Author Archives: दीपक भारतदीप

दीपक भारतदीप
प्रात: योग साधना करना एवम गीता का पाठ करना। इसके आलावा लेखन के द्वारा मित्र बनाना । अर्थाजन में अधिक रूचिनहीं । मेरी मान्यता है कि आदमी की देह शाश्वत नहीं है पर जीवन शाश्वत है,लिखने के साथ उसका मजा भी लेता हूँ। देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। इन्टरनेट पर पिछले साल ही लिखना शुरू किया। ग्वालियर में निवास है

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

 

कभी गम तो कभी खुशी

कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ

कविता लिखने का ख्याल किया

तब भाषा सजाने के साथ  

शब्द को जोर से बजाने का सोच  नहीं आया.

कोशिश की रस के रंग दिखाने 

और   अलंकार से कविता  सजाने की 

मिले जिससे भाषा विद्वान की उपाधि 

तब कविता को अपने दिल के  भाव से दूर पाया..

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कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
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दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ [...]

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)

सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। दूसरे का दुःख देकर अपने आपको यह संतोष देते हैं कि वह उसके मुकाबले अधिक सुखी हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि लोग बहिर्मुखी जीवन व्यतीत करते हैं और अपने [...]

योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से दस वर्ष पूर्व तक अनेक लोग योगसाधना को अत्यंत गोपनीय या असाधारण बात समझते थे। ऐसी धारणा बनी हुई थी कि योग साधना सामान्य व्यक्ति के करने की चीज नहीं है। इसका कारण यह था कि [...]

रामचरित मानस की चर्चा-चिंतन आलेख (ramcharit manas-hindi article)

रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन हजार गल्तियां हैं। हाय! भगवान राम जी के भक्त यह सुनकर उद्वेलित हो जायेंगे कि ‘देखो, रामचरित मानस का अपमान हो रहा है।’
शायद ऐसा न हो क्योंकि वह भारतीय धर्म से ही जुड़े [...]

बदतमीज बात पर नजर-हिंदी व्यंग्य (badtamij bat par nazar-hindi vyangya)

एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया गया है। हो सकता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ समर्थक इस पर नाराज हों पर यह एक जरूरी कदम है। दरअसल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं होना चाहिये पर अभद्र और अश्लील [...]

नए स्वांग और मुखौटे-हास्य व्यंग्य कविताएँ (svang aur mukhaute-hindi satire poem)

रोज रचते हैं नया स्वांग
चेहरे पर लगाते नए मुखौटे
और बदलकर आते हैं कपड़े
मगर छद्म होकर भी करते हैं हमेशा लफड़े.
आदमी अपना बाहर का रूप
कितना भी बदल ले
अदाओं से पहचाना जाता है,
जहां स्वर बदले
शब्दों से पकड़ा जाता है,
खुलकर सांस लेने से घबड़ाते हैं जो लोग
छिपकर करते वार
पर अपने हथियारों की शकल
और तौरतरीकों [...]

सेल के रोग का इलाज नहीं-हास्य व्यंग्य कविता (sel rog ka ilaj-hasya vyangyakavita)

अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया
और हाथ में देते हुए बोला-
‘दीपक बापू,
बूढ़े आदमियों के लिये
तैयार कपड़ों की एक सेल लगी है
चलो तुम्हें वहां से
टोपी, कुर्ता धोती और स्वेटर दिलवायें
बहुत पुराने लगते हैं तुम्हारी तरह
तुम्हारें कपड़े भी सजायें।
यह ठीक है अभी तक फ्लाप हो
चिंता की बात नहीं
पर कल हिट हो जाओगे
तो कैसे सम्मेलनों में [...]

जब उनके पुतलों की पोल खुल जायेगी-हिंदी कविता

पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं
सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं।
आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया
समझते नहीं भीड़ के इशारे
अपनी उंगलियों से पकड़ी रस्सी से
मनचाहे दृश्य वह मंच पर ठेल रहे हैं।
भीड़ में बैठे हैं उनके किराये के टट्टू
जो वाह वाही करते हैं
तमाम लोग तो बस झेल रहे हैं।
खेल कभी लंबा नहीं होता
कभी [...]

दिवाली का शुभ दिन बीत गया-आलेख (hindi article on diwali festival

होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खाते थे कि बस अब दिवाली आयेगी तो जमकर खायेंगेे। हमें मिठाई खाने का शौक शुरु से रहा है और कुछ लोग मानते हैं कि मिठाई के शौकीन झगड़ा कम करते हैं क्योंकि उनकी वाणी [...]

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

सूखी मन गयी दिवाली
क्योंकि जेब थी खाली,
ज़माने में अपना रुआब दिखाने के
लिए सबसे कह रहे हैं”हैप्पी दीवाली”.
जेब खाली हो तो
अपना चेहरा आईने में देखते हुए भी
बहुत डर लगता है
अपने ही खालीपन का अक्स
सताने लगता है।
क्यों न इतरायें दौलतमंद
जब पूरा जमाना ही
आंख जमाये है उन पर
और अपने ही गरीब रिश्ते से
मूंह फेरे रहता है।
अपना हाथ [...]

कामयाब इंसान-हिन्दी व्यंग्य कविता (kamyab insan-hindi kavita)

अमन का फरिश्ता बनने के लिये
पहले इस जहां में आग लगा दो
फिर उसे बुझा दो।
खड़ा कर दो किराये का शैतान
जिससे लड़ो नकली लड़ाई
तना रहे जब तक तुम चाहो
फिर उसे अपने सामने झुका लो।
ऐसे ही अफसाने खेलते हुए
अपना नाम आकाश में उड़ा दो।
जहां तक चलता है तुम्हारी
दौलत और शौहरत का रुतवा
वहीं तक खेलो नाटक
चाटुकार दर्शक बन [...]

लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)

जिंदगी की इस धारा में
किस किसकी नाव पार लगाओगे।
समंदर से गहरी है इसकी धारा
लहरे इतनी ऊंची कि
आकाश का भी तोड़ दे तारा
अपनी सोच को इस किनारे से
उस किनारे तक ले जाते हुए
स्वयं ही ख्यालों में डूब जाओगे।
दूसरे को मझधार से तभी तो निकाल सकते हो
जब पहले अपनी नाव संभाल पाओगे।
दूर उठती लहरें देखकर
खेलने का मन [...]

खेल और हवा-हिंदी व्यंग्य लघुकथा (khel aur hava-hindu laghu katha)

उसने एक फुटबाल ली और उस पर लिख दिया धर्म। वह उस फुटबाल के साथ एक डंडा लेकर उस मैदान में पहुंच गया जहां गोल पोस्ट बना हुआ था। तमाम लोग वहां तफरी करने आते थे इसलिये वह पहले जोर से चिल्लाया और बोला-‘है कोई जो सामने आकर मुझे गोल करने से रोक सके।’
उसने अपनी [...]

बहस कि कामेडी-हिंदी लघु व्यंग्य (disscusion as a comedy-hindi satire)

उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और शौषण खत्म कैसे किया जाये। सभी सजधजकर बहस करने आये थे। सभी वक्ता अपने अपने विचार रख रहे थे।
एक ने कहा ‘हमें गरीबों के दिमाग में अपने अधिकार के लिये चेतना जगाने [...]

पसंद कि नापसंद-हास्य व्यंग (hindi comedy satire)

एक सज्जन ने मन्नत मांगी थी कि अगर उनको कभी कहीं से कोई सम्मान प्राप्त होगा तो वह किसी नये कवि का सम्मेलन करायेंगे। इससे तो उनका सम्मान का प्रचार तो होगा ही साहित्य में नयी पीढ़ी को आगे लाने के लिये भी प्रसिद्धि मिलेगी। दरअसल उन्होंने अपने बेकारी के दिनों में अनेक [...]

रावण ने राम का नाम जपा-हास्य व्यंग्य कविता (mukh men ram, pas me ravan-hasya vyangya kavita)

सुनते हैं मरते समय
रावण ने राम का नाम जपा
इसलिये पुण्य कमाने के साथ
स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया।
उसके भक्त भी लेते
राम का नाम पुण्य कमाने के वास्ते,
हृदय में तो बसा है सभी के
सुंदर नारियों को पाने का सपना
चाहते सभी मायावी हो महल अपना
चलते दौलत के साथ शौहरत पाने के रास्ते,
मुख से लेते राम का नाम
हृदय [...]

हिंदी ब्लाग अंग्रेजी से आगे निकल सकते हैं-आलेख

अंतर्जाल पर कौन कितना सफल है यह तो कहना कठिन है क्योंकि यहां अनेक तरह के फर्जीवाड़े हैं जिनको समझना एक कठिन काम है। चाहे किसी भी भाषा के ब्लाग हैं उनको लेकर अनेक तरह के भ्रम बने ही रहते हैं। अनेक दिलचस्प बातें सामने आती हैं। लोग तमाम तरह की वेबसाईटों पर [...]

