संभव

१. यदि आप सफलता हासिल करना चाहते हैं तो गोपनीयता रखना सीख लें. जब किसी कार्य की सिद्धि के लिए कोई योजना बना रहे हैं तो उसके कार्यान्वयन और सफल होने तक उसे गुप्त रखने का मन्त्र आना चाहिए. अन्य लोगों की जानकारी में अगर आपकी योजना आ गयी तो वह उसमें सफलता [...]

जजबात वह शय है

जजबातों के साथ जीना अच्छी बात है
पर उन्हें कोई बांधकर
हमारी अक्ल को भी कोई साथ ले जाये
यह मंजूर नहीं करना
अब उस्ताद वैसे नहीं है जो
शागिर्द को सिखा सब दाव सिखा दें
फिक्सिंग का खेल सभी जगह हैं
क्या पता कौन चेला
उस्ताद को स्टिंग आपरेशन में फंसा दे
इसलिए जहाँ तक विज्ञापन में बिक सके
उतना ही [...]

चाणक्य नीति:मन शुद्ध हो तो प्रतिमा में भी भगवान्

1.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती है, इसके विपरीत मनुष्य का जीवन अल्प है और उस अल्पकाल के जीवन में रोग,शोक, कष्ट आदि अनेक प्रकार की बाधाएं उपस्थित होती रहती हैं। इस स्थिति में मनुष्य को शास्त्रों का सार ग्रहण करना चाहिए।
संपादकीय [...]

पानी पिलायें ऐसा नही अवसर

भाषण करते हुए वह बोले
”हम अब प्रगति के पथ पर
अग्रसर हैं
सारी दुनिया हमारी प्रशंसक है
हमारे शेयर बाजार का आंकडा
अब दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है
विकास डर आसमान छू रही है
हमारे लिए अब आगे बढ़ने का अवसर है
भाषण के बाद आए मिलने लोग
उनसे अपने-अपने इलाके की
बिजली, पानी और सड़कों की
खस्ता हालत के मुद्दे उठाने लगे
तो [...]

चाणक्य नीति:बुद्धिमान अपने आहार की चिंता नहीं करते

१.बुद्धिमान पुरुष को आहार जुटाने के चिंता नहीं करना चाहिए, उसे तो केवल अपने धर्म और अनुष्ठान में लगना चाहिए क्योंकि उसका आहार तो उसके मनुष्य जन्म लेते ही उत्पन्न हो जाता है.
अभिप्राय-इसका अभिप्राय यह है कि परमपिता परमात्मा ने जिसे जन्म दिया है उसके लिए आहार का इंतजाम तो उसके भाग्य में लिख [...]

डर की कोख में ही क्रूरता का शैतान जन्म लेता है

कभी बनते थे हथियारों के खिलौने
अब हथियार ही खिलौने बनने लगे हैं
अपनी देह को बचाने के लिए
लोग रखने लगे हैं हथियार
इस इलेक्ट्रोनिक युग में
कौन रिवाल्वर को खरीद कर
बच्चों को देता है
अपने लिए ही हथियार को खिलौना समझ लेता है
क्या गलती उस बच्चे की जो
हथियार को खिलौना समझ लेता है
किस-किस से शिकायत करें
सबने अपनी जिन्दगी को [...]

रहीम के दोहे:सच्चा मित्र दही की तरह निभाता है

मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव
रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय
कविवर रहीम कहते हैं कि जब दही को लगातार माथा जाता है तो उसमें से मक्खन अलग हो जाता है और दही मट्ठे में विलीन होकर मक्खन को अपने ऊपर आश्रय देती है, इसी प्रकार सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति आने [...]

हवा और पानी को शुद्ध नहीं कर सकते

जिन रास्तों पर चलते हुए
कई बरस बीत गये
पता ही नही लगा कि
कैसे उनके रूप बदलते गए
जहाँ कभी छायादार पेड़ हुआ करते थे
वहाँ लहराता है सिगरेट का धुआं
जहाँ रखीं थीं गुम्टियाँ
वहाँ ऊंची इमारतों के
पाँव जमते गए
जहाँ हुआ करता था उद्यान
वहाँ कचरे के ढेर बढ़ते गये
कहते हैं दुनिया में तरक्की हो रही है
सच यह है कि पतन [...]

चाणक्य नीति:मन में पाप हो तो तीर्थ से भी शुद्धि नहीं

१.आंखों से देखभाल का पैर रखें, पानी कपडे से छान कर पीयें. शास्त्रानुसार वाक्य बोलें, मन में सोच कर कार्य करें.
२.दान, शक्ति, मीठा बोलना, धीरता और सम्यक ज्ञान यह चार प्रकार के गुण जन्म जात होते हैं, यह अभ्यास से नहीं आते.
३.जिसकी मन में पाप हैं, वह सौ बार तीर्थ स्नान करने के बाद भी [...]

