Author Archive: दीपक भारतदीप

उम्मीद और वफा-हिन्दी शायरी

हमने देखा उनकी तरफ बड़ी उम्मीद के साथ शायद वह हमारी जिंदगी में कभी बहार लायेंगे, दोष हमारा ही था कि बिना मतलब के उनका साथ निभाया, उनमें वफा करने की कला है कि नहीं यह जाने बिना जरूरत से ज्यादा अपनी सादगी का रूप दिखाया, फिर भी भरोसा है कि इस भटकाव में भी [...]

इश्क़ नहीं है आसान-हिन्दी व्यंग्य कविता

इश्क आसान है अगर दिल से करना जानो तो जिस्म से ज्यादा रूह को मानो तो जहां कुछ पाने की ख्वाहिश पाली दिल में सौदागरों के चंगुल में फंस जाओगे। कहें दीपक बापू कोई दौलत पाता है, कोई उसे गँवाता है, सिक्कों के खेल में किसका पेट भरता है, आम इंसान की ज़िंदगी कभी कहानी [...]

दिल से बाहर-हिन्दी कविता

अब अपने दिल के घर से बाहर आकर न हम रोते न हँसते हैं, पर्दे पर चलते अफसाने देखते देखते हो गए इस जहान के लोग हर पल प्रपंच रचने के आदी हम उनके जाल में यूं नहीं फँसते हैं। कहें दीपक बापू फिल्म की पटकथाएँ और टीवी धारावाहिकों की कथाएँ ले उड़ जाती हैं [...]

हँसते नगमे दिल पर परचम फहराते-हिन्दी कविता

पत्थरों के खेल होते हैं मगर वह जीते नहीं जाते, कुछ घायल होते कुछ बेमौत मर जाते। कहें दीपक बापू आओ चंद शब्द मन में दुहराएँ, कलम से होते जो कागज पर उतार आयें, इंसान खुशनसीब है भाषा मिली है बोलने के वास्ते, क्यों चुने फिर पत्थर के रास्ते, जज़्बातों में कुब्बत हो तो दहशत [...]

बात का बतंगड़ बन जाता है-हिन्दी शायरियाँ

खत अब हम कहाँ लिखते हैं, जज़्बातों को फोन पर बस यूं ही फेंकते दिखते हैं। कहें दीपक बापू बोलने में बह गया ख्यालों का दरिया खाली खोपड़ी में लफ्जों का पड़ गया है अकाल आवाज़ों में टूटे बोल जोड़ते दिखते हैं। —————- इस जहां में लोगों से क्या बात करें पहले अपनी रूह की [...]

भीड़ और तन्हाई-हिन्दी शायरियाँ

भीड़ का शोरशराबा देखकर अब अपनी तन्हाई की तड़प नहीं सताती है, कहें दीपक बापू अकेलेपर से घबड़ाये लोग ढूंढते हैं मेलों में खुशी का सामान खरीदते ही हो जाता जो पुराना फिर दौड़ते हैं दूसरी के लिये उम्र उनकी भी ऐसे ही तड़पते बीत जाती है ……………………………… उन दोस्तों के लिये क्या कहें जिनसे [...]

याचक और स्वामी -हिन्दी हाइकु (yachak-hindi haiku)

उनके पेट कभी नहीं भरेंगे जहरीले हैं, रोटी की लूट सारे राह करेंगे जेब के लिए, मीठे बोल हैं पर अर्थ चुभते वे कंटीले हैं। ————– फिर आएंगे वह याचक बन कुछ मांगेंगे, दान लेकर वह होंगे स्वामी हम ताकेंगे, हम सोएँ हैं बरसों से निद्रा में कब जागेंगे, सेवक कह वह शासक होते भूख [...]

नया आईडिया-लघु हिन्दी हास्य व्यंग्य (new idea-laghu hindi hasya vyangya or short comic satire article)

     उस्ताद ने शागिर्द से कहा-”मेरी तौंद बहुत बढ़ गई है, इसे कम करना होगा, वरना लोग मेरे उपदेशों पर यकीन नहीं करेंगे जिसमें मैं उनको कम खाने गम खाने और कसरत करो तंदुरुस्ती पाओ जैसी बातें कहता हूँ। आजकल मोटे लोगों को कोई पसंद नहीं करता, नयी पीढ़ी के लड़के लड़कियां मोटे लोगों को [...]

खामोश बहस जारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

खामोश कमरे के अंदर इस जहान के सारे खलीफा बहस मेँ व्यस्त हैं मुद्दा यह है कि अलग अलग तरीके के हादसों पर बयान किस तरह बदल बदल कर दिये जाएँ हमलावरों को डरने की जरूरत नहीं है उनके खिलाफ कार्रवाई का बयान आयेगा मगर करेगा कौन यह तय कभी नहीं होगा। —————— इंतज़ार करो [...]

दाम और दिल-हिन्दी हाइकु

सुंदरता की पहचान किसे है सभी भ्रमित, दरियादिली किसे कैसे दिखाएँ सभी याचक, वफा का गुण कौन पहचानेगा सभी गद्दार, खाक जहाँ में फूलों की कद्र कहाँ सांस मुर्दा है, बेहतर है अपनी नज़रों से देखते रहें, खुद की कब्र खोदते हुए लोग तंगदिली में, भरोसा तोड़ा जिन्होने खुद से ढूंढते वफा, उन चीजों में [...]

समय गुजर जाता है-नववर्ष पर हास्य कविता और शायरी (samay gujar jaata hai-hasya kavita or poem and shayri on navvarsh or new year)

 वह बोले “दीपक बापू नव वर्ष की बधाई, उम्मीद है इस साल आप सफल हास्य कवि  हो जाओगे, फिर हमें जरूर दारू पिलाओगे।” दीपक बापू बोले “आपको भी बधाई पर हम ज़रा गणित में कमजोर हैं, भले ही शब्दों के  सिरमोर हैं, यह कौनसा साल शुरू हुआ है आप हमें बताओगे।” वह तिलमिला उठे और [...]

खुद के सच से आँखें फेर जाते हैं-हिन्दी शायरी (khud ke sach se aankhen fer jaate hain-hindi shayri)

न वह दिल के पास हैं न उनके कदम कभी हमारे घर की ओर बढ़ते नज़र आते हैं, कहें दीपक बापू उनसे दोस्ती का दम क्या भरें जिनकी वफा पर लगे ढेर सारे दाग दिखते हैं जहां को मगर वह खूबसूरती से खुद के  सच से ही आँखें फेर जाते हैं। कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक [...]

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-वस्तु छिन जाने का दुःख ज्ञान से ही शांत होता है (kautilya ka arthshastra-vastu aur Gyan)

       क्रोध के दुर्गुण से निपटने का उपाय अपने अंदर सहनशीलता का गुण पैदा करना ही है। जहां दो लोग आपस में क्रोध करते हैं उनका मन और बुद्धि संतप्त हो जाती है। अंततः वह स्वयं को ही ही हानि पहुंचाते हैं। अगर हम हिंसक घटनाओं को देखें तो लोगों पर तरस आता है। छोटी [...]

निजी क्षेत्र में भी प्रबंध कौशल की समस्या रहेगी-हिन्दी लेख

            कलकत्ता के ए.एम.आर.आई अस्पताल (AMRi culcutta hospital) में करीब 90 लोगों की मौत हो चुकी है। अगर प्रचार माध्यमों के इससे जुड़े समाचारों पर यकीन किया जाये तो कुछ लोग अभी भी अपने परिजनों को ढूंढ रहे है जिस कारण यह संख्या अधिक भी हो सकती है। हम इस हादसे में हताहत लोगों के [...]

आम आदमी और कार्टून-हिन्दी हास्य कविताएँ (aam aadmi aur cartoon-hindi comic poem’s or hasya kavitaen)

बहुत मुद्दो पर बहस टीवी चैनलों पर चलती है, अखबारों में समाचारों के साथ संपादकीय भी लिखे जाते हैं, बरसों से मसले वहीं के वहीं हैं, बस, चर्चाकार बदल जाते हैं। लगता है आम आदमी इसी तरह बेबस होकर कार्टूनों में खड़ा रहेगा जिसकी समस्याओं के हल के लिये रोज रोज बनती हैं नीतियां कभी [...]

विदेशी खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश का व्यापार-हिन्दी लेख (khudara vyapar mein videsh nivesh, forein investment fdi in bhartiya market-hindi article or lekh)

        खेरिज किराना व्यापार में विदेशी निवेश लाने के फैसले पर देश में बवाल बचा है और इस पर बहस हो रही है। एक आम लेखक और नागरिक के रूप में हमें इस फैसले के विरोध या समर्थन करने की शक्ति नहीं रखते हैं क्योंकि इस निर्णय तो शिखर पुरुषों को करना होता है। साथ [...]

गुलाम बुत-हिन्दी कविता (gulam but-hindi kavita)

पत्थर के देवता पूजने पर अफसोस नहीं होता, क्योंकि देवताओं को पूजने वाले इंसान अब पत्थरों जैसे हो गए, दौलत, शोहरत और हुकूमत के गुलाम लोग बुतों की तरह खड़े नज़र आते हैं, अपनी भलाई और कमाई तक मतलब रखते फिर मुंह फेर जाते हैं, पत्थरों को पूजने का अफसोस नहीं होता मालूम है कि [...]

हैरान लोग-हिन्दी कविता

मेरे दिल में न खुशी है न कोई गम है अपनी हालातों से परेशान लोग हैरान है यह देखकर यह कभी रोता नहीं कभी हंसता भी नहीं बिचारे नहीं जानते बाज़ार में बिकने वाले जज़्बात मैंने खरीदना छोड़ दिया है, इंसानों के फरिश्ते होने की उम्मीद कभी नहीं करता अपनी रूह से दिमाग का अटूट [...]

ज़िंदगी की खुशिया और गम-हिन्दी कविता (Zindagi ki khushi aur gam-hindi poem

आओ कुछ सपने देखें अपने घर खुशियाँ आने की गम तो पल पल मिल जाते हैं ज़माने में, दूसरों को दर्द देना आसान है वक्त लगता हैं बहुत किसी को हंसाने में, कहैं दीपक बापू कागज के घर बनाने में गुजर जाती है जिंदगी पल लगता है उसे जलाने में.

गम और मुस्कराहट-हिन्दी कविता

आओ कुछ सपने देखें अपने घर खुशियाँ आने की गम तो पल पल मिल जाते हैं ज़माने में, दूसरों को दर्द देना आसान है वक्त लगता हैं बहुत किसी को हंसाने में, कहैं दीपक बापू कागज के घर बनाने में गुजर जाती है जिंदगी पल लगता है उसे जलाने में.

गरीबी और विकास दर-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ (garibi aur vikas dar-hindi vyangya kavitaen)

अपने घर में सोने के भंडार तुम भरवाते रहो, गरीब इंसान की रोटी से टुकड़ा टुकड़ा कर चुरवाते रहो, जब तक बैठे हो महलों में झौंपड़ियों को उजड़वाते रहो। यह ज्यादा नहीं चलेगा, ज़माने की भलाई करने के नाम पर सिंहासनों पर बुत बनकर बैठे लोगों सुनो जरा यह भी किसी दिन इतिहास अपना रुख [...]

समाज सेवा का धंधा-हिन्दी हास्य कविता (samaj seva ka dhandha-hindi hasya kavita

समाज सेवक की पत्नी ने कहा ‘‘सुनते हो जी! आज नौकर छुट्टी पर गया है तुम थैला लेकर जाओ, उसमें आलु, टमाटर और धनिया खरीद कर लाना जब घर वापस आओ।’’ समाज सेवक ने कहा ‘‘अभी तक तुम्हारे मस्तिष्क का विकास हुआ नहीं है, घर पर खाना जरूरी है क्या मेरे साथ चलो जहां में [...]

देश फिर भी अपना कमाकर खायेगा-हिन्दी व्यंग्य कविता (desh fir bhi kamakar khayega-hindi vyangya kavita)

यह खौफ क्यों सताता है तुमको कि देश बिक जायेगा कमबख्त, पहले लुटेरे खुद लूटने आये इस देश का खजाना, देश फिर भी फलाफूला हो गये वह अपने देश रवाना, अब उनके दलाल कमाकर दलाली जमा कर रहे लुटेरों के घर दौलत, फिर उसे उधार लेकर आते हैं, ब्याज भी यहीं से कमाते हैं अपने [...]

महात्मा गांधी का दर्शन भी निरापद नहीं-गांधी जयंती पर विशेष हिन्दी लेख (mahatma gandhi ka darshan aur bharat-special article on gandhi jaynati)

         दो अक्टोबर देश में गांधी जयंती मनाई जायेगी। प्रसंगवश इस दिन भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री का भी जन्म दिन मनाया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इतिहास में किसी भी महापुरुष का नाम बिना किसी योग्यता, कठिन परिश्रम या त्याग के दर्ज नहीं होता पर यह भी सत्य है कि [...]

नजारों की असलियत-हिन्दी कविता (nazaron ki asaliyat-hindi kavita or hindi poem)

पुराने सामान रंगने के बाद भी बिकने के लिये बाज़ार में सज जाते हैं, बूढ़े चेहरे भी पुतकर क्रीम से आते पर्दे पर लोगों के हाथ उनकी तारीफ में बज जाते हैं, ज़माने ने आंखें भले खोलकर रखी हैं, मगर सभी के नजरिये पर ताले लग जाते हैं। ……………………… आंखें खुली हों मगर दिमाग बंद [...]