दीवारों के पीछे से प्रहार-व्यंग्य कविताएं (deevar ke piche se prahar-vyangya kavitaen)

चेहरे पर रोज नया मुखौटा लगाकर
वह सामने चले आते
उनकी बहादुरी पर क्या भरोसा करें
जो अपने पहचाने जाने का खौफ
हमेशा अपने साथ लाते।
………………
दीवारों के पीछे छिपकर
वह पत्थर हम पर उछालते हैं
भीड़ हंसती है
हम भी बदले का इरादा पालते हैं।
दीवारों के पीछे हम नहीं जा सकते
अपनी पहचान छिपाते
डर के साये में जीते वह लोग
मर मर कर [...]

विदुर नीति- दुष्ट की सलाह पर व्यक्ति चले तो उससे दूर रहें (vidur niti-raja aur dusht ki salah)

न निह्यवं मन्त्र गचछेत संसृष्टमन्त्रस्य कुसंगतस्य।
न च ब्रूयात्रश्वसिमि त्वयीति संकारणं व्यपदेशं तु कुर्यात्
हिंदी में भावार्थ-जब कहीं भरी सभा में राजा-वर्तमान संदर्भ में कहें तो अपने से शक्तिशाली व्यक्ति-दुष्ट सलाहकारों से सलाह ले रहा है तब उसकी किसी बात का खंडन नहीं करना चाहिये। साथ ही वहां उसके प्रति किसी प्रकार का अविश्वास भी नहीं प्रकाट [...]

ब्लागर सरकार पर एसा वैसा मत लिख देना-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya on blogger sarkar)

सर्दी की सुबह चाय पीने के बाद ब्लागर कोहरे में घर से बाहर निकला। उसका शरीर ठंड से कांप रहा था पर चाय पीने से जो पेट मं गैस बनती है उससे निपटने का ब्लागर के पास यही एक नुस्खा था कि वह बाहर टहल आये। वह थोड़ा दूर चला होगा तो उसे [...]

मुर्दाखानों में रौशनी की तलाश-हिंदी साहित्य कविता (The search of light of life in dead mines – Hindi literature, poetry)

जमींदौज या राख हो चुके इंसानों के
राहों पर छपे कदमों को चूम कर
उसके निशान जमाने को दिखाते हैं।
गुजरते समय के साथ
बदलते जमाने को अपने ही
नजरिये से चलाने की कोशिश करते
वह लोग
मुर्दाखानों में जिंदगी की रौशनी जलाते हैं।
जितनी जिंदगियां चलती हैं
उतनी ही कहानियां पलती हैं
इस रंगबिरंगी दुनियां में
बस एक सूरज की रौशनी ही जलती है
बाकी चिराग [...]

एक शब्द मवेशी श्रेणी, दूसरा कीड़ा श्रेणी-हिंदी हास्य व्यंग्य (one cattle class, second worm class-hindi hasya vyangya)

करें भी तो क्या? अखबार पढ़े और टीवी चैनल देखे बिना चैन ही नहीं पड़ता। अखबार पढ़ने में भी अब प्रथम पृष्ठ की खबरों की बजाय अंदर के पृष्ठ देखते हैं कि शायद कुछ अलग हटकर मिल जाये जबकि ताकि हास्य कविता या व्यंग्य लिख सकें। टीवी चैनलों से तो उकता गये हैं इसलिये [...]

सविता भाभी ने किया सच का सामना-हिन्दी हास्य कविता (savita bhabhi ne kiya sach ka samana-hasya kavita)

नाम कुछ दूसरा था पर
नायिका सविता भाभी रखकर वह
सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची
और एक करोड़ कमाया।
प्रतिबंधित वेबसाईट की कल्पित नायिका को
अपने में असली दर्शाया।
यह देखकर उसका रचयिता
छद्म नाम लेखक कसमसाया।
पीसने लगा दांत
भींचने लगा मुट्ठी और
गुस्से में आकर एक जाम बनाया।
पास में बैठे दूसरे
पियक्कड़ ब्लाग लेखक से बोला
‘‘यार, कैसी है यह अंतर्जाल की माया।
अपनी नायिका [...]

दिल का दिमाग से रिश्ता-हिंदी कविता (dil aur dimag-hindi sahityak kavita)

दिल में कुछ
दिमाग में कुछ
जुबां से दूसरे बोल ही निकल आते हैं।
दिल का दिमाग से
दिमाग का जुबां से रिश्ता
भला कितने लोग जान पाते हैं।
दूसरों से संवाद क्या करेंगे
अपने ही भाव नहीं पढ़ पाते हैं।
……………….
अर्थहीन शब्द
औपचारिक संवाद
सुनने की आदत हो गयी है।
दोस्ती और रिश्तों की भीड़ में
आत्मीयता ढूंढती थक चुकीं
मन की आंखें, अब सो गयी हैं।
…………………….

यह [...]

हुकुम मेरे आका-हास्य व्यंग्य कविता(hukum mere aka-hasya hindi kavita

शराब की बोतल से जिन्न निकला
और उस पियक्कड़ से बोला
-”हुकुम मेरे आका!
आप जो भी मुझसे मंगवाओगे
वह ले आउंगा
बस शराब की बोतल नहीं मंगवाना
वरना मुझसे हाथ धोकर पछताओगे.

सुनकर पियक्कड़ बोला
-”मेरे पास बाकी सब है
उनसे भागता हुआ ही शराब के नशे में
घुस जाता हूँ
दिल को छु ले, ऐसा कोई प्यार [...]

आती जाती बिजली-हास्य कविता (bijli par hasya kavita)

अच्छे विषय पर सोचकर
कविता लिखने बैठा युवा कवि
कि बिजली गुल हो गयी।
कागज पर हाथ था उसका
कलम अंधेरे में हुई लापता
जो सोचा था विषय
उसका भी नहीं था अतापता
अब वह बिजली पर पंक्तियां सोचने लगा
‘कब आती और जाती है
यह तो बहुत सताती है
इसका आसरा लेकर जीना खराब है
इससे तो अच्छा
तेल से जलने वाला चिराग है
जिंदगी की कृत्रिम [...]

बीस और पचास का खेल-हास्य व्यंग्य कविताएँ (play for twenty and fifty-hindi hasya vyangya kavitaen

उन्होंने तय किया है कि
एक दिन में पचास ओवर की
जगह बीस ओवर वाले मैच खेलेंगे।
देखने वाले तो देखेंगे
जो नहीं देखने वाले
वह तो व्यंग्य बाण ऐसे भी फैंकेंगे।
सच है जब बीस रुपये खर्च से भी
हजार रुपया कमाया जा सकता है तो
पचास रुपये खर्च करने से क्या फायदा
फिल्म हो या खेल
अब तो कमाने का ही हो [...]

दोनों तूफान में फंसे थे-हिंदी कविता(rishton men tufan-hindi poem)

हम दोनों तूफान में फंसे थे
उनको सोने की दीवारों का
सहारा मिला
हम ताश के पतों की तरह ढह गये।
अब गुजरते हैं जब उस राह से
यादें सामने आ जाती हैं
कभी अपनो की तरह देखने वाली आंखें
परायों की तरह ताकती हैं
रिश्ते समय की धारा में यूं ही बह गये।
जुबां से निकलते नहीं शब्द उनके
पर इशारे हमेशा [...]

नकली खून और डाक्टर-हास्य व्यंग्य (nakle khoon aur dactor-hindi hasya vyangya)

डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान का पैसा उसे देने गये थे। दुपहिया से जैसे ही उतरे डाक्टर साहब से नमस्कार किया और पैसा देकर जैसे ही वापस मुड़े तो डाक्टर साहब ने पूछा-‘कहीं बाजार जा रहे हैं।’
हमने कहा-‘हां, [...]

हिन्दी के कवि और शायर बिना पढ़े ही गीता पर लिखते हैं-हिन्दी आलेख (Hindi poet writes on without reading the Gita – Hindi article)

अक्सर अनेक कवितायें, शायरियों गीत, और गद्य रचनायें हमारे सामने आती हैं जिसमें भारतीय धर्म ग्रंथों के साथ ही अन्य धर्मों की पवित्र पुस्तकें भूलकर इंसान से प्रेम करने का संदेश शामिल होता है। जिन कवियों और शायरों को देशभक्ति, एकता और धार्मिक सद्भावना सुसज्जित कर अपनी रचनाओं में दिखानी होती है वह अक्सर [...]

कुछ भ्रम, कुछ सत्य- हिन्दी हास्य व्यंग्य ( Some confusion, some truth – Hindi comedy satire)

इस देश में भ्रम भी सच की तरह बिकता है यह तो बहुत समय से देखते आ रहे है पर इस कदर विवेकवान और पढ़े लिखे लोग भी वाद और नारों की बाढ़ में बह सकते हैं यह कभी सोचा नहीं था। टीवी चैनल,अखबार और अंतर्जाल पर कई ऐसी घटनाओं की विवेचना देखता हूं [...]

देशी बीमारी, विदेशी बीमारी-हास्य कविता (deshi aur videshi bimari-hasya kavita)

स्वाईन फ्लू की बीमारी ने आते ही देश में प्रसिद्धि आई।
इतने इंतजार के बाद, आखिर शिकार ढूंढते विदेश से आई।।
ढेर सारी देसी बीमारियां पंक्तिबद्ध खड़ी होकर खड़ी थी
पर तब भी विदेश में बीमारी के नृत्य की खबरें यहां पर छाई।
देसी कुत्ता हो या बीमारी उसकी चर्चा में मजा नहीं आता
देसी खाने और दवा के [...]

