बेईमानी और भ्रष्टाचार का अफसाना-हिन्दी व्यंग्य कविताये (baiimani aur bhrashtachar ka afasana-hindi vyangya kavitaen)


व्यंग्य लिखने का
अब मन नहीं करता है,
क्योंकि आज का सच ही
अट्टाहास करने लगता है।
कमबख्त
बेईमानी और भ्रष्टाचार पर
अब क्या अफसाना लिखें,
सामने खड़े हैं
तलवार लेकर कातिल
उनको कैसे ताना कसते दिखें,
जिम्मा है जिन पर शहर का,
ठेका है उनके पास बहपाना कहर का,
क्या ख्वाबी पुलाव पकायें,
जब अपने सपनों का गोश्त
सरेआम बाज़ार में बिकता है।
———-

कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior

http://zeedipak.blogspot.com

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यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • pushplata saxena  On 13/12/2010 at 12:27

    http://dpkraj.wordpress.com

    kuch political hona chaiye

  • deepika  On 27/04/2011 at 23:28

    please muje bhrashtachar ka samne kese kare ispe kuch bataye

  • deepika  On 27/04/2011 at 23:28

    please muje bhrashtachar ka samne kese kare ye bataye

  • sandeep goyal  On 08/05/2011 at 09:35

    brahastachar ka saamna kese kare iske liya meri help kare

  • P.C.SHAMA  On 05/08/2012 at 23:13

    DEAR SIR
    MUJHE BHI BHRASTACHAR KE KHILAF KOI ACHI SE KAVITA DIJIYE E BHI BRASTACHAR KE KHILAF HI HUMESHA REHTA HU.

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