चाणक्य नीति:संतान को शिक्षा न देने वाले माता-पिता शत्रु के समान

१.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस्तिष्क में और बिच्छू की पुँछ में-पर इन सबसे अलग दुर्जन और कपटी मनुष्य के हर अंग में विष होता है. उसके मन में विद्वेष,वाणी में कटुता और कर्म में नीचता का व्यवहार [...]

भ्रम का जाल

सामने कुछ कहैं
पीठ पीछे कुछ और
ऐसे लोगों की बातों पर क्या करें गौर
बात काम करें मचाएँ ज्यादा शोर
बोले और पीछे पछ्ताएं
जैसे नाचने के बाद रोए मोर
जिनके मन में नही सदभाव
उनकी वाणी में होता है कटुता का भाव
अपनी पीठ आप थपथपापाएं
अपने दिल का मैल छिपाएं
क्या पायेंगे ऐसे लोगों को बनाकर सिरमौर
उनकी भीड़ में शामिल होने से [...]

चाणक्य नीति:जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता वहाँ समृद्धि आती है

१.जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता, अन्न संचित रहता है तथा पति-पत्नी में झगडा नहीं होता वहाँ लक्ष्मी बिना बुलाए निवास करती है.
अभिप्राय-इस कथन का आशय यह है की यदि किसी देश में सुख और समृद्धि आयेगी तो गुणवानों के समान से आयेगी.इसके अलावा जहाँ खाद्यान के भण्डार एवं परिवारों में [...]

पहले अपनी नीयत बताओ

कहते हैं रामजी के होने के
भौतिक सबूत हमारे सामने लाओ
नहीं ला सकते तो उन्हें भूल जाओ
राम जी की माया अपरम्पार
जिस पर माया का भूत चढा दें
अपना नाम भी भुलवा दें
सोने के सिंहासन पर बैठते ही
भगवान् की तरह पूजने की चाह
उन्हें अंधा बना देती है
रामजी का नाम रहते यह संभव नहीं
अमीर तो क्या गरीब के [...]

चाणक्य नीति:परिवार का सुख उसके स्वरूप पर निर्भर

१.सुखद गृहस्थी और परिवार की सुख समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है की परिवार का स्वरूप कैसा है. जहाँ परिवार के सदस्य एक दूसरे के मनोभावों को समझते और सम्मान करे हैं वहीं शांति रह पाती है और शांति से ही सुख समृद्धि आती है.
2. यह मनुष्य का स्वभाव है की यदि वह दूसरे [...]

चाणक्य नीति: इस कड़वे संसार में दो मीठे फल भी लगते हैं

१.इस संसार की तुलना एक कड़वे वृक्ष से की जाती है जिस पर पर अमृत के समान दो फल भी लगेते हैं-मधुर वचन और सद्पुरुषों की संगति. ये दोनों अत्यंत गुणकारी होते हैं. इन्हें खाकर आदमी अपने जीवन को सुखद बना सकता है. अत हर मनुष्य को मधुर वचन और सत्संग का फल ग्रहण करना [...]

चाणक्य नीति:धर्म का नियम ही शाश्वत

१.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती है, इसके विपरीत मनुष्य का जीवन अल्प है और उस अल्पकाल के जीवन में रोग,शोक, कष्ट आदि अनेक प्रकार की बाधाएं उपस्थित होती रहती हैं। इस स्थिति में मनुष्य को शास्त्रों का सार ग्रहण करना चाहिए।
२.मन [...]

अपनी बेहतर रचनाएं विकिपीडिया पर पोस्ट करें

विकिपीडिया ज्ञान और विज्ञान की एक बहुत बड़ी वेब साईट है. इसमें हिन्दी से संबंधित पोस्टों के संख्या पर अक्सर सवाल उठाया जाता है और कहा जाता है की वहाँ इनकी संख्या बहुत कम है. इसमें कोई दो राय नहीं है और यह सच भी है कि अन्य भाषाओं के मुकाबले बहुत कम है और [...]

चाणक्य नीति:आलस्य मनुष्य का स्वाभाविक दुर्गुण

1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई करने में खुश होते हैं। अपने वचनों द्वारा से कभी-कभी अपने ही वाचों द्वारा बिछाए जाल में स्वयं ही घिर जाते हैं और उसी तरह नष्ट हो जाते हैं जिस तरह रेत की टीले के [...]

विकास यानि वाहनों की चौडाई बढना सड़क की कम होना

बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम तरह के आंकडे भी दिए जाते हैं पर जब मैं रास्तों से उन रास्तों से गुजरता हूँ-जहाँ चलते हुए वर्षों हो गयी है-तो उनकी हालत देखकर यह ख्याल आता है कि आखिर [...]