वह कौनसी तराजू है-हिन्दी व्यंग्य कविता (taraju-hasya kavita)

कामयाबी की कीमत
मुद्रा में आंकी जाने लगी है।
इज्जत और दिल के चैन का
मोल लोग भूल गये हैं
ढेर सारी दौलत एकत्रित कर
प्रतिष्ठा का भ्रम पाले
अपने पांव तले
दूसरे इंसान को कुचलने की चाहत
हर इंसान में जगी है।
…………………………
वह कौनसी तराजू हैं
जिसमें इंसान की इज्जत
और दिल का चैन तुल जाये।
दौलत के ढेर कितने भी बड़े हों
फिर भी उनमें [...]

पर्दे के पीछे देखने की चाहत-हिंदी हास्य व्यंग्य (Behind the scenes-Hindi comedy satire)

पर्दे के पीछे से आशय फिल्म या नाटक से नहीं है बल्कि भीड़ के अलग हटकर किये जा रहे विरोधाभासी व्यवहार से है। दरअसल लोगों की आदत है कि वह भीड़ में बैठकर सामने किसी विशिष्ट व्यक्ति को देखते हैं तो उसे पास जानने की इच्छा प्रबल हो उठती है। कुछ लोग भीड़ में [...]

पहरेदार-हिंदी लघुकथा/ कहानी (paharedar-a short hindi story)

एक बेकार आदमी साक्षात्कार देने के लिये जा रहा था। रास्ते में उसका एक बेकार घूम रहा मित्र मिल गया। उसने उससे पूछा-‘कहां जा रहा है?
उसने जवाब दिया कि -‘साक्षात्कार के लिये जा रहा हूं। इतने सारे आवेदन भेजता हूं मुश्किल से ही बुलावा आया है।’
मित्र ने कहा-‘अरे, तू मेरी बात सुन!’
उसने जवाब दिया-‘यार, [...]

यूँ हुआ सच का सामना-हास्य व्यंग्य (yoon hua sach ka samna-hindi satire)

कविराज अपने घर से दूर उस पार्क में पहुंच गये। घर में बिजली नहीं थी और बरसात की वजह से सारी सड़कें सराबोर हो गयी थीं। पिछली बार एक बरसात में कविराज एक गड्ढे में गिर चुके थे। उस समय आसपास खड़े लोग भी उन पर हंस रहे थे। एक जानपहचान वाले ने हंसने [...]

हंसी के खजाने की तलाश-हिंदी शायरी (hansi ka khazana-hindi shayri)

अपने पर ही यूं हंस लेता हूं।
कोई मेरी इस हंसी से
अपना दर्द मिटा ले
कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं।
मसखरा समझ ले जमाना तो क्या
अपनी ही मसखरी में
अपनी जिंदगी जी लेता हूं।
रोती सूरतें लिये लोग
खुश दिखने की कोशिश में
जिंदगी गुजार देते हैं
फिर भी किसी से हंसी
उधार नहीं लेते हैं
अपने घमंड में जी रहे लोग
दूसरे के [...]

दिखावे के दोस्ती -हिंदी शायरी (dikhave ki dosti-hindi shayri)

बेसुरा वह गाने लगे।
किसी के समझ न आये
ऐसे शब्द गुनगनाने लगे।
फिर भी बजी जोरदार तालियां
मन में लोग बक रहे थे गालियां
आकाओं ने जुटाई थी किराये की भीड़
अपनी महफिल सजाने के लिये
इसलिये लोगों ने अपने मूंह सिल लिये
पहले हाथों से चुकाई ताली बजाकर कीमत
दाम में पाया खाना फिर खाने लगे।
………………………
कमअक्ल दोस्त से
अक्लमंद दुश्मन भला
ऐसे ही [...]

वैश्विक समाजों का अंतर्द्वंद्व और अंतर्जाल-आलेख (hindi article on the social matter)

यहां हम इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करने जा रहे कि किसी अश्लील वेबसाईट पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिये या नहीं और न ही इसके देखने या न देखने के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं बल्कि हमारा मुख्य ध्येय है यह है कि हम समाज के उस अंतद्वंद्व को देखें जिस पर किसी अन्य [...]

दूसरे की दौलत को धूल समझें-चाणक्य नीति (dusre ki daulat ko dhool samjhen-chankya niti

यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी।
स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य के अनुसार कुछ पुरुषों में विवेक नहीं होता और वह सुंदर स्त्री से व्यवहार करते हुए यह भ्रम पाल लेते हैं कि वह वह उस पर मोहित है। वह भ्रमित पुरुष फिर उस स्त्री के लिये ऐसे ही हो [...]

कल्पित भाभी, कामयाबी की चाभी,-व्यंग्य कविता kalpit bhabhi, kamyabi ki chabhi-vyangya kavita

कवि देवर ने लिखी
अपनी प्यारी भाभी पर कविता
‘बहुत सुंदर और सुशील हैं मेरी भाभी
मेरी कामयाबी की है चाभी।
जब कहीं जाता था साक्षात्कार के लिये
वही मेरा सामान बनाती
अटैची में कपड़े सजाती
मेरी कामयाबी के लिये
सर्वशक्तिमान की मूर्ति के सामने
दिल लगाकर आरती गाती
भाई के साथ फेरे लगाकर आई
जैसे मैने नई मां पाई
दिल करता है मां संबोधित करूं न [...]

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)

आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित होता है जब वह अपने लिये कठिन हालत पाता है। पूरे विश्व के साथ भारत में भी आंतक फैले होने की बात की जाती है पर अन्य से हमारी स्थिति थोड़ी अलग है। [...]

शराबी ईमेल-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

उस ईमेल में सबसे ऊपर लगे फोटो में शराब की बोतलें सजी थीं। नीचे संदेश में लिखा था कि ‘कृपया इस ईमेल को ध्वस्त न करें। इसे पढ़ें और अपने अन्य मित्रों को भेजें। इस ईमेल को पढ़कर एक आदमी ने इसे ध्वस्त कर दिया तो अगले दिन ही सुबह उसके घर [...]

‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे- व्यंग्य आलेख ’savita bhabhi’ se pichhe ‘mastram’-hindi vyangya article

कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रिय’ सामग्री भी हो सकती है। इस पर प्रतिबंध लगने के बाद उसकी खोज खबर बढ़ गयी है। सच कहें तो इस ‘सविता भाभी’ अपने पाठों को हिट कराने का जोरदार नुस्खा बनता [...]

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।
हिंदी में भावार्थ-श्रीगीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म से पराया धर्म श्रेष्ठ लगता है तब उसको कभी श्रेय न प्रदान करें। अपना धर्म संपन्न नहीं दिखता पर दूसरे का धर्म तो हमेशा भयावह परिणाम देने वाला होता है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-अक्सर लोग धर्म को [...]

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आड़ में कोई अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है तो कोई अपना व्यवसाय कर रहा है। जब कहीं सार्वजनिक रूप से प्रार्थनायें सभायें होती हैं तब यह लगता है कि [...]

गर्मी पर लिखी कविता बरसात धो गयी-व्यंग्य कविता

गर्मी पर लिखने बैठे कविता
बिजली गुल हो गयी।
बाहर चलती आंधी ने
मचाया शोर
गरज कर बरसा पानी
बरसात के इंतजार में रचे थे शब्द
बहते पसीने का दिखाया था दर्द
मानसून की पहली बरसात
सब धो गयी।
गर्मी पर लिखी कविता बस यूं खो गयी।
…………………
गर्मी पर लिखकर पहुंचा
वह कवि सम्मेलन में
बीच में बरसात हो गयी।
मंच पर आकर बोला वह
‘मेरे गुरु ने [...]

विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा।
गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर जी कहते हैं कि जो अपने स्वभाव के विपरीत कार्य करते हैं वह कभी नहीं शोभा पाते। गृहस्थ होकर अकर्मण्यता और सन्यासी होते हुए विषयासक्ति का प्रदर्शन करना ठीक नहीं है।
द्वाविमौ कपटकौ तीक्ष्णौ शरीरपरिशोषिणी।
यश्चाधनः कामयते पश्च कुप्यत्यनीश्वरः।।
हिंदी में भावार्थ-अल्पमात्रा में धन [...]

ख़ुद भटके,द्रूसरे को देते रास्ते का पता-व्यंग्य कविता

अपनी मंजिल पर
कभी वह पहुंचे नहीं।
चले कहीं के लिये थे
पहुंचे गये कहीं।
भटकाव सोच का था
कभी रास्ते से वह उतर जाते
कभी खो जाता रास्ता कहीं।
……………………..
अपने रास्ते से वह भटके
अपने ही गम में वह लटके
कोई उपाय न देखकर
बूढ़े बरगद के नीचे धूनि रमाई।
दूसरे को रास्ता बताने लगे
यूं भीड़ का काफिला बढ़ता गया
जमाना ही उनके जाल में फंसता [...]

