मेरा परिचय
प्रात: योग साधना करना एव गीता का पाठ करना। इसके अलावा लेखन के द्वारा मित्र बनाना । अर्थाजन में अधिक रूचि नहीं । मेरी मान्यता है कि आदमी की देह शाश्वत नहीं है पर जीवन शाश्वत है,लिखने के साथ उसका मजा भी लेता हूँ। देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। इन्टरनेट पर पिछले साल ही लिखना शुरू किया। ग्वालियर में निवास है
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दीपक भारतदीप, ग्वालियर
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11 Comments
Deepak ji
aap se milkar bahut khushi hui
aapka sindhi blog padna chahoongi.
you can read sindhi font was a pleasant surprise
wishes
Devi
wow u have style unique style to write your thoughts.so many blogs all r ek dam perrfect,everyday its not possible but whenever i read your thoughts,i also start thinkinh about the issue.dedicated writer,i have seen after long time.shukran,will read more of your posts furthur to.its not possible to comment always,but will say u r god gifted with words and kalam(pen).
बहुत बढिया!!
i want to expess my opinion in hindi about, how its possible, vaise aapki kalam main dum hai.
i want to meet you . please sent ur address and comfortable time for meeting. also write abt indo-america atomic deal. i have read ur article on indo-rusia relations .it”s good.
deepak ji,
namaskar, maine aaj hi apka blog internet ke madhyam se parha. achchha laga. desh ko aap jaise dharmik insan ki jarurat hai, jo logon ko achchi baten bataye.
main khud bhi likhna chahta hun, per iske liye mujhe kya karna hoga . kaun si site per main apne bichar likh sakta hun
pls mera marg darshan karein
thanks
deepakji Namashkar,
Main jodhpur Rajasthan ki tehsil Phalodi main rahata hoon aur apna ek pakshik samachar patr chula raha hoon. chata hoon aap apni ruchnain muje bejain. mooje aapki her ruchna pasand hai. aapki ruchnaon ko apne akhbar main deker muje khushi hogi. Main chul-fir nahi sukta aur bistar per hi apna akhbar chula raha hoon aur is kaaran logo se bhi mil nahi pata. Asha he aap muje nirash nahi karenge. Dhanyawad.
Please stick your recent photograph.
Akpe Shrimukh ko dekhane ki lalsa hai.
नमस्ते दीपक जी,
मैं बिट्स पिलानी का छात्र हूँ और यहाँ हमारी वार्षिक हिन्दी पत्रिका – वाणी ०९ का संपादक हूँ | इस बार हम कुछ लेख ब्लॉग से भी हमारी पत्रिका में प्रकाशित करना चाहते हैं | मैंने आपके कुछ पोस्ट पढ़े हैं और आपकी इजाजत चाहता हूँ, आपके किसी लेख को हमारी पत्रिका में शामिल करने के लिए |
अगर आप पुरानी वाणी की प्रविष्ठियां पढना चाहते हैं तो http://www.hpc-bits.blogspot.com पर जा कर डाउनलोड कर सकते हैं |
अगर आप मुझे जल्द-स-जल्द मेल के जरिये आपकी स्वीकृति दे दें तो मैं पूरी वाणी टीम की तरफ से आभारी रहूँगा |
शुभकामनाएं और आभार,
प्रतीक माहेश्वरी
दक्ष प्रजापति
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दक्ष प्रजापति को अन्य प्रजापतियों के समान ब्रह्मा जी ने अपने मानस पुत्र के रूप में रचा था। दक्ष प्रजापति का विवाह स्वयंभुव मनु की तृतीय कन्या प्रसूति के साथ हुआ था। दक्ष प्रजापति की पत्नी प्रसूति ने सोलह कन्याओं को जन्म दिया जिनमें से स्वाहा नामक एक कन्या का अग्नि का साथ, सुधा नामक एक कन्या का पितृगण के साथ, सती नामक एक कन्या का भगवान शंकर के साथ, और शेष तेरह कन्याओं का धर्म के साथ विवाह हुआ। धर्म की पत्नियों के नाम थे – श्रद्धा, मैत्री, दया, शान्ति, तुष्टि, पुष्टि, क्रिया, उन्नति, बुद्धि, मेधा, तितिक्षा, द्वी और मूर्ति।
दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें द्वेषवश उन्होंने अपने जामाता भगवान शंकर और अपनी पुत्री सती को निमन्त्रित नहीं किया। शंकर जी के समझाने के बाद भी सती अपने पिता उस यज्ञ बिना बुलाये ही चली गईं। यज्ञस्थल में दक्ष प्रजापति ने सती और शंकर जी का घोर निरादर किया। अपमान न सह पाने के कारण सती ने तत्काल यज्ञस्थल में ही योगाग्नि से स्वयं को भस्म कर दिया। सती की मृत्यु का समाचार पाकर भगवान शंकर ने वीरभद्र के द्वारा उस यज्ञ का विध्वंश करा दिया। वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति का सिर भी काट डाला। बाद में ब्रह्मा जी की प्रार्थना करने पर भगवान शंकर ने दक्ष प्रजापति को उसके सिर के बदले में बकरे का सिर प्रदान कर उसके यज्ञ को सम्पन्न करवाया।
your service to hindi is great. your fundas about life is wonderful and true