चाणक्य नीति:जहाँ धनी, ज्ञानी और निपुण राजा न हो वह स्थान छोड़ दें

1.किसी भी व्यक्ति का जहाँ सम्मान न हो उसे त्याग देना चाहिए. क्योंकि बिना सम्मान के मनुष्य जीवन जीने का कोई अर्थ नहीं है.
2.किसी भी व्यक्ति को वह स्थान भी त्याग देना चाहिए जहाँ आजीविका न हो क्योंकि आजीविका रहित मनुष्य समाज में किसी सम्मान के योग्य नहीं रह जाता.
3.इसी प्रकार वह देश [...]

रूस और भारत की मैत्री में अब वह बात नहीं रही

भारत के नौसेनाध्यक्ष एडमिरल मेहता ने रक्षा सौदों मैं रूस की और से निरंतर बढ़ते विलंब और लागत से परेशान होकर कहा है कि रूस को अब भारत से संबंध पर पुनर्विचार करना चाहिए. अखबार मैं प्रकाशित समाचार के अनुसार नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर उन्होने कहा कि रूस वैसा नहीं रहा [...]

चाणक्य नीति:जहाँ यज्ञ-हवन न हो वह घर मुर्दाघर समान

१.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस्तिष्क में और बिच्छू की पुँछ में-पर इन सबसे अलग दुर्जन और कपटी मनुष्य के हर अंग में विष होता है. उसके मन में विद्वेष,वाणी में कटुता और कर्म में नीचता का व्यवहार [...]

मनुस्मृति:सभी के निद्रा मी चले जाने पर दंड ही जाग्रत रहता है

1.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड देना चाहिए। सच तो यह है कि राज्य का दण्ड ही राष्ट्र में अनुशासन बनाए रखने में सहायक तथा सभी वर्गों के धर्म-पालन [...]

समझो प्रेयसी को ठगता है

सावन और बसंत के मौसम पर
शीतल हवाओं के चलने की बात
लिखना अब मजाक लगता है
अगर कोई प्रियतम अपने प्रेयसी को
लिखे खूबसूरत मौसम की बात
समझो उसे ठगता है
घुली है प्राणवायु में विषैली गैस
सांस में भला अब सुगंध कहाँ से आये
सब जगह तो आसमान से
जलता अंगारा बरसता है
बरसात का पानी भी
कई बार विषैला [...]

चीखकर करना पङता है इजहार

चारों और मचती चीख पुकार
कोई खुशी में चिल्ला रहा है
कोई तकलीफ में कर रहा है चीत्कार
सुखों की खोज में बढ़ता आदमी
दुख जुटा रहा है
अपना चैन गँवा रहा है
दिल का दर्द इतना बढ जाता है
चिल्ला कर ही हो पाता है इजहार
कानों से किसी का दर्द
सुनने की आदत भी कहाँ रही
किसी को सुनाना है तो
इतनी शक्ति [...]

संत कबीर वाणी:जादू-टोना व्यर्थ है

जो कोय निन्दै साधू को, संकट आवै सोय
नरक जाय जन्मै मरै, मुक्ति कबहु नहिं होय
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो भी साधू और संतजनों की निंदा करता है, उसके अनुसार अवश्य ही संकट आता है। वह निम्न कोटि का व्यक्ति नरक-योनि के अनेक दु:खों को भोगता हुआ जन्मता और मरता रहता है। उसके [...]

सच किसे समझाएं

सदियों से चले आ रही
लोगों के समूहों की परिभाषाएँ
बाहर से मजबूत किले की तरह लगते
अन्दर रिवाजों में एक दूसरे को ठगते
बाहर से आदर्श लगते
पर एक शब्द से हिलते नजर आएं
वक्त देखें तो पहचान छिपाएं
फायदा देखें सीना तानकर सामने आयें
सभ्य समाज हो रहा है दिशाहीन
अक्षरज्ञान जितना बढ़ता जा रहा है
अक्षरों से बने शब्दार्थ [...]

रहीम के दोहे:अति कदापि न कीजिए

रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिये निज कानि
सैजन अति फूले तऊ, दार पात की हानि
अर्थ-कवि रहीम कहते हैं कि किसी चीज की भी अति कदापि न कीजिए, हमेशा अपनी मर्यादा को पकडे रही. जैसे सहिजन वृक्ष के अत्यधिक विकसित होने से उसकी शाखाओं और पत्तों को हानि होती है और वह झड़ जाते हैं.
रन, [...]

जमीन की जिन्दगी की हकीकत

ख्वाहिशें तो जिंदगी में बहुत होतीं हैं
पर सभी नहीं होतीं पूरी
जो होतीं भी हैं तो अधूरी
पर कोई इसलिए जिन्दगी में ठहर नहीं जाता
कहीं रौशनी होती है पर
जहाँ होता हैं अँधेरा
वीरान कभी शहर नहीं हो जाता
कोई रोता है कोई हंसता है
करते सभी जिन्दगी पूरी
सपने तो जागते हुए भी
लोग बहुत देखते हैं
उनके पूरे न होने पर
अपने ही [...]