बरसात के लिये प्रार्थना-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आड़ में कोई अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है तो कोई अपना व्यवसाय कर रहा है। जब कहीं सार्वजनिक रूप से प्रार्थनायें सभायें होती हैं तब यह लगता है कि [...]

मनुस्मृतिः युवती को पति स्वयं चुनने का अधिकार

देवदतां पतिर्भार्यां विन्दते नेच्छत्यात्मनः।
तां साध्वीं बिभृयान्नित्यं दीनां प्रियमाचरन्।।
हिंदी में भावार्थ-पुरुष स्वयं की इच्छा ने नहीं वरन् देवताओं द्वारा पूर्व निर्धारित स्त्री को ही पत्नी के रूप में प्राप्त करता है। उन्हीं देवताओं के प्रसन्न करने तथा उनके प्रति आस्था प्रदर्शित करने के लिये पुरुष का कर्तव्य है कि वह अपनी आश्रिता पत्नी का भरण भोषण [...]

पतंग और क्रिकेट-हास्य कविता hindi vyangya kavita

बेटे ने कहा बाप से
‘पापा मुझे पतंग उड़ाना सिखा दो
कैसे पैच लड़ाते हैं यह दिखा दो
तो बड़ा मजा आयेगा।’
बाप ने कहा बेटे से
‘पतंग उड़ाना है बेकार
इससे गेंद और बल्ला पकड़ ले
तो खेल का खेल
भविष्य का व्यापार हो जायेगा।
मैंने व्यापार में बहुत की तरक्की
पर पतंग उड़ाकर किया
बचपन का वक्त
यह हमेशा याद आयेगा।
बड़ा चोखा धंधा है यह
जीतने [...]

विदुर नीति-शक्ति से बड़ी इच्छा करना मूर्खता

द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा।
गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर जी कहते हैं कि जो अपने स्वभाव के विपरीत कार्य करते हैं वह कभी नहीं शोभा पाते। गृहस्थ होकर अकर्मण्यता और सन्यासी होते हुए विषयासक्ति का प्रदर्शन करना ठीक नहीं है।
द्वाविमौ कपटकौ तीक्ष्णौ शरीरपरिशोषिणी।
यश्चाधनः कामयते पश्च कुप्यत्यनीश्वरः।।
हिंदी में भावार्थ-अल्पमात्रा में धन होते [...]

क्रिकेट में हार-मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र

बीसीसीआई की क्रिकेट टीम बीस ओवरीय एक दिवसीय प्रतियोगिता में हार गयी और अब पता लगा कि उसमें पांच खिलाड़ी अनफिट थे। टीम जिस तरह अपने मैच खेल रही थी उससे लग तो नहीं रहा था कि वह कप जीत पायेगी पर इस कदर पिटेगी यह आभास भी नहीं था। इससे पहले एक क्लब [...]

जहर और अमृत -लघुकथा

वह कोई गेहुंआ वस्त्र पहने साधु या संत नहीं बल्कि कोई शिक्षित और सज्जन पुरुष थे। कहीं बैठकर लोगों से ज्ञान चर्चा कर रहे थे। उनके सामने तीन लोग श्रोता के रूप में बैठ कर उनकी बातें सुन रहे थे। उन सज्जन ज्ञानी पुरुष ने पुराने शास्त्रों से अनेक उद्धरण देते हुए कुछ महापुरुषों [...]

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की पाठक संख्या पचास हजार-संपादकीय

पाठ पठन/पाठक संख्या पचास हजार पार करने वाला ईपत्रिका इस लेखक का तीसरा ब्लाग/पत्रिका है। इसने हाल ही मैं गूगल के पैज रैंक में चौथा स्थान प्राप्त किया-जो कि इसकी बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसे लेखक के पचास हजार की पाठ पठन/पाठक संख्या पार करने वाले अब तीन ब्लाग हैं-
1. हिंदी पत्रिका
2.शब्द पत्रिका
3.ईपत्रिका
गूगल [...]

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
——————
तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव नाम सा बुद्धिरप्रतिहता वचनं तदेव।
अर्थोष्मणा विरहितः पुरुषः क्षपोन सोऽष्यन्य एव भवतीति विचित्रमेतत्।।
हिंदी में भावार्थ-मनुष्य की इंद्रिया नाम,बुद्धि तथा अन्य सभी गुण वही होते हैं पर धन की उष्मा से रहित हो जाने पर पुरुष क्षणमात्र में क्या रह जाता है? धन की महिमा विचित्र है।
वर्तमान संदभ में संपादकीय व्याख्या- [...]

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर – हास्य व्यंग्य

क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन पर कुप्रभाव पड़ रहा है। उनके अनुसार पैसा प्यार को मजबूत रखता है और उसकी कमी तनाव को जन्म देती है।
यह एक सच्चाई है। फिल्मों,साहित्यक कहानियों और हिंदी उर्दू शायरियों में जिस इश्क, प्यार या मोहब्बत [...]

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय
ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय
संत श्री कबीरदास जी का कथन है जब ज्ञान चर्चा चौराहै पर करो पर जब उसका अध्ययन करना हो तो दो लोगों की बीच में ही ठीक है। ज्ञान के बारे में जब ध्यान, चिंतन और मनन करना हो तो [...]

हादसों से सीखा, अफ़सानों ने समझाया-व्यंग्य कविता

कुछ हादसों से सीखा
कुछ अफसानों ने समझाया।
सभी जिंदगी दो चेहरों के साथ बिताते हैं
शैतान छिपाये अंदर
बाहर फरिश्ता दिखाते हैं
आगे बढ़ने के लिये
पीठ पर जिन्होंने हाथ फिराया।
जब बढ़ने लगे कदम तरक्की की तरफ
उन्होंने ही बीच में पांव फंसाकर गिराया।
इंसान तो मजबूरियों का पुतला
और अपने जज़्बातों का गुलाम है
कुदरत के करिश्मों ने यही बताया।
…………………….
कदम दर कदम भरोसा [...]

मनु स्मृति-दूध से बनी चावल की खीर और रबड़ी हानिकारक

वृथाकृसरसंयावं पायसायूपमेव च।
अनुपाकृतमासानि देवान्नानि हर्वषि च।।
हिंदी में भावार्थ-तिल, चावल की दूध में बनी खीर,दूध की रबड़ी,मालपुआ आदि स्वास्थ्य के हानिकाकाकर हैं अतः उनके सेवन से बचना चाहिये।
आरण्यानां च सर्वेषां मृगानणां माहिषां बिना।
स्त्रीक्षीरं चैव वन्र्यानि सर्वशक्तुनि चैव हि।।
हिंदी में भावार्थ-भैंस के अतिरिक्त सभी वनैले पशुओं तथा स्त्री का दूध पीने योग्य नहीं होता। सभी सड़े गले [...]

चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि
——————-
अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्रन्नभोजिनः।
त द्विजः कि करिष्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः।।
हिंदी में भावार्थ- नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि अर्थोपासक विद्वान समाज के लिये किसी काम के नहीं है। वह विद्वान जो असंस्कारी लोगों के साथ भोजन करते हैं उनको यश नहीं मिल पता है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या- इस देश का [...]

चाणक्य नीति-कुसंस्कार बुढ़ापे तक पीछा नहीं छोड़ते

वयसः परिणामेऽपि यः खलः खलः एव सः।
सुपक्वमपि माधुर्य नोपयातीद्रवारुणाम्।।
हिंदी में भावार्थ-आयु में बड़ा हो जाने पर भी दुष्ट की दुष्टता का भाव नहीं जाता। जैसे किसी फल का स्वाद स्वाभाविक रूप कड़वा होता है और उसे अधिक देर तक इसलिये पकाया जाये कि उसमें मीठे का स्वाद आ जाये तो वह संभव नहीं है।
वर्तमान [...]

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

मनु महाराज कहते हैं कि
—————–
अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक पालिकाः।
न कार्पासास्थि न तुषादीर्धमायुजिजीविषुः।।
हिंदी में भावार्थ- जिस व्यक्ति के हृदय में लंबी आयु पाने की इच्छा है उसे कभी बालों, भस्म, हड्डी, खप्पर, कपास की गुठली तथा भूसे के ढेर पर नहीं बैठना चाहिये।
अचक्षुविंषयं दुर्ग न प्रपद्येत कहिंचित्।
न विणुमूत्रमुदीक्षेत न बाहुभ्यां नदीं तरेत्।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य [...]

श्री गुरुवाणी-मन से भक्ति करें तो चिंता से मुक्ति संभव

देइ किवाड़ अनिक पड़दे महि, परदारा संग फाकै।
चित्रगुप्तु जब लेखा मागहि, तब कउण पड़दा तेरा ढाकै।
(सरल गुरु ग्रंथ साहिब के पृष्ठ 147 से साभार)
हिंदी में भावार्थ-श्री गुरु ग्रंथ साहिब के मतानुसार चाहे कितने भी दरवाजे बंद कर और ढेर सारे परदे लगाकर कोई भी अनैतिक काम कर लें पर जब चित्र गुप्त महाराज के [...]