हिंदी भाषा का महत्व और गरीब-हिन्दी व्यंग्य (hindi ka mahtav aur garib-hindi vyangya)

                14 सितंबर 2011 बुधवार को हिन्दी दिवस मनाया जाने वाला है। इस अवसर पर देश में हिन्दी बोलो, हिन्दी सुनो और हिन्दी समझो जैसे भाव का बोध कराने वाले परंपरागत नारे सुनने को मिलेंगे। प्रचार माध्यम बतायेंगे कि हिन्दी अपने देश में ही उपेक्षित है। हिन्दी को निरीह गाय की तरह देखा जायेगा भले [...]

हर कोई मतलब का सगा है-हिन्दी शायरी (har koyee matalab ka saga hai-hindi shayari

क्यों उम्मीद करते हो उन लोगों से जो हुकूमत का पहाड़ चढ़ने के लिए तुमसे पाँव उधार मांगने आते हैं, बताओ ज़रा यह कि जिनके सिर आसमान में टंगे हैं चमकते सितारों की तरह उनकी आँखों को नीचे के बदसूरत नज़ारे कब नज़र आते हैं। ———– जब से सीखा है कौवे से किसी दूसरे पर [...]

अन्ना हजारे (अण्णा हजारे) और बाबा रामदेव के आंदोलन और टीवी चैनलों के विज्ञापन (movement of anna hazare and baba ramdev and TV edvertisement-hindi lekh)

        अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलनों पर टीवी समाचार चैनलों और समाचार पत्रों में इतना प्रचार होता है कि अन्य विषय दबकर रह जाते हैं। एक दो दिन तक तो ठीक है पर दूसरे दिन बोरियत होने लगती है। इसमें     कोई संदेह नहीं है कि जब जब इस तरह के आंदोलन चरम पर [...]

फरिश्ते जनभक्षी हो गए–हिन्दी व्यंग्य शायरियाँ

जन जन के भले की बात करते हुए कई फरिश्ते जनभक्षी हो गए हैं, दाने खिलाने के लिए हाथ फैलाते हैं जिनको खिलाने के लिए वही जन उनके लिए शिकार करने वाले पक्षी हो गए हैं। ———————– नरभक्षियों का समय गया अब खतरा जनभक्षियों का हो गया है, चेहरे काले नहीं खूबसूरत हैं, हाथों में [...]

आजादी दिवस की छूट-स्वतंत्रता दिवस पर हिन्दी हास्य कविता (azadi divas par riyayat-hindi hasya kavita)

कुछ लोगों ने अपनों को गुलाम रखने की स्वतंत्रता पाई है, वरना तो अपने आकाओं की अभी भी बजा रहे हैं बस! केवल स्वतंत्रता दिवस हर साल मनाने की छूट उन्होंने पाई है। ——- कहते हैं कि अंग्रेज छोड़ गये पर अपनी अंग्रेजियत छोड़ गये हैं, यही कारण है कि गुलामों के सरदार आज भी [...]

चमकते सितारे बदसूरत नज़ारे-हिन्दी कविता

क्यों उम्मीद करते हो उन लोगों से जो हुकूमत का पहाड़ चढ़ने के लिए तुमसे पाँव उधार मांगने आते हैं, बताओ ज़रा यह कि जिनके सिर आसमान में टंगे हैं चमकते सितारों की तरह उनकी आँखों को नीचे के बदसूरत नज़ारे कब नज़र आते हैं। ———– जब से सीखा है कौवे से किसी दूसरे पर [...]

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-जुआ और शराब मनुष्य का नाश करते हैं

            यह प्रकृति की महिमा है कि मनुष्य का ध्यान व्यसनों की तरफ बहुत आसानी से चला जाता है। इसमें मद्यपान तथा जुआ दो ऐसे व्यसन हैं जो आदमी के तन, मन और धन की क्षति करते हैं पर फिर भी वह इसे अपनाता है। यह सही है कि सारे संसार में लोग एक जैसे [...]

अपनी जुबान-हिन्दी शायरी

अपना दर्द बयान करते करते हमारी जुबां थक गयी पर पता नहीं गले तक मुसीबत में डूबे इस जहां में किसी ने सुना कि नहीं, लोगों के कान खुले दिखते हैं मगर अपनी बात आप ही सुनते दूसरे का स्वर पहचानते हों यह लगता नहीं, हो सकता है हमारी आवाज ही बेअसर हो कहीं या [...]

मशविरों के चिराग-हिन्दी हास्य कविताएँ (mashviron ke chirag-hindi comic poem’s

घायल का दर्द हो चाहे टूटे आशिक का गम हो बाज़ार के लिए कमाए का जरिया है, लोगों के आँखों के सामने पर्दे पर  नज़ारे मुफ्त में नहीं चलते, चीजों को खरीदने के मशविरों के चिराग भी साथ जलते, दौलतमंदों के घर की खुशियां हों चाहे नटों के जन्मदिन बन जाता है हर समय कमाई [...]

धंधे के आंसु-हिन्दी कविता

 आओ कुछ लोगों को दूसरे के  क़सूरों पर चिल्लाते देखें, अपने दोनों हाथ मदद के लिए लुटेरों के सामने उठाते देखें। किसी के गम से हमदर्दी नहीं है जिनको धंधे के आँसू वही बहाते हैं, इसी तरह हमदर्द कहलाते हैं, अपने कदमों को बढ़ाते वह  तेजी  से तब आकाओं से इशारा मिलता जब, आओ अपनी [...]

बचपन और पचपन-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

हिसाब किताब में जिंदगी का खेल लोग यूं ही खेलते जाते हैं, ज्ञान का संदेश सुने या माया के अंक गुने बीच रास्ते पर चलते हुए इसलिये सर्वशक्तिमान का नाम भी गिन गिनकर लिये जाते हैं। ———- एक बंदे ने दूसरे बंदे से पूछा ‘सर्वशक्तिमान का नाम माला फिराते हुए क्यों लेते हो, क्या डर [...]

नाम और गिनती-हास्य कविताएँ

हिसाब किताब में जिंदगी का खेल लोग यूं ही खेलते जाते हैं, ज्ञान का संदेश सुने या माया के अंक गुने बीच रास्ते पर चलते हुए इसलिये सर्वशक्तिमान का नाम भी गिन गिनकर लिये जाते हैं। ———- एक बंदे ने दूसरे बंदे से पूछा ‘सर्वशक्तिमान का नाम माला फिराते हुए क्यों लेते हो, क्या डर [...]

त्रावनकोर (त्रावणकोर) के स्वामी पद्मनाभ मंदिर का खजाना और भारत का आम आदमी-हिन्दी लेख (travancor ke swami padmanabh mandir ka khazana aur bharat ka aam aadmi-hindi lekh)

           केरल ट्रावनकोर में स्वामी पद्मनाभ मंदिर में खजाना मिलने की घटना इस विश्व का आठवां आश्चर्य मानना चाहिए। आमतौर से भारत में गढ़े खजाने होने की बात अक्सर कही जाती है। अनेक सिद्ध तो इसलिये ही माने जाते हैं कि वह गढ़े खजाने का पता बताते हैं। यह अलग बात है कि वह अपने [...]

बड़े लोग और आम इंसान-हिन्दी कविता (bade log aur aam insan-hindi kavita)

पहले अपनी फिक्र और फिर अपनों की चिंता में बड़े लोग महान बनते जा रहे हैंे, कहीं पूरी बस्ती कहीं पूरे शहर खास पहचान लिये इमारतों से तनते जा रहे हैं। वहां बेबस और लाचार आम इंसान का प्रवेश बंद है, हर आंख पसरी है उनके लिये जिनके पास सोने के सिक्के चंद हैं, दब [...]

अच्छे काम का जिम्मा दूसरों पर डालने की आदत-हिन्दी व्यंग्य चिंत्तन (accha kam ka jimma-hindi vyangya lekh)

      सब चाहते हैं कि कोई भगतसिंह बनकर भ्रष्टाचार का सफाया करे पर हमारे कार्य और व्यापार निरंतर सामान्य गति के साथ अपनी यथास्थिति मे चलता रहे। माननीय शहीद भगतसिंह का पूरा देश सम्मान करता है पर सच यह है कि इस देश में लड़ने की ताकत अब उन लोगों में नहीं है जिनसे यह [...]

शायद कोई हालात बदल दे-हिंदी कविता(shayad koyee halat badal de-hindi poem

जमाने को बदल देंगे यह ख्याल अच्छा है पर कोई चाबुक नहीं किसी इंसान के पास जिससे दूसरे का ख्याल बदल दे। अमीरी खूंखार ख्याल लाती है, कहर बरपाने के कदमों में ताकत का सबूत पाती है, गरीबी मदद के लिये भटकाती है इधर से उधर, दरियादिली के इंतजार में खड़े टूटे घर, न बदलती [...]

आपसी द्वन्द्व-हिन्दी कविताएँ

अब मंच और पर्दे के नाटक नहीं किसी को भाते हैं, खबरों के लिए होने वाले प्रायोजित आंदोलन और अनशन ही मनोरंजन खूब कर जाते हैं। —————— हर मुद्दे पर उन्होने समर्थन और विरोध की अपनी भूमिका तय कर ली है, उनके आपसी द्वन्द्व के पर्दे पर चलते हुए दृश्य को देखकर कभी व्यथित न [...]

बिना ‘एक्शन’ के योग साधना लोगों को प्रभाहीन लगती है-हिन्दी लेख (yog sadhna without action no popular-hindi lekh)

              बाबा रामदेव अब राष्ट्रीय प्रचार पटल से एकदम गायब है। अपना अनशन तोड़ने के बाद वह फिर लोगों के सम्मुख नहीं आये। एक अध्यात्मिक योगी के लिये राजयोग करना कोई आसान नहीं है यह अब समझ में आने लगा है। अगर कोई योगी राजयोग करने पर आमदा हो ही जाता है तो समझ लेना [...]

छीनने से सिंहासन नहीं मिल जाता-हिन्दी व्यंग्य कविता

तेल उधार लेकर घर के चिराग न जलाएँ, मांगी मिठाई से दिवाली न मनाएँ, अँधेरों में जीना, जुबान चाहे मांगे स्वाद अपने होंठ भूख से सीना, वरना गुड़ बनकर अमीरों के हत्थे चढ़ जाओगे। फिर गुलामी की जज़ीरों से लड़ते रहोगे आज़ादी के लिए छटपटाओगे। ————– मांगने से मिलती नहीं अमीरी छीनने से सिंहासन नहीं [...]

पहले लिखी आंदोलन की पटकथा-हिन्दी व्यंग्य कविता

अब मंच और पर्दे के नाटक नहीं किसी को भाते हैं, खबरों के लिए होने वाले प्रायोजित आंदोलन और अनशन ही मनोरंजन खूब कर जाते हैं। —————— हर मुद्दे पर उन्होने समर्थन और विरोध की अपनी भूमिका तय कर ली है, उनके आपसी द्वन्द्व के पर्दे पर चलते हुए दृश्य को देखकर कभी व्यथित न [...]

कब तब छिपोगे दूसरों के दर्द से-हिन्दी साहित्यक कवितायें

तुम सुनना नहीं चाहते, पर तुम्हारे कान बंद करने से जमाने के लोगों की दर्दीली आवाज बंद नहीं हो जायेगी, देखना नहीं चाहते किसी की पीड़ा, पर आंखें बंद करने से लोगों के जिस्म की भूख, केवल वादों से नहीं मिट जायेगी,  चाहे जब छिप जाओ तुम वातानुकूलित कमरों में बाहर की आग और आंधी [...]

प्रकृति से निरंतर जुड़े रहना जरूरी-चिंत्तन लेख (nature and man-hindi thought article)

                किसी भी इमारत का-चाहे वह महल हो या मकान या झौंपड़ी-फर्श हो वह सीमेंट, मुजाइक,, संगममरमर, टाइल्स, पत्थर या मार्बल का हो सकता है जिसे देखने का शहरी आदमी आदी हो गया है और जिसकी वजह से लोग प्राकृतिक घास पर चलना ही भूल गये हैं। अगर कोई आदमी प्रकृति से दूर है तो [...]

यह आजादी-हिन्दी हाइकु (yah azadi-hindi hiq)

भ्रष्टाचार जिंदगी का हिस्सा बन गया है, उठता दर्द जब मौका न होता अपने पास, दुख यह है कोई धनी होकर तन गया है। ——– गैरों ने लूटा परवाह नहीं थी गुलाम जो थे, यह आजादी अपनों ने पाई है लूट वास्ते नये कातिल रचते इतिहास हाथ खुले हैं, कब्र में दर्ज लगते है पुराने [...]

समाज सेवा से पहले आप सेवा-हिन्दी हास्य कविता (self service not social servic-hindi hasya kavita

देशभक्ति और जनकल्याण का जिम्मा उठाया किसने, अपने पेट और बैंक में जमा अपनी रकम के आंकड़े बढ़ाने की कसम खाई जिसने। ———- कमरे के बाहर लगा दिया उन्होंने ‘समाज सेवा’ का बोर्ड अंदर काम घिनौने करने लगे, जमाना भी अक्ल का अंधा लोग केवल नारे पर ही यकीन कर वाह वाह का शोर भरने [...]

