लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)

जिंदगी की इस धारा में
किस किसकी नाव पार लगाओगे।
समंदर से गहरी है इसकी धारा
लहरे इतनी ऊंची कि
आकाश का भी तोड़ दे तारा
अपनी सोच को इस किनारे से
उस किनारे तक ले जाते हुए
स्वयं ही ख्यालों में डूब जाओगे।
दूसरे को मझधार से तभी तो निकाल सकते हो
जब पहले अपनी नाव संभाल पाओगे।
दूर उठती लहरें देखकर
खेलने का मन करता है
पर उनकी ताकत तभी समझ आयेगी
जब उनसे लड़ने जाओगे।

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लेखक संपादक-दीपक भारतदीप अन्य ब्लाग

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2 Comments

  1. Posted 13/10/2009 at 22:36 | Permalink

    बहुत बढिया रचना है।

  2. Posted 14/10/2009 at 04:53 | Permalink

    पर उनकी ताकत तभी समझ आयेगी
    जब उनसे लड़ने जाओगे।
    सही है लहरो से खेलते तो सभी है पर लडने की हिम्मत कितने कर पाते है.


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