प्रेमियों का चंद्रमा पर बसेरा-हास्य व्यंग्य कविता

सड़क से गुजर रहे वाहनों
और उद्यान में बच्चों का शोर
प्रेमिका हो गयी बोर
उसका चेहरा देखकर प्रेमी ने कहा
’क्या बात है प्रिया
तुम उदास क्यों हो?
कोई इच्छा हो तो बताओ
तुम कहो तो आकाश से
चंद्रमा जमीन पर उतार लाऊं।’
पहले तो गुस्से में प्रेमिका ने प्रेमी को देखा
फिर अचानक उसकी आंखें चमकने लगी
नासिका में जैसे ताजी हवा महकने लगी
वह [...]

मुस्कराहट का मुखौटा-व्यंग्य कविता

बेकद्रों की महफिल में मत जाना
बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा
पर कौन, किसकी कद्र करेगा।
मुस्कराहट का मुखौटा लगाये सभी
हर शहर में घूम रहे हैं
जो मिल नहीं पाती खुशी उसे
ढूंढते हुए झूम रहे हैं
दूसरे के पसीने में तलाश रहे हैं
अपने लिये चैन की जिंदगी
उनके लिये अपना खून अमृत है
दूसरे का है गंदगी
तुम बेकद्रों [...]

संत कबीर के दोहे-ह्रदय साफ नहीं तो माला फेरने से क्या लाभ

माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय।
गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।।
माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख मांहि।
मनवा तो दहु दिशि फिरै, यह तो सुमिरन मांहि।।
संत शिरोमण कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य हाथ में माला फेरते हुए जीभ से परमात्मा का नाम लेता है पर उसका मन दसों दिशाओं [...]

‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो
या महाप्रबंधक
बस वह मिलना चाहिए।
अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें
वह लकड़ी की हो या लोहे की
कौन देखने आता है
कुर्सी का रुतबा तो बाहर ही
नजर आता है
न मिले तो बस नाम के आगे ही
तख्ती की तरह लग जाये
हम न बैठ सके तो कोई बात नहीं
नाम ही कुर्सी पर बैठा [...]

बाजार की आस्था या आस्था का बाजार-हास्य व्यंग्य

कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच्चे उनकी गति को नियंत्रित करने का खेल कर रहे हैं।’ इससे उनकी धार्मिक आस्थायें आहत हो रही हैं। तमाम तरह के आक्षेप किये जा रहे हैं।
एक बात समझ में नहीं आती कि लोग [...]

चाणक्य नीति-भंवरे को कमल का महत्व विदेश में पता लगता है

अध्यात्म

भर्तृहरि नीति शतक- सच्चे भक्त बने व्यापारी नहीं

महाराज भर्तृहरि कहते है किकि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः।
मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं स्वात्मानन्दपदप्रवेशकलनं शेषाः वणिगवृत्तयं:।।
हिंदी में भावार्थ- वेद, स्मुतियों और पुराणों का पढ़ने और किसी स्वर्ग नाम के गांव में निवास पाने के लये कर्मकांडों को निर्वाह करने से भ्रम पैदा होता है। जो परमात्मा संसार के दुःख और तनाव से मुक्ति दिला [...]

रहीम संदेश: समय ख़राब हो तो कटु वचन सुनने पड़ते हैं

समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम
सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम
कविवर रहीम कहते हैं कि बुरा समय आने पर तुच्छ और नीच वचनों का सहना करना पड़ा। जैसे भरी सभा में देशासन ने द्रोपदी का चीर हरण किया और शक्तिशाली भीम अपनी गदा हाथ में लिए रहे पर द्रोपदी की रक्षा [...]

चाणक्य नीतिः अपने घर के अन्दर की बात बाहर न कहें

नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि
——————————
धन-धान्यप्रयोगेषु विद्य-संग्रहणेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
हिंदी में भावार्थ-धन धान्य के व्यवहार, ज्ञान विद्या के संग्रह और खाने पीने में जो व्यक्ति संकोच या लज्जा नहीं करते वही जीवन में सुखी रहते हैं।
अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च।
वंचनं चाऽपमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत्।।
हिंदी में भावार्थ-अपने धन का नाश, मन [...]

कबीर के दोहे-तारा मंडल की बैठक में चंद्रमा पाता है इज्जत

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि
————————
तारा मण्डल बैठि के, चांद बड़ाई खाय।
उदै भया जब सूर का, तब तारा छिपि जाय।।
आसमान में तारा मंडल में बैठकर चांद बढ़ाई प्राप्त करता है पर जैसे ही सूर्य नारायण का उदय होता है वैसे ही तारा मंडल और चंद्रमा छिप जाते हैं।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-जहां [...]

कबीर के दोहे: मधुमक्खी की तरह सुगंध ग्रहण करें

जो तूं सेवा गुरुन का, निंदा की तज बान
निंदक नेरे आय जब कर आदर सनमान
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अगर सद्गुरु के सच्चे भक्त हो तो निंदा को त्याग दो और कोई अपना निंदा करता है तो निकट आने पर उसका भी सम्मान करो।
माखी गहै कुबास को, फूल बास नहिं लेय
मधुमाखी है [...]

चाणक्य नीतिः ‘जस के साथ तस’ नीति में दोष नहीं

संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे।
सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।।
हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य जी कहते हैं कि इस विषरूपी संसार में दो तरह के फल अमृत की तरह लगते हैं। एक तो सज्जन लोगों की संगत और दूसरा अच्छी वाणी सुनना।
कृते प्रतिकृतं कुर्याद् हिंसने प्रतिहिसंनम्।
तत्र दोषो न पतति दुष्टे दुष्टे सामचरेत्
हिंदी में भावार्थ-अपने [...]

सम्मान और अपमान-हिन्दी शायरी

दौलत और शौहरत कर देती है
कई लोगों को जमाने से परे
जिसके हाथ से लें सम्मान
वही सम्मानित हो जाता
जिसको ठुकरा दें उसका
होता अपमान

लफ्ज़ ही इन्कलाब का सैलाब लाते-हिंदी शायरी

यह सच है कि लिखने से इंकलाब नहीं आते।
पर जमाना बदल दे, लफ्ज ही ऐसा सैलाब लाते।।
किसी के लफ्ज पर ही तो तलवारें म्यान से निकलीं
खूनी जंग में गूंजती चीखें, कान गीत को तरस जाते।।
किताबों ने आदमी को गुलाम बनाकर रख दिया
लफ्जों की लड़ाई में लफ्ज ही तलवार बन पाते।।
चीखते हुए तलवार घुमाओ या कलम [...]

यह जिंदगी शब्दों का खेल है-हिंदी शायरी

महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी
आकाश से टपकेगी उम्मीद
ताकते हुए क्यों अपनी आंखें थकाते हो।
कोई दूसरा जलाकर चिराग
तुम्हारी जिंदगी का दूर कर देगा अंधेरा
यह सोचते हुए
क्यों नाउम्मीदी का भय ठहराते हो।।
खड़े हो जिन महलों के नीचे
कचड़ा ही उनकी खिड़कियों से
नीचे फैंका जायेगा
सोने के जेवर हो जायेंगे अलमारी में बंद
कागज [...]

वही नायक बनेगा-हास्य व्यंग्य कविताएँ

रीढ़हीन हो तो भी चलेगा।
चरित्र कैसा हो भी
पर चित्र में चमकदार दिखाई दे
ऐसा चेहरा ही नायक की तरह ढलेगा।
शब्द ज्ञान की उपाधि होते हुए भी
नहीं जानता हो दिमाग से सोचना
तब भी वह जमाने के लिये
लड़ता हुआ नायक बनेगा।
कोई और लिखेगा संवाद
बस वह जुबान से बोलेगा
तुतलाता हो तो भी कोई बात नहीं
कोई दूसरा उसकी आवाज [...]

इन्टरनेट पर लिखते हुए कोई संकोच न करें-आलेख

नये लेखक लेखिकाओं को लिखते हुए इस बात की झिझक हो सकती है कि उनके लिखे पर कोई हंसे नहीं। वह समाचार पत्र पत्रिकाओं में तमाम प्रसिद्ध लेखकों की रचनायें पढ़कर यह सोचते होंगे कि वह उन जैसा नहीं लिख सकते। कई युवक युवतियां तो ऐसे हैं जो अपनी रचनायें लिखकर अपने पास ही रख [...]

मर्द की असलियत और नारी मुक्ति-व्यंग्य क्षणिकाएं

पीता जाए चुपचाप दर्द.
घर की नारी करें हैरान
ससुराल वाले धमकाकर करें परेशान
पर खामोश रहे वही है असली मर्द.
पसीना बहाकर कितना भी थक जाता हो
फिर भी नींद पर उसका हक़ नहीं हैं
अगर नारी का हक़ भूल जाता हो
घर में भीगी बिल्ली की तरह रहे
भले ही बाहर शेर नज़र आता हो
मुश्किलों [...]