हास्य कविता-मिलन के बाद विरह का इंतजार (hasya kavita-vivah ke bad virah ka intajar)

टीवी पत्रकार ने कहा अपने संपादक से ‘सर, आप देखिए मैंने राजघराने के राजकुमार के विवाह प्रसंग को कितनी अच्छी तरह अपने चैनल पर चलाया, ढेर सारे विज्ञापन चलते रहे, लोगों के मन में स्वयं और औलादों की ऐसी ही शादी के सपने मन ही मन पलते रहे, हमने भी लिया विदेशी चैनलों से सारा [...]

श्रीमद्भागवत गीता से समझा जा सकता है समाजवाद का रूप-मज़दूर दिवस पर हिन्दी लेख (shri madbhawat gita aur soscilism-mazdoor diwas, divas or may day par vishesh lekh)

           भारत में मजदूर दिवस मनाने की कोई परंपरा नहीं है, अलबत्ता यहां विश्वकर्मा जयंती मानी जाती है जिसे करीब करीब इसी तरह का ही माना जा सकता है।  हमारे देश  में  विश्वकर्मा जी को ही श्रम शक्ति का देवता मन जाता है।  हमारा  अध्यात्मिक दर्शन   पाश्चात्य सभ्यता द्वारा प्रदाय अधिकतर दिवसों [...]

छोटी हास्य कविताएँ-क्रिकेट धर्म बन गया है (chhoti hasya kavitaen-crickt dharma banaa)

इंडिया में क्रिकेट भी एक धर्म है प्रचारक जी ने बताया, मगर फिक्सिंग की इसमें कैसी परंपरा है यह नहीं समझाया। ——— क्रिकेट वह धर्म है जिसमें खेलने से पहले खिलाड़ी बाज़ार में नीलाम होते हैं, सट्टा लगाने पर मिलता है प्रसाद कोई होता भी है इसमें बरबाद जीतने से ज्यादा हारने पर आमादा क्रिकेट [...]

लोग रहे हमेशा खाली हाथ-हिन्दी व्यंग्य कविता

भ्रष्टाचार शायद मिट जायेगा,देश में जंग जारी है, कीचड़ का हथियार लिये खड़े योद्धा,जोश भारी है। यकीन नहीं एक दूसरे पर, फिर भी साथ साथ हैं, कर्मवीरों का जंग के नाम पर धोखा देना जारी है। चारों तरफ फैलाये घृणा का भाव, वाणी वाचाल है दौलत की कीचड़ में, सज्जनता की खोज जारी है। भ्रष्टाचार [...]

विकास से दैहिक जलीय विसर्जन अवरुद्ध-हिन्दी व्यंग्य चिंत्तन

               गोलगप्पे वाले का स्टिंग आपरेशन कर उस छात्रा ने कमाल ही कर दिया। गोलगप्पे या पानी पुड़ी ठेले पर बेचने वाला वह शख्स अपना मुंह दिखाने लायक नहीं रहा होगा। हुआ यह कि वह लोगों की नज़रे बचाकर उस लोटे में पेशाब कर रहा था जिससे उसके ग्राहक पानी पीते है। दूरदृश्यों में उसका [...]

नववर्ष विक्रम संवत् 2068 प्रारंभ-अध्यात्मिक दर्शन पर आत्म मंथन करें

आज से नववर्ष विक्रम संवत् 2068 प्रारंभ हो गया है। चूंकि हमारा राजकीय कैलेंडर ईसवी सन् से चलता है इसलिये नयी पीढ़ी तथा बड़े शहरों पले बढ़े लोगों में बहुत कम लोगों यह याद रहता है कि भारतीय संस्कृति और और धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला विक्रम संवत् देश के प्रत्येक समाज में परंपरागत [...]

हिन्दी ब्लाग लेखकों का मार्ग अत्यंत कठिन-हिन्दी लेख (hindi blog writing and society-article)

इस लेखक के ब्लाग ईपत्रिका ने पाठक तथा पाठन संख्या दो लाख पार कर ली है। यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है पर फिर भी यह बताना जरूरी है कि हिन्दी पत्रिका के बाद यह दूसरा ब्लाग है जिसने यह उपलब्धि प्राप्त की है। दूसरे की रचना सभी के लिये समालोचना-प्रशंसा और आलोचना-का विषय होती [...]

क्रिकेट के साथ बल्ले बल्ले और फिक्सिंग मिक्सिंग चालू आहे-हिन्दी हास्य व्यंग्य (ramance with cricket-hindi hasya vyangya)

बल्ले बल्ले और फिक्सिंग मिक्सिंग-हिन्दी हास्य व्यंग्य लेखक -दीपक भारतदीप आखिर क्रिकेट में चल क्या रहा है? बल्ले बल्ले कि फिक्सिंग मिक्सिंग! सुबह दो चैनल अपने कार्यक्रम इस तरह प्रस्तुत कर रहे थे जैसे कि क्रिकेट इस देश का जीवन हो। उनकी प्रस्तुति इस तरह की थी जैसे पहले नौटंकी वालों के ढिंढोरची ढोलक बजाकर [...]

होली और क्रिकेट साथ साथ-हिन्दी व्यंग्य (holi aur cricket sath sath-hindi vyangya

होली, क्रिकेट और सट्टा लेखक -दीपक ‘भारतदीप’   इस बार होली का मजा वैसे भी किरकिरा होना ही है क्योंकि विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता के मैचे खेल जा रहे हैं। होली पर देश का जनजीवन एकदम ठप्प हो जाता है। कुछ लोग रंग खेलने में लग जाते है तो कुछ उनसे बचने के लिये घरों में [...]

आशियाने का दायरा-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ (ashiyane ke dayre-hindi comic poem’s

अपने आशियाने दायरों से बाहर तुम यूं ही बनाओगे, मुफ्त के माल पर कब्जा कर जिंदगी को सजाओगे। गुजर जाये कई बरस बड़े आराम और शांति से शायद मगर जब आया बुलडोजर तो खून के आंसुओं से नहाओगे। ———– तुम्हारे अतिक्रमण पर हुआ आक्रमण भला कौन तुम्हें बचायेगा, हदों से बाहर बने आशियानों में रहने [...]

औकात और असलियत-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ

चीजें खरीदने से भला ख्वाब कब पूरे हो जाते हैं, इश्तहार देखकर बाज़ार में जेब ढीली करने के बाद खुद को लफ्जों के शिकार की तरह पाते हैं। ————— गरीबों की गरीबी इश्तहार में भी बिकने की लिये आती है, बाज़ार में भलाई वह शय है जो ख्वाबों के भाव बिक जाती है। आम इंसान [...]

योग गुरु बाबा श्री रामदेव और विवादों का चोली दामन का साथ-हिन्दी आलेख (baba ramde aur vivad-hindi article)

बाबा रामदेव को योग शिक्षा सिखाते हुए बहुत समय हुआ होगा पर उनको चर्चा में आये पांच छह वर्ष से अधिक नहीं हुआ है, जबकि इस देश में भारत में योग साधना की अनिवार्यता पिछले पंद्रह वर्षों से बहुत तेजी से की जा रही थी। इसका कारण यह था कि जैसे जैसे आधुनिक विलासिता साधनों [...]

मोटापा और मोटे लोग-हास्य व्यंग्य (motapa aur mote log-hasya vyangya)

मोटापे अच्छा है या बुरा इस पर बहुत बहस चलती है। ऐसा लगता है कि मोटापे पर कोई सही ढंग से शोध नहीं कर पाया। अनेक लोग मोटापे पर चिंतन लिखते हैं तो अनेक व्यंग्य! कुछ लोग शोध करते हैं तो कुछ क्रोध करते हैं। मुश्किल यह है कि इस पर अनुसंधान करने वाले लोग [...]

विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता के लिये धर्म और संतों का सहारा-हिन्दी संपादकीय (vishwa cup cricket tournment,religion and hindu sant)

हो सकता है कि वयोवृद्ध दर्शक कहकर -दरअसल प्रचार माध्यम अब क्रिकेट खेल के लिये नयी पीढ़ी के दर्शक ढूंढ रहे हैं क्योकि उनको यकीन है कि 1983 में विश्व कप क्रिकेट जीतन पर इससे जुड़े भारतीय दर्शक अब बुढ़ा गये हैं- क्रिकेट खेल पर चर्चा से वंचित किया जाये पर सच यह है कि [...]

बसंत पंचमी और महंगाई-हिन्दी व्यंग्य कविता (basant panchami aur mehangai-hindi vyangya kavita)

महंगाई बढ़ गयी है, गर्मी पहले ही चढ़ गयी हैं, मगर फिर भी लोग मनाकर जश्न बसंत पंचमी का अहसास करायेंगे। भूखे हैं पर कत्ल नहंी करते, गरीब हैं पर भीख नहीं मांगते, लोग अपनी खुशी यूं ही मनायेंगे। लुटेरों के घर पहरे हैं हुक्मरान बहरे हैं, दान लूटकर कमीशन बता लिया, किया व्यापार, कल्याण [...]

गर्मी के प्रकोप के साथ बसंत पंचमी का आगमन -हिन्दी लेख (basant panchami ka aagman aur garmi ka prakop-hinid lekh)

यह बसंत आया कि गर्मी आई! विश्व में मौसम अपने अपने नये अंदाज दिखा रहा है। सूर्यनारायण उत्तरायण क्या हुए सर्दी ने अपना बिस्तरा बांध लिया। इसके बाद कश्मीर में बर्फबारी हुई पर फिर भी सर्दी उस तरह वापस नहीं लौटी जैसे मकर सक्रांति के पहले थी। 2011 की बसंत पंचमी इतनी गर्म रहेगी इसका [...]

आधुनिक तथा प्राचीन व्यवस्थाओं का संघर्ष-हिन्दी लेख

टुयूनिशिया तथा मिस्त्र की घटनाओं में जनआंदोलनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई जरूर देती है पर शक की पूरी यह गुंजायश है कि विश्व में अप्रत्यक्ष रूप से शासन कर रहे पूंजीपतियों की इसमें कोई न कोई योगदान हो सकता है। संभव है कि यह वर्ग महसूस कर रहा हो कि तेल क्षेत्रों में [...]

नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले-हिन्दी व्यंग्य कविता (naitikta ka path padhane wale-hindi vyangya kavita)

भीड़ में जाकर अपने भ्रष्टाचार को शिष्टाचार समझ जो लोग पी जाते हैं, मंचों पर वही नैतिकता का पाठ सुनाकर तालियां बजवाते हैं। अपने किस्से जब होते हैं आम तब सफाई में दिखाते खानदान का ईमान, जब दूसरे पर लगे इल्ज़ाम उसके लिये तख्ती पर गालियां लगवाते हैं। ———– लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर, मध्यप्रदेश writer [...]

सोसायटी संस्कृति-हिन्दी रचना (society culture-hindi rachana

क्या हमारे यहां फ्लैट सोसायटी ही संपूर्ण समाज बन गयी है? सीधा जवाब है नहीं! मगर टीवी चैनलों, समाचार पत्र पत्रिकाओं तथा व्यवसायिक प्रकाशनों के कार्यक्रमों या सृजन के स्वरूप से तो ऐसा ही लगता है। स्थिति यह है कि सब टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले मुख्य समय के दौरान हास्य व्यंग्य कार्यक्रमों में [...]

भूख और देशभक्ति-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (bhookh aur deshbhaki-hindi vyangya kavitaen)

भूखे इंसान के पास देश भक्ति कहां से आयेगी, रोटी की तलाश में भावना कब तक जिंदा रह पायेगी। पत्थर और लोहे से भरे शहर भले देश दिखलाते रहो महंगाई वह राक्षसी है जो देशभक्ति को कुचल जायेगी। ———- क्रिकेट और फिल्म में बहलाकर कब तक देश के भूखों की भावनाओं को दबाओगे। असली भारत [...]

रोटी की तलाश-हिन्दी व्यंग्य कविता (roti ki talash-hindi vyangya kavita)

रोटी की तलाश में आंखें फैलाये इंसान को कभी पशु न समझो, जब तुम्हारा पेट खाली होगा तुम भी ऐसे ही नज़र आओगे। दरियादिल बनकर देखो उपवास और भूख के अंतर को तभी समझ पाओगे। ———– कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://dpkraj.blogspot.com ———————— दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं [...]

प्याज और प्रचार माध्यम-हिन्दी व्यंग्य (pyaj aur prachar madhyam-hindi vyangya)

प्याज के महंगे होने के लेकर हमारे देश के प्रचार माध्यम खूब छोड़ मचा रहे हैं। स्पष्टतः विज्ञापनों के बीच में प्रसारण में उनको इस विषय पर खूब सामग्री मिल रही है। सवाल यह है कि प्याज़ का महंगा होना क्या वाकई उतनी बड़ी समस्या है जितनी प्रचारित की जा रही है। संभव है देश [...]

बेईमानी और भ्रष्टाचार का अफसाना-हिन्दी व्यंग्य कविताये (baiimani aur bhrashtachar ka afasana-hindi vyangya kavitaen)

व्यंग्य लिखने का अब मन नहीं करता है, क्योंकि आज का सच ही अट्टाहास करने लगता है। कमबख्त बेईमानी और भ्रष्टाचार पर अब क्या अफसाना लिखें, सामने खड़े हैं तलवार लेकर कातिल उनको कैसे ताना कसते दिखें, जिम्मा है जिन पर शहर का, ठेका है उनके पास बहपाना कहर का, क्या ख्वाबी पुलाव पकायें, जब [...]