कौटिल्य का अर्थशास्त्र: कायर की संगति भी बुरी

1. दूर्भिक्ष और आपत्तिग्रस्त स्वयं ही नष्ट होता है और सेना का व्यसन को प्राप्त हुआ राज प्रमुख युद्ध की शक्ति नहीं रखता।
2. विदेश में स्थित राज प्रमुख छोटे शत्रु से भी परास्त हो जाता है। थोड़े जल में स्थित ग्राह हाथी को खींचकर चला जाता है।
3. बहुत [...]

दिल के चिराग जलाते नहीं-hindi shayri

जिनका हम करते हैं इन्तजार
वह हमसे मिलने आते नहीं
जो हमारे लिए बिछाये बैठे हैं पलकें
उनके यहां हम जाते नहीं
अपने दिल के आगे क्यों हो जाते हैं मजबूर
क्यों होता है हमको अपने पर गरूर
जो आसानी से मिल सकता है
उससे आँखें फेर जाते हैं
जिसे ढूँढने के लिए बरसों
बरबाद हो जाते हैं
उसे कभी पाते नहीं
तकलीफों पर रोते हैं
पर [...]

कौटिल्य का अर्थशास्त्र:अग्नि के समान असहनशील भी होना चाहिये

१.कछुए के समान अंग संकोचकर शत्रु का प्रहार भी सहन करे और बुद्धिमान फिर समय देखकर क्रूर सर्प के समान डटकर लडे.
२.समय पर पर्वत के समान सहनशील हो और अग्नि के समान असहनशील हो और समय पर प्रिय वचन कहता हुआ कंधे पर भी शत्रु को उठावे.
३.मत्त और प्रमत्त के समान बाहरी दिखावे [...]

झूठ की सता ही लोगों में इज्जत पाती है

अपनी महफिलों में शराब की
बोतलें टेबलों पर सजाते हैं
बात करते हैं इंसानियत की
पर नशे में मदहोश होने की
तैयारी में जुट जाते हैं
हर जाम पर ज़माने के
बिगड़ जाने का रोना
चर्चा का विषय होता है
सोने का महंगा होना
नजर कहीं और दिमाग कहीं
ख्याल कहीं और जुबान कहीं
शराब का हर घूँट
गले के नीचे उतारे जाते हैं
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आदमी की संवेदना [...]

संत कबीर वाणी:फ़टे दिल को कौन सिल सकता है

बाहर क्या दिखराइये, अन्तर जानिए राम
कहा काज संसार से, तुझे घनी से काम
संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि बाहर दिखाकर भगवान् का स्मरण करने से क्या लाभ, राम का स्मरण तो अपने ह्रदय में करना चाहिए। जब भगवान् के भक्ती करनी है फिर इस संसार से क्या काम ।
*लेखक का मत है कि [...]

तकिये का सहारा

हमें पूछा था अपने दिल को
बहलाने के लिए किसे जगह का पता
उन्होने बाजार का रास्ता बता दिया
जहां बिकती है दिल की खुशी
दौलत के सिक्कों से
जहाँ पहुंचे तो सौदागरों ने
मोलभाव में उलझा दिया
अगर बाजार में मिलती दिल की खुशी
और दिमाग का चैन
तो इस दुनिया में रहता
हर आदमी क्यों इतना बैचैन
हम घर पहुंचे और सांस ली
आँखें बंद [...]

रहीम के दोहे:संसार के बड़प्पन को कोई नहीं देख सकता

रहिमन जगत बडाई की, कूकुर की पहिचानि
प्रीती करे मुख छाती, बैर करे तन हानि
कविवर रहीम कहते हैं की अपनी बडाई सुनकर फूलना और आलोचना से गुस्सा हो जाना कोई अच्छी बात नहीं है क्योंकि यह कुत्ते का गुण है. उसे थोडा प्यार करो तो मालिक को चाटने लगता है और फटकारने पर उसे [...]

अपनी सोच से रास्ते बनते हैं

एक पत्थर को रंग पोतकर अदभुत
बताकर दिखाने की कोशिश
लोहे को रंग लगाकर
चमत्कारी बताने की कोशिश
आदमी के भटकते मन को
स्वर्ग दिखाने की कोशिश
तब तक चलती रहेगी
जब तक अपने को सब खुद नहीं संभालेंगे
ख्वाब ही हकीकत बनते हैं
सपने भी सच निकलते हैं
अपनी सोच से भी रास्ते बनते हैं
कोई और हमें संभाले
अपनी जंग जीत सकते [...]