ज्ञान का चिराग-लघुकथा

डूबता हुआ सूरज रोज अट्टहास के साथ अपने से ही सवाल करता था कि ‘इस दुनियां में सबसे बड़ा कौन?’
फिर दोबारा अट्टहास करते हुए स्वयं ही जवाब देता था कि ‘मैं’! मेरी रौशनी के बिना इस संसार के उस हिस्से में अंधेरा छा जाता है जहां से मैं विदा लेता हूं।’
एक दिन डूबने से पहले [...]

बंदर, चिंपौजी और इंसान का नैतिक आधार-व्यंग्य

अब यह भला क्या बात हुई कि बंदर तथा चिंपौजी में भी नैतिकता होती है। कुछ पश्चिमी विशेषज्ञों ने अपने प्रयोग से बात यह बात अब जाकर जानी है कि बंदर और चिंपौजी में भी वैसे ही नैतिक भावना होती है जैसे कि इंसानों (?) में होती है। बंदर और चिपौजी भी अपने साथ किये [...]

शराब पीना बन गयी है आज़ादी का पैमाना -हिंदी व्यंग्य कविता

अब खूब पीना शराब
नहीं कहेगा कोई खराब
क्योंकि वह आजादी का पैमाना बन गयी है
कदम बहकने की फिक्र मत करना
इंसानी हकों के के नाम पर लड़ने वाले
तुम्हें संभाल लेंगे
इंतजार में खड़े हैं मयखानों के बाहर
कोई लड़खड़ाता हुआ आये तो
उसे सजा सकें अपनी महफिल में
हमदर्दी के व्यापार के लिये
उनके ठिकानों पर दर्द लेकर आने वालों की
भीड़ [...]

श्रीलंका क्रिकेट टीम के घायल खिलाड़ियों का खेल जीवन खतरे में पड़ सकता है-आलेख

कल लाहौर में श्रीलंका क्रिकेट टीम पर हमले के बाद बहुत कम लोगों ने इस बारे में सोचा है कि उसके घायल खिलाडि़यों का भविष्य अब खेल की दृष्टि से अंधकारमय भी हो सकता है। इस हमले में सभी खिलाड़ी जीवित बच गये पर उनके शरीरों पर गोली के घाव हैं जो शरीर के [...]

बहु ने लिखी कविताएँ-व्यंग्य शायरी

नयी बहू कवियित्री है
जब सास को पता लगी
तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी
उसने उससे अपने ऊपर कविता लिखने को कहा
तो बहू ने बड़ी खुशी से सुनाई
‘मेरी सास दुनियां में सबसे अच्छी
जैसे मैंने अपनी मां पायी
बोलना है कोयल की तरह
चेहरा है लगता है किसी देवी जैसा
क्यों न सराहूं अपना भाग्य ऐसा
चरण धोकर पीयूं
ऐसी [...]

उपेक्षासन सीख लो तो तनाव नहीं रहेगा-व्यंग्य

हम कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके चार जवाब हो सकते हैं
1.सभी कपड़े पहनकर घूमते हैं।
2.हम बिना कपड़े पहने बाहर निकलेंगे तो लोगों की नजरें हम केंद्रित हो जायेंगी और हमें शर्म आ जायेगी।
3.हम कपड़े पहनकर नहंी निकलेंगे तो लोगों को शर्म आयेगी।
4.हमारा शरीर इसका आदी हो गया है और अगर हम उसे नहीं पहनेंगे तो [...]

भ्रष्ट पात्र किसी कहानी में में केन्द्रीय पात्र क्यों नहीं होता -आलेख

स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो नहीं प्रगतिशील नहीं है। कुछ लोग सांस्कृतिक और धर्मवादियों को भी गैर प्रगतिशील कहते हैं। दोनों प्रकार के लेखक और बुद्धिजीवी आपस में अनेक विषयों पर वाद विवाद करते हैं और [...]

कंपनी कभी देवता तो कभी दानव -आलेख

कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती हैं। प्राचीन व्यापार में सेठ साहूकार यही काम करते थे पर जैसे लोगों के जागृति बढ़ने लगी उनके चेहरे स्याह दिखने लगे। तब कंपनी नाम का एक ऐसा दैत्य खड़ा किया [...]

खाकपति से बने करोड़पति पर कहानी-हास्य व्यंग्य कविताएँ

फिल्मों की कहानी में
गंदी बस्ती का लड़का
करोड़पति बन जाता है
पर हकीकत में भला कहां
कोई ऐसा पात्र नजर आता है
यह तो है बाजार के प्रचार का खेल
जो पहले करोड़पति बनने वाले
सवाल जवाब का कार्यक्रम बनाता है
उठते हैं उसकी सच्चाई पर सवाल
पर भला झूठ और ख्वाब के सौदागर
पर उसका असर कहां आता है
फिर बाजार रचता [...]

पब में पीने से शराब कोई अमृत नहीं हो जाती -हास्य कविता

नयी धोती, कुरता और टोपी पहनकर
बाहर जाने को तैयार हुए
कि आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापू
अच्छा हुआ तैयार हुए मिल गये
समय बच जायेगा
चलो आज अपने भतीजे के पब के
उदघाटन कार्यक्रम में तुम्हें भी ले जाता।
वहां तुम्हें पांचवें नंबर का अतिथि बनाता।
किसी ने नहीं दिया होगा ऐसा सम्मान
जो मैं तुम्हें दिलाता
खाने के साथ जाम भी पिलाता’।
सुनकर [...]

दर्द बयां करते हुए हो जाता है भुलावा-व्यंग्य कविताएँ

चेहरे हैं उनके सजे हुए
अपने घर पर उन्होंने
पत्थर और प्लास्टिक के फूल सजाये हैं
अपनी जुबान से बात करते हैं
वह ईमान और वफा की
पर अपने करते नहीं वह धंधे जो
उन्होंने सभी को बताये हैं
नाम तो हैं बड़े आकर्षक पर
काम का कोई भरोसा नहीं है
कौन बिक जाये यहां
पता नहीं लगता
आजाद तो सभी दिखते हैं
चाल और चरित्र में [...]

जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा

उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्या लगता है कि पाकिस्तान से भारत की जंग होगी।’
चाचा ने कहा-‘पता नहीं! अभी तो हम दोनों यह जंग लड़ ही रहे हैं।’
इतने में नर्स बाहर आयी और बोली-‘तीन नंबर के मरीज को देखने वाले आप [...]

यह प्यार है बाजार का खेल-व्यंग्य कविता

खूब करो क्योंकि हर जगह
लग रहे हैं मोहब्बत के नारे
बाजार में बिक सकें
उसमें करना ऐसे ही इशारे
उसमें ईमान,बोली,जाति और भाषा के भी
रंग भरे हों सारे
जमाने के जज्बात बनने और बिगड़ने के
अहसास भी उसमें दिखते हांे
ऐसा नाटक भी रचानां
किसी एकता की कहानी लिखते हों
भले ही झूठ पर
देश दुनियां की तरक्की भी दिखाना
परवाह नहीं करना किसी [...]

बाजार से धर्म बना या धर्म से बाजार-आलेख

धर्म यानि क्या? आप भारतीय पौराणिक ग्रंथों को अगर पढ़ते हैं तो उसका सीधा आशय आचरण से है पर उनमें किसी का नाम नहीं है। ‘हिंदू’ शब्द हमारे धर्म से जुड़ा है पर जिन पौराणिक ग्रंथों को हम अपना पूज्यनीय मानते हैें उनमें इसी शब्द की चर्चा कहीं नहीं हैं। भक्ति काल-जिसे हिंदी भाषा [...]

समाज, संस्कार और संस्कृति की रक्षा का प्रश्न-आलेख

हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार और संस्कृति पर संकट आने या उसके नष्ट होने का भय सताने लगता है। आखिर वह संस्कृति है क्या? वह कौनसे संस्कार है जिनके समाप्त होने का भय हमें सताता है? इतना ही नहीं [...]

डुप्लीकेट खाने के आतंक के साये में-हास्य व्यंग्य

देश में आतंकवाद को लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। अनेक तरह की संस्थायें शपथ लेने के लिये कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। अनेक जगह छात्र और शिक्षक सामूहिक रूप से शपथ ले रहे हैं तो कई कलाकार और लेखक भी इसी तरह ही योगदान कर रहे हैं। सवाल यह [...]

मौका पड़े तो अपने लिए शैतान खड़ा कर लो-व्यंग्य

शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे अपने के फरिश्ता साबित करना होता है वह अपने लिये पहले एक शैतान जुटाता है। अगर कोई कालोनी का फरिश्ता बनना चाहता है तो पहले वह दूसरी कालोनी की जांच करेगा। वहां [...]

आतंक के विरुद्ध कार्रवाई आवश्यक-आलेख

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की प्रत्यक्ष रूप से युद्ध की संभावना नहीं है पर इस बात से इंकार करना भी कठिन है कि कोई सैन्य कार्यवाही नहीं होगी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी ने स्पष्ट रूप से 20 आतंकवादी भारत को सौंपने से इंकार कर दिया पर उन्होंने यह नहीं कहा कि वह [...]