हैरान हैं लुटेरे और उनके दलाल-हिन्दी व्यंग्य कविता

महंगाई में दिवाली भी मना ली होली भी मनाएंगे, लूट जिनका पेशा हैं उनके कारनामों पर कितना रोयेंगे, कब तक अपनी खुशियाँ खोएंगे, जब आयेगा हंसने का मौक़ा खुद भी हंसेगे दूसरों को भी हंसाएंगे. देश से लेकर विदेश तक हैरान हैं लुटेरे और उनके दलाल, क्यों नहीं हुआ देश बर्बाद इसका है उनको मलाल, [...]

आदर्श का सच-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (adarsh ka sach-hindi vyangya kavitaen)

आदर्श होने का दावा बाहर से लगता है मगर उसके अंदर छिपे ढेर सारे दाग हैं, रावण और कंस जैसे नाम रखकर कोई कातिल बने यह जरूरी नहीं है देवताओं का मुखौटा लगाकर उजाड़े कई लोगों ने बहुत सारे बाग हैं। ———— नाम में वाकई कुछ नहीं रखा है, दैत्यों ने भी कलियुग का अमृत [...]

गलतफहमी-हिन्दी कविताऐं (galatfahami-hindi shayariyan)

धरती पर घूमते सितारों के चमकने की असलियत जान ली, जिन्होंने कुछ उधार पर तो कुछ लूट पर अपनी जेब भरने की ठान ली, इसलिये आसमान के सितारों पर भी यकीन नहीं रहा। सोचते हैं अपनी गलतफहमी में ही बरसों तक यह कैसा भ्रम सहा। ———- वह लुटेरे हैं या व्यापारी पहचानना मुश्किल है, दौलत [...]

हमसफर-हिन्दी शायरी (ham safar-hindi shayri)

उनका कद ऊंचा देखकर हमने अपनी उम्मीद का आसमान उनके कंधे पर टिका दिया, मगर उनकी चाल मतलब के दायरों में ही सिमट गयी जिसने उनकी सोच का छोटा कद दिखा दिया। ————- हमसफर जब भी मिले मतलब की दूरी तक ही साथ चले, वादा करते रहे हमेशा साथ देने का अपनी मंजिल का पता [...]

पति पत्नी और लिपस्टिक विवाद-हिन्दी हास्य व्यंग्य कविता (lipustic and husband wife-hindi comic poem)

टीवी पर चल रही थी खबर एक इंजीनियरिंग महाविद्यालय में छात्रों द्वारा छात्राओं को होठों पर लिपस्टिक लगाने की तब पति जाकर उसकी बत्ती बुझाई। इस पर पत्नी को गुस्सा आई। वह बोली, ‘क्यों बंद कर दिया टीवी, डर है कहीं टोके न बीवी, तुम भी महाविद्यालय में मेरे साथ पढ़े पर ऐसा कभी रोमांटिक [...]

आतंकवादी का साक्षात्कार-हिन्दी हास्य व्यंग्य कविता (aatankvadi ka sakshatakar-hindi hasya vyangya kavita)

एक पत्रकार आतंकवादी का साक्षात्कार लेने पहुंचा और बोला ‘भई, बड़ी मुश्किल से तुम्हें ढूंढा है अब इंटरव्यु के लिऐ मना नहीं करना बहुत दिन से कोई सनसनीखेज खबर नहीं मिली इसलिये नौकरी पर बन आई है, तुम मुझ पर रहम करना आखिर दरियादिल आतंकवादी की छबि तुमने पाई हैं।’ सुनकर आतंकवादी बोला ‘‘भई, हमारी [...]

दिवाली(दीपावली) का शुभ दिन बीत गया-आलेख (hindi article on diwali festival

होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खाते थे कि बस अब दिवाली आयेगी तो जमकर खायेंगे।  हमें मिठाई खाने का शौक शुरु से रहा है और कुछ लोग मानते हैं कि मिठाई के शौकीन झगड़ा कम करते हैं क्योंकि उनकी वाणी में [...]

भारतीय योग साधना का फिनोमिना-हिन्दी धार्मिक विचार आलेख (finomina of yog sadhna-hindu dharmik vichar lekh

इंटरनेट पर एक हिंद ब्लॉग में लिखा   गया वह एक दिलचस्प लेख था! मन में आया टिप्पणी करना चाहिए! लेख दोबारा पढ़ा तो लगा कि चलो एक अपना पाठ ही लिख लेते हैं क्योंकि भारतीय योग साधना से संबंधित विधियां और उनके महत्व को लेकर विश्व भर में चर्चा हो रही है पर उसके [...]

सफेद ख्याल में काली नीयत की मिलावट-हिन्दी शायरी(safed khyal mein kali neeyat ki milavat-hindi shayari

कत्ल करने वाला कौन कातिल कौन पहरेदार इसका भी पैमाना जब तय किया जायेगा, तभी ज़माना रहेगा सुकून से हर कत्ल पर शोर नहीं मचायेगा। वैसे भी कातिल और पहरेदार वर्दी पहनने लगे एक जैसी, अक्लमंदों की भीड़ भी जुटी है वैसी, कुछ इंसानों का बेकसूर मारने की छूट भी मिल जाये तो कोई बात [...]

मग़र गज़ब है उनका हाज़मा–हिन्दी व्यंग्य कविताऐं

हलवाई कभी अपनी मिठाई नहीं खाते फिर भी तरोताजा नज़र आते हैं। बेच रहे हैं जो सामान शहर में उनकी दवा और सब्जी शामिल हैं जहर में कहीं न उनके मुंह में भी जाता है मग़र गज़ब है उनका हाज़मा ज़हर को अमृत की तरह पचा जाते हैं। ———————– सुनते हैं हर शहर में दूध, [...]

राम के रूप इंसान क्या जाने (ram ke roop insan kya jane)

घर से बाहर निकलकर जैसे ही स्कूटर पर सवार हुआ, वैसे ही पास से गुजरते दो आदमियों का वार्तालाप कानों में सुनाई दिया। एक दूसरे से कह रहा था कि ‘आज तो शहर में धारा 144 लागू है। अयोध्या के राम मंदिर पर फैसला आने वाला है।’ दूसरा बोला-हां, अयोध्या के राम मंदिर पर अदालत [...]

जो बहलाये वही गुरु-हिन्दी कविता (bahlane wala guru-hindi kavita)

लोगों को जो धर्म के नाम पर बहलाये वह धर्म गुरु बन जायेगा, अपनी कमर को चाहे जैसे लचकाये वह अभिनेता बन जायेगा, मुखौटा लगाये बुत की तरह कुर्सी पर सज जाये वह शासक बन जायेगा, बशर्ते किसी दौलतमंद को यह बताये कि उसका बंदर बन जायेगा, वैसे नाचेगा, उसका पैसा जैसा नचायेगा। ———– कवि,लेखक [...]

ज़मीर और मुखौटा-हिन्दी दिवस पर व्यंग्य कवितायें (zamir and mukhauta-poem on hindi diwas)

कोई भी मुखौटा लगा लो अपने चेहरे पर दूसरा इंसान तुम पर यकीन नहीं करेगा, मगर तुम अपनी नीयत और असलियत अपने से छिपा लोगे तब तुम्हारा ज़मीर किसी का कत्ल करते हुए भी तुमसे नहीं डरेगा। —————– कुछ लोग वाह वाह करते हुए हंसते सामने आते हैं, कुछ ताने देते हुए रुंआसे भी नज़र [...]

फर्जी मुठभेड़ पर बवाल-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (false encounter-hindi satire poem)

फर्जी मुठभेड़ों की चर्चा कुछ इस तरह सरेआम हो जाती कि अपराधियों की छबि भी समाज सेवकों जैसी बन जाती है। कई कत्ल करने पर भी पहरेदारों की गोली से मरे हुए पाते शहीदों जैसा मान, बचकर निकल गये जाकर परदेस में बनाते अपनी शान उनकी कहानियां चलती हैं नायकों की तरह जिससे गर्दन उनकी [...]

हिस्सा बांटने पर झगड़ा-हिन्दी हास्य कविताऐं

भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब कभी ज़ंग नहीं हो सकती, अलबत्ता हिस्सा बांटने पर हो सकता है झगड़ा मगर मुफ्त में मिले पैसे को हक की तरह वसूल करने में किसी की नीयत तंग नहीं हो सकती। ———— अपने तबादले से वह खुश नहीं थे, क्योंकि नयी जगह पर ऊपरी कमाई के अवसर कुछ नहीं थे, [...]

माया का असली और नकली खेल-हिन्दी व्यंग्य (maya ka asli aur nakali khel-hindi vyangya)

काग़ज के नोट वैसे भी नकली माया की प्रतीक है क्योंकि उनसे कोई वस्तु खरीदी जा सकती है पर उनका कोई उपयोग नहीं है। हर नोट पर रिजर्व बैंक इंडिया के गवर्नर का एक प्रमाण पत्र रहता है जिस पर लिखा रहता है कि मैं इसके धारा को अंकित रुपया देने का वचन देता हूं। [...]

बिसात-हिन्दी कविता (bisat-hindi poem

दुबली, पतली और सांवली उस गरीब औरत की काम के समय मौत होने पर पति ने हत्या होने का शक जताया। पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिये अस्पताल भेजा और एक घर से दूसरे और वहां से तीसरे घर में काम करती हुई उस गरीब औरत की मौत को संदेहास्पद बताया। गरीब और बीमार [...]

कलम की कद्र नहीं करते, तलवार उठाते अपने हाथ में-हिन्दी व्यंग्य कविता (kalam aur talwar-hindi vyangya kavita

पेड़ की छाया भी सुख न दे सके, लोग लगे ऐसे तनाव लाने में। घास भी पांव में छाले कर दे, ऐसे मैदान में लगे पांव बढ़ाने में।। बुलंदियों को छूना चाहते सभी, ऊंचाई का पता नहीं किसी को, बिना पंख आकाश में उड़ते, जिंदगी दांव पर होती भाग्य अजमाने में।। कलम की कद्र नहीं [...]

भद्र पुरुष उवाच-हास्य व्यंग्य

वह भद्र पुरुष बुद्धिजीवी बहुत दिनों से बिना प्रचार के सांसें ले रहा था। कहने को लेखक था और संबंधों के दम पर अच्छा खासा छपता भी था पर अब न वह लिख पाता था और न ही उसकी दिलचस्पी थी। अलबत्ता अपने पुराने रिश्तों के सहारे कहीं उसने साहित्यक संस्थाओं के पद वगैरह जरूर [...]

ज्ञान बेचने के लिये भ्रम फैलाते हैं-हिन्दी हास्य व्यंग्य कवितायें

शब्द सुंदर हैं, पर हृदय में नहीं दिखती हैं भावनायें, आंखें नीली दिख रहीं हैं, पर उनमें नहीं हैं चेतनायें। प्राकृतिक रिश्ते, कृत्रिम व्यवहार से निभा रहे हैं सभी इंसान, चमकीले चेहरों का झुंड दिखता है, पर नहीं है उनमें संवेदनायें। जल में नभ को नाचता देखकर नहीं बहलता उनका दिल लगता है जैसे लोटे [...]

काले को सफेद करने का चमत्कार-हास्य व्यंग्य

गुरुजी के पुराने भूतहे आश्रम  में आते ही चेले ने अपने बिना प्रणाम गुरु जी से कहा-‘गुरूजी जी आज आपकी सेवा में अंतिम दिन है। कल से नये गुरू की चेलागिरी ज्वाइन कर रहा हूं, सो आशीर्वाद दीजिये कि उनकी सेवा पूरे हृदय से कर सकूं और मुझे जीवन में मेवा मिल सके।’ सुबह सुबह [...]

हादसे और हमदर्दी की रस्म-हिन्दी व्यंग्य कविता (hadse aur handardi ki rasma)

दौलत और शौहरत के सिंहासन पर बैठे लोगों से हमदर्दी की उम्मीद करना बेकार है क्योंकि वह डरे सहमे हैं अपनी औकात से ज्यादा मिली कामयाबी के खो जाने के खौफ से , और दुनियां का यह कायदा भूलना मुश्किल है कि डरपोक लोग ही खूंखार हो जाते हैं। इसलिये हर हादसे पर उनकी हमदर्दी [...]

वफादारी और बिचारगी-हास्य कविताएँ ( vafadari aur bichargi-hasya kavitaen)

मतलब निकल जाये तो दोस्त भी आंख फेर लेते हैं, बात अगर पैसे की हो तो वफादारी दांव पर धर देते हैं। खुशफहमी है उनकी कि हमने उन पर कभी भरोसा किया, हालातों से मजबूर इंसान कुछ भी कर सकता है यह सच हमने भी जान लिया, इसलिये गद्दारी को भी हंस कर अपने पर [...]

खेल का व्यापार-हिन्दी व्यंग्य (khel ka vyapar-hindi vyangya)

एक ब्लाग पर अपने एक आलेख में इस लेखक ने विश्व कप 2010 फुटबाल विश्व कप में स्पेन के विरुद्ध हालैंड के जीतने की भविष्यवाणी कर दी। क्यों की? न अब फुटबाल से वास्ता न ज्योतिष से। ज्योतिष गणना को तो सवाल ही अलबत्ता एक समय हॉकी और फुटबाल खेलने से वास्ता रहा जो समय [...]

लौकी का जूस और मूली-हास्य व्यंग्य

यही है बाज़ार और उससे प्रायोजित प्रचार माध्यमों को खेल कि लौकी भी अब विषैले पदार्थों में शामिल हो सकती है। हमें याद है जब सात वर्ष पूर्व जब उच्च रक्तचाप की शिकायत होने पर आधुनिक चिकित्सकों के शरण लेनी पड़ी थी। एक मित्र होम्योपैथी चिकित्सक ने रक्तचाप की नाप ली और कहा कि ‘तुम्हें [...]

सेवा के सौदागऱ-हिन्दी व्यंग्य कविता

सेवा के सौदागरों को अपने घर भी भरने हैं, फुरसत मिले तो लोगों को भरमाने के लिये नये नारे भी गढ़ने हैं। मुफ्त में उनसे भले की उम्मीद कर अपने आप को क्यों धोखा देते हो परदे पर सपने देखकर कब तक कितना चैन पायेंगे वादों से कब तक अपने को बहलायेंगे जबकि अपनी सच्चाईयों [...]

इंटरनेट की माया-हास्य कविता (Internet ki maya-hasya kavita)

अंतर्जाल पर रोज मिलते थे प्यार भरे शब्द एक दूसरे के लिये लिखते थे, बहुत दिन बाद आशिक और माशुका को आपस में मिलने की बात दिमाग में आई, एक तारीख चुनकर अपनी मीट होटल में सजाई। आशिक पहले पहुंचकर टेबल पर बैठ गया माशुका थोड़ी देर बाद आई। दोनों ने देखा एक दूसरे को [...]

आशिक माशुका एसोसिशन-हास्य कविता

छद्म नाम बताकर, पराया फोटो लगाकर, आशिक और माशुका ने अपनी इश्क की कहानी रचाई, हुई दोनों की पहली मीट जो उनकी पहली और आखिरी मुलाकात का संदेश लाई। माशुका गरजते बोली ‘हद हो गयी गयी इंटरनेट पर धोखे की, कंप्यूटर की लोग इज्जत इतनी करते जितनी कागज के खोखे की, अब मैं एक माशुका [...]

असली क्रिकेट प्रशिक्षण-हिन्दी हास्य व्यंग्य (real cricket coching-hindi hasya vyngya)

एक आदमी अपने लड़के को क्रिकेट की कोचिंग सिखाने के लिये ले जा रहा था। रास्ते में दोस्त मिल गया और उसने पूछा तो वह आदमी बोला-‘यार, मेरा बच्चा क्रिकेट खेलता है। पढ़ता लिखता कुछ नहीं है। पड़ौसियों को परेशान कर रखा है। इसलिये इसे क्रिकेट कोच के पास ले जा रहा हूं। हो सकता [...]

अगले सम्मेलन की तारीख-हिन्दी व्यंग्य कविता

सम्मेलन में कुछ रूठे इस उम्मीद में गये कि कोई उन्हें मना लेगा कुछ टूटे दिलों ने आसरा किया कि कोई उन्हें फिर अपना बना लेगा, मगर वहां जमी महफिल में सभी चीख रहे थे गुर्राने के नये नये तरीके सीख रहे थे, सद्भाव के नाम पर संघर्ष दिखने लगा। सभी ने अपनी अपनी कही, [...]

ढूंढते हैं लड़खड़ाती प्रेम कहानी में आजादी का सवाल-हिन्दी हास्य कविताएँ

समाज एक कारखाना और परिवार एक उत्पादित है उन बुद्धिजीवियों के लिये जो सजाते हैं अपने ख्यालों में बड़े करीने से, ढूंढते हैं परिवारों में टूटने बिखरने की कहानियां वाद और नारे से आगे उनकी सोच नहीं जाती, जिसे कई बार दोहराते इनामों की थाली उनके घर सजकर आती, जगा रहे हैं श्रम के लिए [...]

इतिहास और नया घटनाक्रम-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

इतिहास क्यों पुराना सुनाते हो, यहां घट रहा है रोज नया घटनाक्रम तुम पुरानी कथा क्यों सुनाते हो। पढ़ लिखकर किताबें क्यों ढूंढ रहे हो जमाने को दिखाने का रास्ता, अपनी खुद की सोच बयान करो मत दो रद्दी हो चुके ख्यालों का वास्ता, पुराने समय के नायकों की याद में नये खलनायकों की चुनौती [...]

क्रिकेट में महाभारत जैसा प्रसंग-हिन्दी व्यंग्य (cricket and mahabharat-hindi vyangya)

बीसीसीआई की क्रिकेट टीम टी-ट्वंटी विश्व कप से बाहर हो गयी। टीवी चैनल वाले इसको लेकर प्रलाप कर रहे हैं। अब उन्हें अपने देश की इज्जत लुट जाने का गम साल रहा है। वाह यार! क्या गजब़ है! जब पाकिस्तान के खिलाड़ियों को भारत के आयोजित क्लब स्तरीय प्रतियोगिता में नहीं खरीदा गया तब यही [...]

दुआ करो चोर पकड़ा न जाये-हिन्दी हास्य कविता

हांफता हुआ आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज तो निकल गया इज्जत का जनाजा बज जायेगा मेरे नाम का भी बाजा, घर से पर्स में केवल पचास रुपये लेकर निकला था कि कट गया, मेरे लिये तो जैसे आसमान फट गया, अब चिंता इस बात की है कि कभी चोर पकड़ा गया तो मेरा [...]

लुटेरों का वजूद नायक जैसा बताया-हिन्दी व्यंग्य कविता

ऊंचे सिंहासन पर बैठने से चरित्र ऊंचा नहीं हो जाता, अगर हो इंसान ईमानदार तो ऊंचा सिंहासन नसीब में नहीं आता। पर मजबूरी है चारणों की जो स्तुति करते हैं, शब्दों में स्वामी के काल्पनिक गुण भरते हैं, ज़माने की मजबूरी कहें, या कुदरत की मंजूरी कहें, सिंहासन पर बैठे राजा का फरिश्ते जैसा दिखना [...]

ढाई कौड़ी का चिंत्तन-हिन्दी हास्य व्यंग्य

एक सरकारी अधिकारी के यहां छापा मारकर ढाई हजार करोड़ की अवैध संपत्ति का पता लगाया गया। डेढ़ टन सोना बरामद किया। यह खबर अखबार में पढ़कर अपने तो होश ही उड़ गये-आजकल अक्सर ऐसा होने लगा है। हम सोचने लगे कि इतने सारी संपत्ति वह अधिकारी संभालता कैसै होगा। अपने से तो ढाई हजार [...]

यही तो क्रिकेट है-हिन्दी व्यंग्य लेख

उफ! यह क्रिकेट है! इस समय क्रिकेट खेल को देखकर जो विवाद चल रहा है उसे देखते हुए दिल में बस यही बात आती है कि ‘उफ! यह क्रिकेट है! इस खेल को देखते हुए अपनी जिंदगी के 25 साल बर्बाद कर दिये-शायद कुछ कम होंगे क्योंकि इसमें फिक्सिंग के आरोप समाचार पत्र पत्रिकाओं में [...]

विज्ञापन की कीमत-हिन्दी व्यंग्य कविता (adevertisment-hindi shayari)

पैंतरेबाजी से प्रसिद्धि भी जल्दी मिल जाती है, सीधी राह में भी अड़चन कम न आती है। शादी पर बारात निकले, या गमी में शवयात्रा खुशी और गमी भी बाजार में अब बेची जाती है। हम बैठे देख रहे परदे पर, सब नाटक है सच नहीं मुफ्त नहीं है, विज्ञापन की कीमत से शय बढ़ [...]

इश्क के चर्चे-हिन्दी व्यंग्य कविता

जो पत्नी को प्रियतमा न समझे भटके हैं प्यार पाने के लिये इस दर से उस दर। दिल में पल रहे जज़्बात जमीन पर चलते नहीं देखे जाते, इश्क है या हवस इसकी पहचान नहीं कर पाते, जो इंसानी जिस्म को सर्वशक्तिमान समझे मोहब्बत नहीं टिकती कभी उनके घर। ———— इश्क के चर्चे जमाने में [...]

वादे पर यकीन-हिन्दी शायरी (vada aur yakin-hindi shayri)

कैसे यकीन करें उनके वादों पर खड़े कर लिये अपने रहने के लिये महल, करते हैं गरीबों के लिये झुग्गियों की पहल, लोहे के चलते किलें में करते हैं सफर, टूटी सड़कों बनाने का वादा करते मगर, हर बार चमकते हैं आंखों के सामने जब वादों का मौसम आता है। उनकी ईमानदारी की कसमों पर [...]

मोहब्बत का पैगाम होते हैं धोखा-हिन्दी शायरी

दौलत के खिलाड़ी, दूसरों के जज़्बातों समझते नहीं, जहां मौका मिलता है, गेंद समझकर खेलते हैं वहीं। उनके मोहब्बत का पैगाम, होते हैं हमेशा एक धोखा, फायदे के लिये नफरत उगलते उनको देर लगती नहीं। कुछ पेट कम भर लेना, चीथड़े भी ओढ़ना अच्छा है, अपने जज़्बातों का जनाज़ा निकलने कभी देना नहीं।। थोड़ी हंसी [...]

शब्द बोलते, हिसाब तोलते-हिन्दी हास्य व्यंग्य कवितायें

उपदेश देते हुए उनकी जुबान बहुत सुहाती हैं, और बंद कमरे में उनकी हर उंगली चढ़ावे के हिसाब में लग जाती है। किताबों में लिखे शब्द उन्होंने पढ़े हैं बहुत सुनाते हैं जमाने को कहानी की तरह पर अकेले में करते दौलत का गणित से हिसाब लिखने में कलम केवल गुणा भाग में चल पाती [...]

खतरा है जिनसे जमाने को, पहरा उनके घर सजा है-हिन्दी हास्य व्यंग्य कवितायें

इंसान कितना भी काला हो चेहरा पर उस पर मेअकप की चमक हो, चरित्र पर कितनी भी कालिख हो पर उसके साथ दौलत की महक हो, वह शौहरत के पहाड़ पर चढ़ जायेगा। बाजार में बिकता हो बुत की तरह जो इंसान लाचार हो अपनी आजाद सोच से भले पर वह सिकंदर कहलायेगा। खतरा है [...]

ॐ (ओम) शब्द और गायत्री मंत्र जपने से लाभ होता है-हिन्दू धर्म संदेश (OM SHABD AUR GAYTRI MANTRA JAPNE SE LABH-HINDU DHARM SANDESH)

अकारं चाप्युकारं च मकारं च प्रजापतिः। वेदत्रयान्निरदुहभ्दूर्भूवः स्वारितीतिच।।      हिन्दी में भावार्थ-प्रजापित ब्रह्माजी ने वेदों से उनके सार तत्व के रूप में निकले अ, उ तथा म् से ओम शब्द की उत्पति की है। ये तीनों भूः, भुवः तथा स्वः लोकों के वाचक हैं। ‘अ‘ प्रथ्वी, ‘उ‘ भूवः लोक और ‘म् स्वर्ग लोग का भाव प्रदर्शित [...]

ज़ज्बातों को कार समझ लिया-हास्य कविताएँ

एक दिल था जो उन्होंने खिलौने की तरह तोड़ दिया, मोहब्बत को समझा खेल अपना रिश्ता दिल्लगी से जोड़ लिया। जिंदगी के सुकून का मतलब नहीं समझे जज़्बातों को समझा लोहे लंगर की तरह अपना ख्याल कार की तरह मोड़ लिया। ——— एक दोस्त ने दूसरे को समझाया ‘‘यह ‘आई लव यू’ लिखकर प्रेम पत्र [...]

भगवान श्रीराम मूलतः अहिंसक प्रवृत्ति के थे-रामनवमी पर विशेष लेख (ramnavami par vishesh lekh)

आज रामनवमी है। भगवान श्रीराम के चरित्र को अगर हम अवतार के दृष्टिकोण से परे होकर सामान्य मनुष्य के रूप में विचार करें तो यह तथ्य सामने आता है कि वह एक अहिंसक प्रवृत्ति के एकाकी स्वभाव के थे। उन जैसे सौम्य व्यक्तित्व के स्वामी बहुत कम मनुष्य होते हैं। दरअसल वह स्वयं कभी किसी [...]

वफा की कीमत औकात के मुताबिक-हिन्दी शायरी

दिन में फरिश्तों को भेष ओढ़े लोग रात को शैतान हो जाते हैं। भलाई अब हो गयी है सौदे की शय बेचते हैं बाजार में दरियादिल वही दीवारों के पीछे रंगीन रौशनी में इज्जत के लुटेरे बन जाते हैं। ———- नहीं दौलत अपने पास तो किसी पर यकीन नहीं करना, बिखर जाओगे मुफ्त में वरना, [...]

काली करतूतें सफेद कागज में ढंकते रहे-हिन्दी शायरी

सिर उठाकर आसमान में देखा तो लगा जैसे हम उसे ढो रहे हैं, जमीन पर गड़ायी आंख तो लगा कि हम उसे अपने पांव तले रौंद रहे हैं। ठोकर खाकर गिरे जब जमीन पर मुंह के बल न आसमान गिरा न जमीन कांपी तब हुआ अहसास कि हम कोई फरिश्ते नहीं बस एक आम इंसान [...]