दर्द से लड़ते आंसू सूख गये-हिंदी शायरी

जब हकीकतें होती बहुत कड़वी
वह मीठे सपनों के टूटने की
चिंता किसी को नहीं सताती
जहां आंखें देखती हैं
हादसे दर हादसे
वहां खूबसूरत ख्वाब देखने की
सोच भला दिमाग में कहा आती
दर्द से लड़ते आंसू सूख गये है जिसके
हादसों पर उसकी हंसी को मजाक नहीं कहना
उसकी बेरुखी को जज्बातों से परे नही समझना
कई लोग रोकर इतना थक [...]

यह शहर धरती का एक टुकड़ा है-व्यंग्य कविता

अपने शहर पर इतना नहीं इतराओ
कि फिर पराये लगने लगें लोग सभी
कभी यह गांव जितना छोटा था
तब न तुम थे यहां
न कोई बाजार था वहां
बाजार बनते बड़ा हुआ
सौदागर आये तो खरीददार भी
गांव से शहर बना तभी
आज शहर की चमकती सड़कों
पर तुम इतना मत इतराओ
बनी हैं यह मजदूरों के पसीने से
लगा है पैसा उन लोगों [...]

अंतहीन सिलसिला -व्यंग्य कविता

एक तलाश पूरी होते ही
आदमी दूसरी में जुट जाता
अंतहीन सिलसिला है
अपने मकसद रोज नये बनाता
पूरे होते ही दूसरे में जुट जाता
भरता जाता अपना घर
पर कीमती समय का जो मिला है खजाना
नहीं देखता उसकी तरफ
जो हर पल लुट जाता
धरती के सामानो से जब उकता जाता
तब घेर लेती बैचेनी
तब चैन पाने के लिये आसमान
की तरफ अपने [...]

पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता

डाइन भी सात घर छोड़कर
कहर बरपाती
अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती
उसकी राह पर चलने वाले असली भक्त
आज भी अपने देश और पडौस को
कहर से बचाने के लिए
दूसरी जगह कहर बरपाते
पर खुद न जाकर
वहीँ के बाशिंदों को लगाते
जो पडौस नहीं अपने ही घर को ही
अपने हाथ से आग लगाकर कर [...]

सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

जब बमों की आवाज से
शहर काँप जाते हैं
बाज़ार में सड़कों पर
फैले खून के दृश्य
आखों के सामने आते हैं
तब बैठने लगता है दिल
लड़खडाने लगती है जुबान
हाथ रुक जाते हैं
तब अपने शब्द लडखडाते नजर आते हैं
लगता है कि कोई
मुस्करा रहा है यह बेबसी देखकर
क्योंकि बुलंद आवाज और
बोलते शब्द उसे पसंद नहीं आते हैं
उसके चेहरे पर [...]

दिवाली की मिठाई के बारे में लोगों को बताएंगे-हास्य कवित

दीपावली मेले में दुकान से
घर सजाने के लिये मिट्टी के बने
कुछ खिलौने खरीदने पर
उनका मिठाई का ध्यान आया तो बोले
‘भईया, तुम्हारे मिट्टी के फल तो
असली लगते हैं
हम इसे अपने ड्रांइग रूम में सजायेंगे
ऐसे ही मिठाई के भी दिखाओ
आजकल विषैले खोये की वजह
से मिठाई खरीदने की हिम्मत नहीं होती
अगर मिल जायें मिठाई के खिलौने तो बहुत [...]

भलाई करने वाला फ़रिश्ता-लघु व्यंग्य

भरी दोपहर में वह इंसान सड़क पर जा रहा था। उसने देखा दूसरा इंसान बिजली के खंबे के नीचे अपने कुछ कागज उल्टे पुल्टे कर रहा था। अचानक वह बड़बड़ा उठा-‘यह बिजली वाले एकदम नकारा हैं। देखों बल्ब भी नहीं जलाकर रखा। खैर, कोई बात नहीं मैं अपने कागज ऐसे ही पढ़कर देखता हूं [...]

क्रिकेट मैच से अधिक अच्छा लगता है ब्लाग/पत्रिका पर लिखना-हास्य व्यंग्य

अब फ़िर क्रिकट प्रतियोगिता शुरू होने की तैयारी हो रही है। अखबारों और टीवी पर उसका धूंआधार प्रचार होते देख एसा लगा कि क्रिकेट अब मुझसे अलविदा कह रही है।
पिछली बार इन्हीं दिनों मैने विश्व कप में भारत के हारने पर एक कविता लिखी थी अलविदा किकेट। उस समय सादा हिंदी फोंट [...]

ऐसे ही खाते हैं कसम-व्यंग्य कविता

नकली घी,खोवा और दूध से
हो रहा है बाज़ार गर्म
दीपावली का जश्न मनाने से पहले
अमृत के नाम पर विष पी जाने के
खौफ से छिद्र हो रहा है मर्म
बिना मिठाई के दीपावली क्या मजा क्या
पर पेट में जो भर दे विकार
ऐसे पेडे भी खाकर बीमार पड़ना क्या
कि जश्न मनाकर जोशीले तेवर
डाक्टर के सख्त सुई से पड़ [...]

इतिहास में सीखने लायक क्या है-हास्य व्यंग्य

लोग कहते हैं कि इतिहास से सीखना चाहिये। किसी को कोई नया काम सीखना होता है तो उससे कहा जाता है पीछे देख आगे बढ़। यह शायद अंग्रेजों द्वारा बताया गया कोई तर्क होगा वरना समझदार आदमी तो आज वर्तमान को देखकर न केवल भूतकाल का बल्कि भविष्य का भी अनुमान कर लेता है [...]

इस तरह सताते भविष्य के सपने-हिंदी शायरी

अतीत के गुजरे पल ही
दिमाग को इस तरह सताते
कि भविष्य के सपने
सामने चले आते
साथ चलता तो है
बस आज का सच
जो बहुत लगता है बहुत कठोर
उससे बचने के लिये
सपनों को ही बुने जाते
अगर सच हो गया तो ठीक
बिखर गया तो उस पर रोना क्या
जिंदगी है इसी का नाम
जिसमें सपनों के दौर आते जाते
……………………………………..
सपनों से जितना करते [...]

व्ही.आई.पी. कहलाने की चाहत-हास्य व्यंग्य

वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अब एक नयी आदत और पाल ली है। वह यह कि कहीं भी अपने को व्ही.आई.पी साबित करो। भले ही झूठमूठ पर यह बताओ कि हमें अमुक स्थान पर हमें व्ही.आई.पी. ट्रीटमेंट [...]

मन की उदासी कहने में डर लगता है-हिंदी शायरी

अपने मन की उदासी
किसी से कहने में डर लगता है
जमाने में फंसा हर आदमी
अपनी हालातों से है खफा
नहीं जानता क्या होती वफा
अपने मन की उदासी को दूर
करने के लिये
दूसरे के दर्द में अपनी
हंसी ढूंढने लगता है
एक बार नहीं हजार बार आजमाया
अपने ही गम पर
जमाने को हंसता पाया
जिन्हें दिया अपने हाथों से
बड़े प्यार से सामान
उन्होंने जमाने [...]

खुद सज जाते हैं हमेशा दूल्हों की तरह-व्यंग्य कविता

लोगों को आपस में
मिलाने के लिये किया हुआ है
उन्होंने शामियानों का इंतजाम
बताते हैं जमाने के लिये उसे
भलाई का काम
खुद सज जाते हैं हमेशा दूल्हों की तरह
अपना नाम लेकर
पढ़वाते हैं कसीदे
उनके मातहत बन जाते सिपहसालार
वह बन जाते बादशाह
बाहर से आया हर इंसान हो जाता आम
जिनको प्यारी है अपनी इज्जत
करते नहीं वहा हुज्जत
जो करते वहां [...]

जो बुत बोल रहे, पराये शब्द और स्वर लेकर डोल रहे-व्यंग्य कविता

हाड़मांस के पुतलों से
हो गये है नाउम्मीद इसलिये
पत्थर के बुत ही पूजना अच्छा लगता
कम से कम उम्मीद के टूटने का भय तो नहीं रहता
पत्थर बोलते नहीं है
पर जो बुत बोल रहे
स्वर उनके जरूर हैं पर
शब्द पराये होकर डोल रहे ं
आखों में जिनके जीवन है
देख रहे हैं दृश्य
पर उसे किसी का दृष्टिकोण उधार लेकर तोल रहे
उनकी [...]

अक्लमंदों के बीच होती है अल्फाजों की जंग-हास्य शायरी

अक्लमंदों की महफिल से इसलिये ही
जल्दी बाहर निकल आये
सभी के पास था अपनी शिकायतों का पुलिंदा
किसी के पास मसलों का हल न था
अपनी बात कहते हुए चिल्ला रहे थे
पर करने का किसी में बल न था
करते वह कोई नई तलाश
उनसे यह उम्मीद करना बेकार था
हर कोई अपना मसले का
बयां करने को ही हर कोई तैयार [...]