हिन्दू धर्म संदेश-उद्दण्डता का वेश धारण करना अनुचित

यो नोद्धतं कुरुते जातु वेषं न पोरुषेणापि विकत्धरोऽन्यान्। न मूर्चि्छत्रः कटुकान्याह किंचित् प्रियं सदा तं कुरुते जनति।। हिंन्दी में भावार्थ-जो कभी उद्दण्ड जैसा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नहीं हांकता, गुस्सा होने पर कट् वाक्य नहीं बोलता वह सभी का प्यारा हो जाता है। न स्वे सुखे वै कुरुते नान्यस्य [...]

उजड़े रिश्ते-हिन्दी शायरी (rishtey-hindi comic poem)

अपनी दर्द भरी बातें किसी को क्या सुनायें, रोते लोगों क्या रुलायें, सभी अपने गम छिपाने के लिये दूसरों के घावों पर हंसने का मौका ढूंढ रहे हैं। अपने साथ हुए हादसों के किस्से किसको सुनायें, आखिर लोग उनको मुफ्त में क्यों भुनायें, अपनी जिंदगी में थके हारे लोग जज़्बातों के सौदागर बनकर दूसरों के [...]

चाणक्य नीति-दुष्ट व्यक्ति कितना भी तीर्थ करे, पवित्र नहीं हो सकता

अंतर्गतमलो दृष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि। न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च यत्।। हिंदी में भावार्थ-जिसके मन में मैल भरा है ऐसा दुष्ट व्यक्ति चाहे कितनी बार भी तीर्थ पर जाकर स्नान कर लें पर पवित्र नहीं हो पाता जैस मदिरा का पात्र आग में तपाये जाने पर भी पवित्र नहीं होता। न दुर्जनः साधुदशामुपैति बहुप्रकारैरपि शिक्ष्यमाणः। आमूलसिक्तः [...]

प्रायोजित कहानियां-हिन्दी व्यंग्य कविता (sporsard story-hindi satire poem)

वस्त्रों के रंगों से चरित्र की पहचान कभी नहीं होती है, पद का नाम कुछ भी हो इंसानों से निभाये बिना उसकी कदर नहीं होती है। जोगिया पहनकर करते जिस्म का व्यापार जोगी धन जुटाने का कर रहे चमत्कार, जब तक पोल सामने न आये जयकारा बोलने वालों के मुख से भी हाहाकार की आवाज [...]

कामयाबी का दस्तूर-हिन्दी शायरी (kamyabi ka dastur-hindi hasya kavitaen)

फिक्र हो या नहीं करते दिखना, एक झूठ को सौ बार सच लिखना, ईमानदारी और वफा के कायदों से कोई वास्ता हो या न हो कामयाबी का बस एक ही दस्तूर है बाजार में महंगे भाव बिकना। ——– कभी कभी आंखों के आंसु भी हंसी में बदल जाते हैं जब हमदर्द कम करने की बजाय [...]

क्रिकेट का बदला साइकिल में- व्यंग्य (cycle and cricket match-hindi vyangya)

भारत में आयोजित एक निजी क्लब स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता में पाकिस्तानियों को नहीं खरीदा गया। पाकिस्तान इसका बदला लेने की फिराक में था और उसने लिया भी, भारत की साइकिलिंग टीम को अपने यहां न बुलाकर। एक अखबार में कोने में छपी इस खबर ने दिल को हैरान कर दिया। न देशभक्ति के जज़्बात जागे [...]

मुखौटे बाजार के-हिन्दी व्यंग्य शायरी कवितायें (mukhaute bazar ke-hindi hasya kavita)

आदर्श पुरुषों ने अपनी दरबार में देशभक्ति का नारा बड़े तामझाम के साथ सजाया। बाजार को बेचनी थी मोमबत्तियों शहीदों के नाम पर, इसलिये प्रचारकों से नारे को संगीत देने के लिये शोक संगीत भी बजवाया। भेजे आदर्श पुरुषों के नाम से रुपयों से भरे लिफाफे जिनकी समाज सेवा से आम इंसान हमेशा कांपे दिल [...]

हिंदू धर्मं सन्देश-समान दृष्टि रखना ही धर्मं की सच्ची पहचान

दुषितोऽपि चरेद्धर्म यत्रतत्राश्रमे रतः। समः सर्वेषु भूतेशु न लिंगे धर्मकारणम्।। हिन्दी में भावार्थ- चाहे घर में हो या आश्रम में शास्त्रों के ज्ञाता को चाहिए कि सामान्य प्राणियों के दोषों से ग्रसित होने पर भी सभी को समान दृष्टि से देखे। वह धर्म का अनुसरण करते हुए अपना व्यवहार हमेशा शुद्ध रखे पर उसका प्रदर्शन [...]

हिन्दू धर्म संदेश-शिव हो या केशव, इष्ट एक ही होना चाहिए

एको देवः केशवो वा शिवो वा ह्येकं मित्रं भूपतिवां यतिवां। एको वासः पत्तने वने वा ह्येकं भार्या सुन्दरी वा दरी वा।। हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य को अपना आराध्य देव एक ही रखना चाहिये भले ही वह केशव हो या शिव। मित्र भी एक ही हो तो अच्छा है भले ही वह राजा हो या साधु। घर [...]

प्यार की आज़ादी-हिंदी हास्य कविता/हिन्दी शायरी

समाज के ठेकेदार से उसके दोस्त ने पूछा ‘यार, तुम वेलंटाइन डे पर प्यार की आजादी की जंग लड़ते हो, जो आधा शरीर ढके वस्त्र पहने उनके साथ देने का दंभ भरते हो, क्यों नहीं वस्त्रहीन घूमने पर लगी रोक ही खत्म करवा देते, श्लीलता और अश्लीलता का भेद मिटा लेते।’ प्रश्न सुनकर समाज का [...]

चमके वही लोग -हिन्दी हास्य व्यंग्य कविताएँ

खजाना भरने  वालों को भला कहां सम्मान मिल पाया, चमके वही लोग बिना मेहनत किये जिनके वह हाथ आया। ——- शरीर से रक्त बहता है पसीना बनकर कांटों को बुनती हुई हथेलियां लहुलहान हो गयीं अपनी मेहनत से पेट भरने वाले ही रोटी खाते बाद में पहले खजाना  भर जाते हैं। सीना तानकर चलते आंखों [...]

हाक़ी के विशिष्ट दर्शक-हिंदी व्यंग्य (hocky ke vishisht darshak-hindi vyangya)

लगभग मृतप्रायः हो चुकी भारतीय हाकी को उबारने के लिये बल्ला और गेंद से खेलकर महान बन चुके भगवान अब दर्शक के रूप में अवतरित हो रहे हैं। ‘हमारे देश में हाकी         का विश्व कप हो रहा है, क्या उसे हम नहीं देखेंगे?’ ‘मैं  अब खेलूगा नहीं बल्कि दर्शकों की तरह [...]

दीवार के पीछे ही खुद को छिपाना-हिंदी शायरी

दीवार के पीछे ही अपना चेहरा छिपाये रहो तुम, तुम हो एक सजा सजाया ख्वाब, कितने भी सवाल करूं नहीं देना उनका जवाब, तुम्हारे दिल के स्वर ही दिमाग की सोच में बजते रहे हैं, कई  शेर कहे हमने यह मानकर जैसे कि तुमने कहे हैं, अपने कड़वे सच के घूंट हमने जहर की तरह [...]

बेईमानी से बढ़ता कद-हिन्दी व्यंग्य शायरी (baimani aur kad-hindi comic poem)

कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://dpkraj.blogspot.com ———————— कान में लगाये मोबाइल पर ऊंची आवाज में बतियाते पांव उठाता सीना तानकर आंखों से बहती कुटिल मुस्कराहट वह अभिमान से चला जा रहा है। लोगों ने बताया ‘अपनी बेईमानी से कभी लाचार वह भाग रहा था जमाने से गिड़गिड़ाता तथा छोटे इंसानों के सामने भी अब मिल [...]

नयी पीढ़ी को आगे लाने के वास्ते-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं

कभी शिकायत नहीं की अपने दर्द की शायद इसलिये उन्होंने बेकद्री का रुख दिखाया, इशारों को कभी समझा नहीं काम निकलते ही अपनों  से अलग परायों में बिठाया, जब अपने मसले रखे उनके सामने बागी कहकर, हमलावरों में नाम लिखाया ———— नयी पीढ़ी को आगे लाने के वास्ते, खोल रहे हैं सभी अपने रास्ते। पुरानों [...]

किस्सा दहेज का-हिन्दी हास्य कविताएं (kissa dahej ka-hindi hasya kavitaen

शिक्षक पुत्र ने वकील पिता से कहा ‘पापा, मेरी शादी में आप दहेज की मांग नहीं करना यह बुरा माना जाता है देश के समाज की हालत सुधारने का श्रेय भी मिल जायेगा हम पर कभी ‘दहेज एक्ट’ भी नहीं लग पायेगा उससे बचने का यही उपाय मुझे नजर आता है।’ वकील पिता ने कहा [...]

हिन्दू धर्म संदेश-दोस्त और पत्नी एक ही होना चाहिए

संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://anantraj.blogspot.com ———————— एको देवः केशवो वा शिवो वा ह्येकं मित्रं भूपतिवां यतिवां। एको वासः पत्तने वने वा ह्येकं भार्या सुन्दरी वा दरी वा।। हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य को अपना आराध्य देव एक ही रखना चाहिये भले ही वह केशव हो या शिव। मित्र भी एक ही हो तो अच्छा है भले ही [...]

मारते हैं अपने ही जज़्बात को लात-हिन्दी शायरी

प्यार मांगने की चीज होती तो किसी से भी मांग लेते, इज्जत छीनने की चीज होती तो किसी से भी छीन लेते। लोग नहीं सुनते अपने ही दिल की बात, मारते हैं अपने ही जज़्बात को लात, दिमाग को ही अपना मालिक समझते, बड़े अक्लमंद दिखने को सभी हैं तैयार पर लुटती होती कहीं अक्ल [...]

महानायकों के झुंड के बीचआम आदमी-व्यंग्य कविता

महानायकों के झुंड के बीच खड़ा है आम आदमी हैरान होता  यह सोचकर कि किसकी आरती वह पहले करे। सुबह छाया पर्दे पर फिल्म का नायक दोपहर को गा रहा है भजन गायक शाम को नजर आ रहा है आतंक का खलनायक किसे करे प्रेम किस पर दिखाये गुस्सा पहले नज़रों में उसके चेहरा तो [...]

पुतले कहलाते शहंशाह-हिन्दी शायरी (putle kahlate shanshah-hindi shayri)

जिसके सिर पर ताज का बोझ नहीं है, काम करने का जिम्मा रोज नहीं है, कान नहीं खड़े होते हमेशा किसी का हुक्म सुनने के लिये, जिसके हाथ नहीं मोहताज किसी का जुर्म बुनने के लिये, जिसकी आंखें नहीं ताकती मदद के लिये किसी दूसरे की राह, खुशदिल आदमी बोले हर समय ‘वाह’। वही है [...]

मौसम भी ब्रेकिंग न्यूज होता है-हिन्दी व्यंग्य (weather is breking news-hindi hasya kavita)

टीवी चैनलों वाले भी क्या करें? उनको हमेशा ही सनसनीखेज की जरूरत है, वह न मिलें तो उसका एक ही उपाय है कि होता है कि हर खबर को सनसनीखेज खबर बनाया जाये। जब हर दस मिनट में ‘ब्रेकिंग न्यूज’ देना है तो फिर चाहे जो खबर पहली बार मिले उसे ही चला दो। कोहरा [...]

भगवान के भजन को व्यवसाय की तरह न करें-हिन्दू धर्म संदेश (bhagvan ke bhjan ko vyapar n samjhen)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————————— कि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः। मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं स्वात्मानन्दपदप्रवेशकलनं शेषाः वणिगवृत्तयं:।। हिंदी में भावार्थ- वेद, स्मुतियों और पुराणों का पढ़ने और किसी स्वर्ग नाम के गांव में निवास पाने के लिए  कर्मकांडों को निर्वाह करने से भ्रम पैदा होता है। जो परमात्मा संसार के दुःख और तनाव [...]

रास्ता जाम-हिन्दी व्यंग लेख (trafic trouble-hindi satire)

मार्ग अवरुद्ध (ट्रैफिक जाम) में फंसना कोई बड़ी बात नहीं है। इस देश के करोड़ों लोग रोज फंसते हैं। उनकी कोई खबर नहीं बन सकती। खबर के लिये सनसनी होना जरूरी है। यह सनसन असामान्य लोगों के उठने, बैठने, चलने, फिरने और छींकने पर बनती है। मैंढकी को जुकाम हो जाये तो क्या फर्क पड़ता [...]

इस ब्लाग ने पाठक संख्या एक लाख पार की-संपादकीय (vews of it blog-hindi editorial)

 आज यह ब्लाग एक लाख की संख्या पार गया।  देश में हिन्दी भाषी क्षेत्रों में इंटरनेट  कनेक्शनों की संख्या को देखते हुए किसी हिन्दी भाषी ब्लाग पर दो वर्ष में यह संख्या अधिक नहीं है, मगर दूसरा पक्ष यह है कि आम हिन्दी भाषी लोगों में इंटरनेट पर हिन्दी लिखे जाने का ज्ञान और उसके [...]