अक्ल का इस्तेमाल-लघुकथा

उन्होंने अपनी गाड़ी थोड़ी दूर बनवाई। जब वह मैकनिक को पैसे दे रहे थे तब उनके साथ एक मित्र भी था। अपने आपको स्याना साबित करने के लिये उन्होंने मैकनिक पैसे किच किच कर दिये। जितने उसने मांगे थे उससे कम ही दिये।
जब वहां से निकले तो उन्होंने अपने मित्र से कहा-‘यह लेबर क्लास [...]

कभी तृष्णा तो कभी वितृष्णा-व्यंग्य कविता

कभी तृष्णा तो कभी वितृष्णा
मन चला जाता है वहीं इंसान जाता
जब सिमटता है दायरों में ख्याल
अपनों पर ही होता है मन निहाल
इतनी बड़ी दुनिया के होने बोध नहीं रह जाता
किसी नये की तरह नजर नहीं जाती
पुरानों के आसपास घूमते ही
छोटी कैद में ही रह जाता
अपने पास आते लोगों में
प्यार पाने के ख्वाब देखता
वक्त और काम [...]

कहीं शय तो कहीं आदमी बिक जाता है-व्यंग्य कविता

दिन के उजाले में
लगता है बाजार
कहीं शय तो कहीं आदमी
बिक जाता है
पैसा हो जेब में तो
आदमी ही खरीददार हो जाता है
चारों तरफ फैला शोर
कोई किसकी सुन पाता है
कोई खड़ा बाजार में खरीददार बनकर
कोई बिकने के इंतजार में बेसब्र हो जाता है
भीड़ में आदमी ढूंढता है सुख
सौदे में अपना देखता अस्त्तिव
भ्रम से भला कौन मुक्त [...]

रोटी का इंसान से बहुत गहरा है रिश्ता-हिंदी शायरी

पापी पेट का है सवाल
इसलिये रोटी पर मचा रहता है
इस दुनियां में हमेशा बवाल
थाली में रोटी सजती हैं
तो फिर चाहिये मक्खनी दाल
नाक तक रोटी भर जाये
फिर उठता है अगले वक्त की रोटी का सवाल
पेट भरकर फिर खाली हो जाता है
रोटी का थाल फिर सजकर आता है
पर रोटी से इंसान का दिल कभी नहीं [...]

सड़क ने प्यार से जुदा करा दिया-हास्य व्यंग्य कविता

बहुत दिन बाद प्रेमी आया
अपने शहर
और उसने अपनी प्रेमिका से की भेंट
मोटर साइकिल पर बैठाकर किक लगाई
चल पड़े दोनों सैर सपाटे पर
फिर बरसात के मौसम में सड़क
अपनी जगह से नदारत पाई
कभी ऊपर तो कभी नीचे
बल खाती हुई चल रही गाड़ी ने
दोनों से खूब ठुमके लगवाये
प्रेमिका की कमर में पीड़ा उभर आई
परेशान होते ही उसने
आगे चलने [...]

लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पाते हैं। देखने में भक्त और साधु किस्म के लोग भी इस बीमारी से उतने ही ग्रस्त होते हैं जितने सामान्य लोग। अगर कहीं चार लोगों के बीच चर्चा करो तो वहां अनुपस्थित व्यक्ति की [...]

सौदा होता है सब जगह-व्यंग्य कविता

दिन के उजाले में
लगता है बाजार
कहीं शय तो कहीं आदमी
बिक जाता है
पैसा हो जेब में तो
आदमी ही खरीददार हो जाता है
चारों तरफ फैला शोर
कोई किसकी सुन पाता है
कोई खड़ा बाजार में खरीददार बनकर
कोई बिकने के इंतजार में बेसब्र हो जाता है
भीड़ में आदमी ढूंढता है सुख
सौदे में अपना देखता अपना अस्त्तिव
भ्रम से भला कौन मुक्त [...]

क्या सामान्य ब्लाग लेखकों का कोई धणीसांईं नहीं हैं-संपादकीय

आज यह ब्लाग बीस हजार की पाठक संख्या पार कर गया। यह संख्या पार करने वाला यह चैथा ब्लाग है। अगर वर्डप्रेस के ब्लागों की कुल संख्या को ही देखा जाये तो वह 135000 के करीब है और मेरा मानना है कि ब्लाग स्पाट के ब्लाग भी करीब 40-50 हजार के पाठक तो जुटा ही [...]

पाठक संख्या बीस हजार पार करने की पूर्व संध्या पर कविता

मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे में जानना चाहते हैं पर मेरी दिलचस्पी केवल अपने शब्द लेखन तक ही सीमित है। कल मेरा यह ब्लाग बीस हजार की पाठक संख्या पार कर सकता है। दरअसल लोगों का प्यार इतना है कि [...]

अकेलापन-हिंदी शायरी

जब याद आती है अकेले में किसी की
खत्म हो जाता है एकांत
जिन्हें भूलने की कोशिश करो
उतना ही मन होता क्लांत
धीमे-धीमे चलती शीतल पवन
लहराते हुए पेड़ के पतों से खिलता चमन
पर अकेलेपन की चाहत में
बैठे होते उसका आनंद
जब किसी का चेहरा मन में घुमड़ता
हो जाता अशांत
अकेले में मौसम का मजा लेने के लिये
मन ही मन किलकारियां [...]

दूसरे के दर्द में अपनी तसल्ली ढूंढता आदमी-हिंदी शायरी

शहर-दर-शहर घूमता रहा

इंसानों में इंसान का रूप ढूंढता रहा

चेहरे और पहनावे एक जैसे

पर करते हैं फर्क एक दूसरे को देखते

आपस में ही एक दूसरे से

अपने बदन को रबड़ की तरह खींचते

हर पल अपनी मुट्ठियां भींचते

अपने फायदे के लिये सब जागते मिले

नहीं तो हर शख्स ऊंघता रहा

अपनी दौलत और शौहरत का

नशा है

इतराते भी [...]

आओ लिखें-छटांक भर कविता

सागर की लहरे कितनी पास हों
किसी की प्यास नहीं बुझती
गागर की बूंदें ही काम आयें
दस दिशाऐं हैं धरती पर
जब चलें पांव एक ही दिशा में जायें
हाथी बड़ा बहुत है
महावत उस पर अंकुश की नौक से काबू पायें
बड़ा होने से क्या होता है
अगर कोई जमाने के का काम का न हो
छोटा है मजदूर तो क्या
उसी हाथ [...]

दिल के मचे तूफानों का कौन पता लगा सकता ह-हिन्दी शायरी

मोहब्बत में साथ चलते हुए
सफर हो जाते आसान
नहीं होता पांव में पड़े
छालों के दर्द का भान
पर समय भी होता है बलवान
दिल के मचे तूफानों का
कौन पता लगा सकता है
जो वहां रखी हमदर्द की तस्वीर भी
उड़ा ले जाते हैं
खाली पड़ी जगह पर जवाब नहीं होते
जो सवालों को दिये जायें
वहां रह जाते हैं बस जख्मों के निशान
……………………………
जब [...]

उनके लिये जज्बात ही होते व्यापार-हिन्दी शायरी

कुछ लोग कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार
अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम
लुटते हैं लोगों की संवेदना और प्यार
छद्म आंसू बहाते
कभी कभी दर्द से दिखते मुस्कराते
डाल दे झोली में कोई तोहफा
तो पलट कर फिर नहीं देखते
उनके लिये जज्बात ही होते व्यापार
घर हो या बाहर
अपनी ताकत और पराक्रम पर
इस जहां में जीने से [...]

हिट की परवाह की तो ब्लाग पर लिखना कठिन होगा-संपादकीय

अंतर्जाल वाकई एक बहुत बड़ा मायाजाल है। हिंदी के समस्त ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों पर आपस में संपर्क रखने की जो सुविधा है वह एक अनूठी है। जिन लोगोंे ने नारद फोरम के साथ अपने ब्लाग जीवन की शुरुआत की है वह उसे भूल नहीं सकते। वहां पर दूसरों को हिट और [...]

इश्क पर लिखते हैं, मुश्क कसते हैं शायर-हास्य व्यंग्य कविता

अपने साथ भतीजे को भी
फंदेबाज घर लाया और बोला
‘दीपक बापू, इसकी सगाई हुई है
मंगेतर से रोज होती मोबाइल पर बात
पर अब बात लगी है बिगड़ने
उसने कहा है इससे कि एक ‘प्रेमपत्र लिख कर भेजो
तो जानूं कि तुम पढ़े लिखे
नहीं भेजा तो समझूंगी गंवार हो
तो पर सकता है रिश्ते में खटास’
अब आप ही से हम [...]

भला कहां हमें कच्चे धागों का बंधन निभाना है-हास्य कविता

उसने घर में घुसते ही
अपने चारों मोबाइल का स्विच आफ कर
अल्मारी में रख दिये
फिर अपनी टांगें सोफे पर फैलाई
पास ही बैठा देख रहा था छोटा भाई
उसने बड़े भाई से पूछा
‘यह क्या किया
जान से प्यारे
मोबाइलों का स्विच आफ किया
सभी को अल्मारी की कैद में डाल दिया
अब वह चारों जानूं जानूं कहकर
किसे पुकारेंगी
बैठे तुम्हारे [...]

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