इतिहास के झगड़े-व्यंग्य चिंत्तन (war of history-hindi satire article

इस देश में कई ऐसे लोग मिल जायेंगे जो इतिहास विषय को बहुत कोसते हैं क्योंकि उनको प्रश्नपत्रों को हल करते समय अनेक घटनाओं की तारीखें और सन् याद नहीं रहते और गलत सलत उत्तर हो जाने पर परीक्षा में उनके अंक कम हो जाते हैं। वैसे इतिहास पढ़ते समय हमें भी मजा नहीं आता [...]

दान और कमीशन-व्यंग्य कविता (dan aur comishan-vyangya shayri)

 सरकार और साहुकारों ने इतने वर्षों से बहुत दान किया है कि इस देश से पीढ़ियों तक गरीबी मिट जाती। अगर कमबख्त यह कमीशन की रीति दान बांटने वालों की नीति न बन जाती। ——— नया बनाने के लिये पुराना समाज टुकड़े टुकड़े किये जा रहे हैं। कुछ नया नहीं बन पा रहा है इसलिये [...]

हास्य पैदा करने वाला शोक-हिन्दी व्यंग्य (hasya aur shok-hindi vyangya

आप कितने भी ज्ञानी ध्यानी क्यों न हों, एक समय ऐसा आता है जब आपको कहना भी पड़ता है कि ‘भगवान ही जानता है’। जब किसी विषय पर तर्क रखना आपकी शक्ति से बाहर हो जाये या आपको लगे कि तर्क देना ही बेकार है तब यह कहकर ही जान छुड़ाना पड़ती है कि ‘भगवान [...]

वादों का मौसम-हिन्दी व्यंग्य कविता (vadon ka mausam-hindi kavita)

 विकास के वादों का मौसम जब आता तब भी अब दिल नहीं मचलता मालुम है कि वादा भूलने के लिये ही किया जाता है। कुछ हो जायेगा जमाने का भी भला भर जायेगा  जब वादे करने वालों का घर विकास से, तब टपक कर सड़क पर भी कुछ बूंदें आ ही जायेगा भले ही बरसात [...]

बन जायेगा तमाशा-हिंदी शायरी (ban jayega tamasha-hindi shayri)

 अपने दर्द का बयां न कभी न करना बन जायेगा तमाशा। अपनी ही गमों ने लोग हैरान हैं अपनों की करतूतों से परेशान है कर नहीं सकते किसी की पूरी आशा। किसी इंसान को कुदरत हीरे की तरह तराश दे अलग बात है इंसानों ने कभी नहीं तराशा। ———– सर्वशक्तिमान से मोहब्बत नहीं होती पर [...]

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-विद्वान विपत्तियों का पहले अनुमान कर लेते है (hindi dharm sandesh-vidavan aur vipatti)

अशिक्षितनयः सिंहो हन्तीम केवलं बलात्। तच्च धीरो नरस्तेषां शतानि जतिमांजयेत्।। हिंदी में भावार्थ-सिंह किसी नीति की शिक्षा लिये बना सीधे अपने दैहिक बल से ही आक्रमण करता है जबकि शिक्षित एवं धीर पुरुष अपनी नीति से सैंकड़ों को मारता है। पश्यदिभ्र्दूरतोऽप्रायान्सूपायप्रतिपत्तिभिः। भवन्ति हि फलायव विद्वादभ्श्वन्तिताः क्रिया।। हिन्दी में भावार्थ-विद्वान तो दूर से विपत्तियों को आता [...]

पर्दे के पीछे-हिन्दी साहित्य कविता

सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है वही सिर अपना जो इससे बेखबर होते। कहीं गद्दारी तो कही वफदारी बिक जाती है दौलत और शौहरत वह शय है जो ईमान भी खरीद लाती है खून खराबे के आदी होते कायर [...]

समाचार हिन्दी में-व्यंग्य कविता (news in hindi-satire poem)

समाचार भी अब फिल्म की तरह टीवी पर चलते हैं। हास्य पैदा करने वाले विज्ञापनों के बीच दृश्यों में हिंसा के शिकार लोगों की याद में करुणामय चिराग जलते हैं। ——– समाचार भी खिचड़ी की तरह परदे पर सजाये जाते हैं। ध्यान रखते हैं कि  हर रस वाला समाचार लोगों को सुनाया जाये किसी को [...]

जिंदगी और जंग-हिंदी शायरी (zindagi aur zang-hindi shayri

सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है वही सिर अपना जो इससे बेखबर होते। कहीं गद्दारी तो कही वफदारी बिक जाती है दौलत और शौहरत वह शय है जो ईमान भी खरीद लाती है खून खराबे के आदी होते कायर [...]

मानवाधिकार-व्यंग्य आलेख (manvadhikar-vyanyga chittan)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में [...]

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

  कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सजाने के साथ   शब्द को जोर से बजाने का सोच  नहीं आया. कोशिश की रस के रंग दिखाने  और   अलंकार से कविता  सजाने की  मिले जिससे भाषा विद्वान की उपाधि  तब कविता को अपने दिल के  भाव से दूर पाया.. ____________________   कवि लेखक एंव संपादक-दीपक [...]

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)

सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। दूसरे का दुःख देकर अपने आपको यह संतोष देते हैं कि वह उसके मुकाबले अधिक सुखी हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि लोग बहिर्मुखी जीवन व्यतीत करते हैं और अपने बारे में [...]

योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से दस वर्ष पूर्व तक अनेक लोग योगसाधना को अत्यंत गोपनीय या असाधारण बात समझते थे। ऐसी धारणा बनी हुई थी कि योग साधना सामान्य व्यक्ति के करने की चीज नहीं है। इसका कारण यह था कि [...]

रामचरित मानस की चर्चा-चिंतन आलेख (ramcharit manas-hindi article)

रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन हजार गल्तियां हैं। हाय! भगवान राम जी के भक्त यह सुनकर उद्वेलित हो जायेंगे कि ‘देखो, रामचरित मानस का अपमान हो रहा है।’ शायद ऐसा न हो क्योंकि वह भारतीय धर्म से ही [...]

बदतमीज बात पर नजर-हिंदी व्यंग्य (badtamij bat par nazar-hindi vyangya)

एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया गया है। हो सकता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ समर्थक इस पर नाराज हों पर यह एक जरूरी कदम है। दरअसल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं होना चाहिये पर अभद्र और अश्लील शब्दों के [...]

नए स्वांग और मुखौटे-हास्य व्यंग्य कविताएँ (svang aur mukhaute-hindi satire poem)

रोज रचते हैं नया स्वांग चेहरे पर लगाते नए मुखौटे और बदलकर आते हैं कपड़े मगर छद्म होकर भी करते हैं हमेशा लफड़े. आदमी अपना बाहर का रूप कितना भी बदल ले अदाओं से पहचाना जाता है, जहां स्वर बदले शब्दों से पकड़ा जाता है, खुलकर सांस लेने से घबड़ाते हैं जो लोग छिपकर करते [...]

सेल के रोग का इलाज नहीं-हास्य व्यंग्य कविता (sel rog ka ilaj-hasya vyangyakavita)

अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार कपड़ों की एक सेल लगी है चलो तुम्हें वहां से टोपी, कुर्ता धोती और स्वेटर दिलवायें बहुत पुराने लगते हैं तुम्हारी तरह तुम्हारें कपड़े भी सजायें। यह ठीक है अभी तक फ्लाप हो चिंता की [...]

जब उनके पुतलों की पोल खुल जायेगी-हिंदी कविता (putlon ki pol-hindi hasya kavita)

पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया समझते नहीं भीड़ के इशारे अपनी उंगलियों से पकड़ी रस्सी से मनचाहे दृश्य वह मंच पर ठेल रहे हैं। भीड़ में बैठे हैं उनके किराये के टट्टू जो वाह वाही करते हैं तमाम लोग तो [...]

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप्पी दीवाली”. जेब खाली हो तो अपना चेहरा आईने में देखते हुए भी बहुत डर लगता है अपने ही खालीपन का अक्स सताने लगता है। क्यों न इतरायें दौलतमंद जब पूरा जमाना ही आंख जमाये है उन [...]

कामयाब इंसान-हिन्दी व्यंग्य कविता (kamyab insan-hindi kavita)

अमन का फरिश्ता बनने के लिये पहले इस जहां में आग लगा दो फिर उसे बुझा दो। खड़ा कर दो किराये का शैतान जिससे लड़ो नकली लड़ाई तना रहे जब तक तुम चाहो फिर उसे अपने सामने झुका लो। ऐसे ही अफसाने खेलते हुए अपना नाम आकाश में उड़ा दो। जहां तक चलता है तुम्हारी [...]

लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)

जिंदगी की इस धारा में किस किसकी नाव पार लगाओगे। समंदर से गहरी है इसकी धारा लहरे इतनी ऊंची कि आकाश का भी तोड़ दे तारा अपनी सोच को इस किनारे से उस किनारे तक ले जाते हुए स्वयं ही ख्यालों में डूब जाओगे। दूसरे को मझधार से तभी तो निकाल सकते हो जब पहले [...]

खेल और हवा-हिंदी व्यंग्य लघुकथा (khel aur hava-hindu laghu katha)

उसने एक फुटबाल ली और उस पर लिख दिया धर्म। वह उस फुटबाल के साथ एक डंडा लेकर उस मैदान में पहुंच गया जहां गोल पोस्ट बना हुआ था। तमाम लोग वहां तफरी करने आते थे इसलिये वह पहले जोर से चिल्लाया और बोला-‘है कोई जो सामने आकर मुझे गोल करने से रोक सके।’ उसने [...]

बहस कि कामेडी-हिंदी लघु व्यंग्य (disscusion as a comedy-hindi satire)

                 उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और शौषण खत्म कैसे किया जाये। सभी सजधजकर बहस करने आये थे। सभी वक्ता अपने अपने विचार रख रहे थे।             एक ने कहा ‘हमें गरीबों के दिमाग में अपने अधिकार के लिये [...]

पसंद कि नापसंद-हास्य व्यंग (hindi comedy satire)

एक सज्जन ने मन्नत मांगी थी कि अगर उनको कभी कहीं से कोई सम्मान प्राप्त होगा तो वह किसी नये कवि का सम्मेलन करायेंगे। इससे तो उनका सम्मान का प्रचार तो होगा ही साहित्य में नयी पीढ़ी को आगे लाने के लिये भी प्रसिद्धि मिलेगी। दरअसल उन्होंने अपने बेकारी के दिनों में अनेक कवितायें लिखी [...]

रावण ने राम का नाम जपा-हास्य व्यंग्य कविता (mukh men ram, pas me ravan-hasya vyangya kavita)

सुनते हैं मरते समय रावण ने राम का नाम जपा इसलिये पुण्य कमाने के साथ स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया। उसके भक्त भी लेते राम का नाम पुण्य कमाने के वास्ते, हृदय में तो बसा है सभी के सुंदर नारियों को पाने का सपना चाहते सभी मायावी हो महल अपना चलते दौलत के साथ [...]

हिंदी ब्लाग अंग्रेजी से आगे निकल सकते हैं-आलेख (hindi blog, inglish blog-hindi article)

अंतर्जाल पर कौन कितना सफल है यह तो कहना कठिन है क्योंकि यहां अनेक तरह के फर्जीवाड़े हैं जिनको समझना एक कठिन काम है। चाहे किसी भी भाषा के ब्लाग हैं उनको लेकर अनेक तरह के भ्रम बने ही रहते हैं। अनेक दिलचस्प बातें सामने आती हैं। लोग तमाम तरह की वेबसाईटों पर अपने ब्लाग [...]

दीवारों के पीछे से प्रहार-व्यंग्य कविताएं (deevar ke piche se prahar-vyangya kavitaen)

चेहरे पर रोज नया मुखौटा लगाकर वह सामने चले आते उनकी बहादुरी पर क्या भरोसा करें जो अपने पहचाने जाने का खौफ हमेशा अपने साथ लाते। ……………… दीवारों के पीछे छिपकर वह पत्थर हम पर उछालते हैं भीड़ हंसती है हम भी बदले का इरादा पालते हैं। दीवारों के पीछे हम नहीं जा सकते अपनी [...]

विदुर नीति- दुष्ट की सलाह पर व्यक्ति चले तो उससे दूर रहें (vidur niti-raja aur dusht ki salah)

न निह्यवं मन्त्र गचछेत संसृष्टमन्त्रस्य कुसंगतस्य। न च ब्रूयात्रश्वसिमि त्वयीति संकारणं व्यपदेशं तु कुर्यात् हिंदी में भावार्थ-जब कहीं भरी सभा में राजा-वर्तमान संदर्भ में कहें तो अपने से शक्तिशाली व्यक्ति-दुष्ट सलाहकारों से सलाह ले रहा है तब उसकी किसी बात का खंडन नहीं करना चाहिये। साथ ही वहां उसके प्रति किसी प्रकार का अविश्वास भी [...]

ब्लागर सरकार पर एसा वैसा मत लिख देना-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya on blogger sarkar)

सर्दी की सुबह चाय पीने के बाद ब्लागर कोहरे में घर से बाहर निकला। उसका शरीर ठंड से कांप रहा था पर चाय पीने से जो पेट मं गैस बनती है उससे निपटने का ब्लागर के पास यही एक नुस्खा था कि वह बाहर टहल आये। वह थोड़ा दूर चला होगा तो उसे कालोनी के [...]

मुर्दाखानों में रौशनी की तलाश-हिंदी साहित्य कविता (The search of light of life in dead mines – Hindi literature, poetry)

जमींदौज या राख हो चुके इंसानों के राहों पर छपे कदमों को चूम कर उसके निशान जमाने को दिखाते हैं। गुजरते समय के साथ बदलते जमाने को अपने ही नजरिये से चलाने की कोशिश करते वह लोग मुर्दाखानों में जिंदगी की रौशनी जलाते हैं। जितनी जिंदगियां चलती हैं उतनी ही कहानियां पलती हैं इस रंगबिरंगी [...]

एक शब्द मवेशी श्रेणी, दूसरा कीड़ा श्रेणी-हिंदी हास्य व्यंग्य (one cattle class, second worm class-hindi hasya vyangya)

करें भी तो क्या? अखबार पढ़े और टीवी चैनल देखे बिना चैन ही नहीं पड़ता। अखबार पढ़ने में भी अब प्रथम पृष्ठ की खबरों की बजाय अंदर के पृष्ठ देखते हैं कि शायद कुछ अलग हटकर मिल जाये जबकि ताकि हास्य कविता या व्यंग्य लिख सकें। टीवी चैनलों से तो उकता गये हैं इसलिये अखबार [...]

सविता भाभी ने किया सच का सामना-हिन्दी हास्य कविता (savita bhabhi ne kiya sach ka samana-hasya kavita)

नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प्रतिबंधित वेबसाईट की कल्पित नायिका को अपने में असली दर्शाया। यह देखकर उसका रचयिता छद्म नाम लेखक कसमसाया। पीसने लगा दांत भींचने लगा मुट्ठी और गुस्से में आकर एक जाम बनाया। पास में बैठे दूसरे [...]

दिल का दिमाग से रिश्ता-हिंदी कविता (dil aur dimag-hindi sahityak kavita)

दिल में कुछ दिमाग में कुछ जुबां से दूसरे बोल ही निकल आते हैं। दिल का दिमाग से दिमाग का जुबां से रिश्ता भला कितने लोग जान पाते हैं। दूसरों से संवाद क्या करेंगे अपने ही भाव नहीं पढ़ पाते हैं। ………………. अर्थहीन शब्द औपचारिक संवाद सुनने की आदत हो गयी है। दोस्ती और रिश्तों [...]

हुकुम मेरे आका-हास्य व्यंग्य कविता(hukum mere aka-hasya hindi kavita

शराब की बोतल से जिन्न निकला और उस पियक्कड़ से बोला -”हुकुम मेरे आका! आप जो भी मुझसे मंगवाओगे वह ले आउंगा बस शराब की बोतल नहीं मंगवाना वरना मुझसे हाथ धोकर पछताओगे. सुनकर पियक्कड़ बोला -”मेरे पास बाकी सब है उनसे भागता हुआ ही शराब के नशे में घुस जाता हूँ दिल को छु [...]

आती जाती बिजली-हास्य कविता (bijli par hasya kavita)

अच्छे विषय पर सोचकर कविता लिखने बैठा युवा कवि कि बिजली गुल हो गयी। कागज पर हाथ था उसका कलम अंधेरे में हुई लापता जो सोचा था विषय उसका भी नहीं था अतापता अब वह बिजली पर पंक्तियां सोचने लगा ‘कब आती और जाती है यह तो बहुत सताती है इसका आसरा लेकर जीना खराब [...]

बीस और पचास का खेल-हास्य व्यंग्य कविताएँ (play for twenty and fifty-hindi hasya vyangya kavitaen

उन्होंने तय किया है कि एक दिन में पचास ओवर की जगह बीस ओवर वाले मैच खेलेंगे। देखने वाले तो देखेंगे जो नहीं देखने वाले वह तो व्यंग्य बाण ऐसे भी फैंकेंगे। सच है जब बीस रुपये खर्च से भी हजार रुपया कमाया जा सकता है तो पचास रुपये खर्च करने से क्या फायदा फिल्म [...]

दोनों तूफान में फंसे थे-हिंदी कविता(rishton men tufan-hindi poem)

हम दोनों तूफान में फंसे थे उनको सोने की दीवारों का सहारा मिला हम ताश के पतों की तरह ढह गये। अब गुजरते हैं जब उस राह से यादें सामने आ जाती हैं कभी अपनो की तरह देखने वाली आंखें परायों की तरह ताकती हैं रिश्ते समय की धारा में यूं ही बह गये। जुबां [...]

नकली खून और डाक्टर-हास्य व्यंग्य (nakle khoon aur dactor-hindi hasya vyangya)

डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान का पैसा उसे देने गये थे। दुपहिया से जैसे ही उतरे डाक्टर साहब से नमस्कार किया और पैसा देकर जैसे ही वापस मुड़े तो डाक्टर साहब ने पूछा-‘कहीं बाजार जा रहे हैं।’ हमने [...]

हिन्दी के कवि और शायर बिना पढ़े ही गीता पर लिखते हैं-हिन्दी आलेख (Hindi poet writes on without reading the Gita – Hindi article)

              अक्सर अनेक कवितायें, शायरियों गीत, और गद्य रचनायें हमारे सामने आती हैं जिसमें भारतीय धर्म ग्रंथों के साथ ही अन्य धर्मों की पवित्र पुस्तकें भूलकर इंसान से प्रेम करने का संदेश शामिल होता है। जिन कवियों और शायरों को देशभक्ति, एकता और धार्मिक सद्भावना सुसज्जित कर अपनी रचनाओं में दिखानी होती है वह अक्सर [...]

कुछ भ्रम, कुछ सत्य- हिन्दी हास्य व्यंग्य ( Some confusion, some truth – Hindi comedy satire)

इस देश में भ्रम भी सच की तरह बिकता है यह तो बहुत समय से देखते आ रहे है पर इस कदर विवेकवान और पढ़े लिखे लोग भी वाद और नारों की बाढ़ में बह सकते हैं यह कभी सोचा नहीं था। टीवी चैनल,अखबार और अंतर्जाल पर कई ऐसी घटनाओं की विवेचना देखता हूं जो [...]

देशी बीमारी, विदेशी बीमारी-हास्य कविता (deshi aur videshi bimari-hasya kavita)

स्वाईन फ्लू की बीमारी ने आते ही देश में प्रसिद्धि आई। इतने इंतजार के बाद, आखिर शिकार ढूंढते विदेश से आई।। ढेर सारी देसी बीमारियां पंक्तिबद्ध खड़ी होकर खड़ी थी पर तब भी विदेश में बीमारी के नृत्य की खबरें यहां पर छाई। देसी कुत्ता हो या बीमारी उसकी चर्चा में मजा नहीं आता देसी [...]

वह कौनसी तराजू है-हिन्दी व्यंग्य कविता (taraju-hasya kavita)

कामयाबी की कीमत मुद्रा में आंकी जाने लगी है। इज्जत और दिल के चैन का मोल लोग भूल गये हैं ढेर सारी दौलत एकत्रित कर प्रतिष्ठा का भ्रम पाले अपने पांव तले दूसरे इंसान को कुचलने की चाहत हर इंसान में जगी है। ………………………… वह कौनसी तराजू हैं जिसमें इंसान की इज्जत और दिल का [...]

पर्दे के पीछे देखने की चाहत-हिंदी हास्य व्यंग्य (Behind the scenes-Hindi comedy satire)

पर्दे के पीछे से आशय फिल्म या नाटक से नहीं है बल्कि भीड़ के अलग हटकर किये जा रहे विरोधाभासी व्यवहार से है। दरअसल लोगों की आदत है कि वह भीड़ में बैठकर सामने किसी विशिष्ट व्यक्ति को देखते हैं तो उसे पास जानने की इच्छा प्रबल हो उठती है। कुछ लोग भीड़ में चमकने [...]

पहरेदार-हिंदी लघुकथा/ कहानी (paharedar-a short hindi story)

एक बेकार आदमी साक्षात्कार देने के लिये जा रहा था। रास्ते में उसका एक बेकार घूम रहा मित्र मिल गया। उसने उससे पूछा-‘कहां जा रहा है? उसने जवाब दिया कि -‘साक्षात्कार के लिये जा रहा हूं। इतने सारे आवेदन भेजता हूं मुश्किल से ही बुलावा आया है।’ मित्र ने कहा-‘अरे, तू मेरी बात सुन!’ उसने [...]

यूँ हुआ सच का सामना-हास्य व्यंग्य (yoon hua sach ka samna-hindi satire)

कविराज अपने घर से दूर उस पार्क में पहुंच गये। घर में बिजली नहीं थी और बरसात की वजह से सारी सड़कें सराबोर हो गयी थीं। पिछली बार एक बरसात में कविराज एक गड्ढे में गिर चुके थे। उस समय आसपास खड़े लोग भी उन पर हंस रहे थे। एक जानपहचान वाले ने हंसने वालों [...]

हंसी के खजाने की तलाश-हिंदी शायरी (hansi ka khazana-hindi shayri)

अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। मसखरा समझ ले जमाना तो क्या अपनी ही मसखरी में अपनी जिंदगी जी लेता हूं। रोती सूरतें लिये लोग खुश दिखने की कोशिश में जिंदगी गुजार देते हैं फिर भी किसी से हंसी [...]

दिखावे की दोस्ती -हिंदी शायरी (dikhave ki dosti-hindi shayri)

बेसुरा वह गाने लगे। किसी के समझ न आये ऐसे शब्द गुनगनाने लगे। फिर भी बजी जोरदार तालियां मन में लोग बक रहे थे गालियां आकाओं ने जुटाई थी किराये की भीड़ अपनी महफिल सजाने के लिये इसलिये लोगों ने अपने मूंह सिल लिये पहले हाथों से चुकाई ताली बजाकर कीमत दाम में पाया खाना [...]

वैश्विक समाजों का अंतर्द्वंद्व और अंतर्जाल-आलेख (hindi article on the social matter)

यहां हम इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करने जा रहे कि किसी अश्लील वेबसाईट पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिये या नहीं और न ही इसके देखने या न देखने के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं बल्कि हमारा मुख्य ध्येय है यह है कि हम समाज के उस अंतद्वंद्व को देखें जिस पर किसी अन्य [...]

दूसरे की दौलत को धूल समझें-चाणक्य नीति (dusre ki daulat ko dhool samjhen-chankya niti

यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।।        हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य के अनुसार कुछ पुरुषों में विवेक नहीं होता और वह सुंदर स्त्री से व्यवहार करते हुए यह भ्रम पाल लेते हैं कि वह वह उस पर मोहित है। वह भ्रमित पुरुष फिर उस स्त्री के लिये ऐसे [...]

कल्पित भाभी, कामयाबी की चाभी,-व्यंग्य कविता kalpit bhabhi, kamyabi ki chabhi-vyangya kavita

कवि देवर ने लिखी अपनी प्यारी भाभी पर कविता ‘बहुत सुंदर और सुशील हैं मेरी भाभी मेरी कामयाबी की है चाभी। जब कहीं जाता था साक्षात्कार के लिये वही मेरा सामान बनाती अटैची में कपड़े सजाती मेरी कामयाबी के लिये सर्वशक्तिमान की मूर्ति के सामने दिल लगाकर आरती गाती भाई के साथ फेरे लगाकर आई [...]

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)

आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित होता है जब वह अपने लिये कठिन हालत पाता है। पूरे विश्व के साथ भारत में भी आंतक फैले होने की बात की जाती है पर अन्य से हमारी स्थिति थोड़ी अलग है। दूसरे [...]

शराबी ईमेल-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

उस ईमेल में सबसे ऊपर लगे फोटो में शराब की बोतलें सजी थीं। नीचे संदेश में लिखा था कि ‘कृपया इस ईमेल को ध्वस्त न करें। इसे पढ़ें और अपने अन्य मित्रों को भेजें। इस ईमेल को पढ़कर एक आदमी ने इसे ध्वस्त कर दिया तो अगले दिन ही सुबह उसके घर में रखी शराब [...]

‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे- व्यंग्य आलेख ‘savita bhabhi’ se pichhe ‘mastram’-hindi vyangya article

कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रिय’ सामग्री भी हो सकती है। इस पर प्रतिबंध लगने के बाद उसकी खोज खबर बढ़ गयी है। सच कहें तो इस ‘सविता भाभी’ अपने पाठों को हिट कराने का जोरदार नुस्खा बनता नजर आ [...]

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भावार्थ-श्रीगीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म से पराया धर्म श्रेष्ठ लगता है तब उसको कभी श्रेय न प्रदान करें। अपना धर्म संपन्न नहीं दिखता पर दूसरे का धर्म तो हमेशा भयावह परिणाम देने वाला होता है। वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-अक्सर [...]

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आड़ में कोई अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है तो कोई अपना व्यवसाय कर रहा है। जब कहीं सार्वजनिक रूप से प्रार्थनायें सभायें होती हैं तब यह लगता है कि लोग दिखावा अधिक [...]

गर्मी पर लिखी कविता बरसात धो गयी-व्यंग्य कविता

गर्मी पर लिखने बैठे कविता बिजली गुल हो गयी। बाहर चलती आंधी ने मचाया शोर गरज कर बरसा पानी बरसात के इंतजार में रचे थे शब्द बहते पसीने का दिखाया था दर्द मानसून की पहली बरसात सब धो गयी। गर्मी पर लिखी कविता बस यूं खो गयी। ………………… गर्मी पर लिखकर पहुंचा वह कवि सम्मेलन [...]

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