रावण ने राम का नाम जपा-हास्य व्यंग्य कविता (mukh men ram, pas me ravan-hasya vyangya kavita)

सुनते हैं मरते समय
रावण ने राम का नाम जपा
इसलिये पुण्य कमाने के साथ
स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया।
उसके भक्त भी लेते
राम का नाम पुण्य कमाने के वास्ते,
हृदय में तो बसा है सभी के
सुंदर नारियों को पाने का सपना
चाहते सभी मायावी हो महल अपना
चलते दौलत के साथ शौहरत पाने के रास्ते,
मुख से लेते राम का नाम
हृदय में रावण का वैभव बसता
बगल में चलता उसका साया।
…………………….
गरीब और लाचार से
हमदर्दी तो सभी दिखाते हैं
इसलिये ही बनवासी राम भी
सभी को भाते हैं।
उनके नायक होने के गीत गाते हैं।
पर वैभव रावण जैसा हो
इसलिये उसकी राह पर भी जाते हैं।

………………………………
पूरा जमाना बस यही चाहे
दूसरे की बेटी सीता जैसी हो
जो राजपाट पति के साथ छोड़कर वन को जाये।
मगर अपनी बेटी कैकयी की तरह राज करे
चाहे दुनियां इधर से उधर हो जाये।
सीता का चरित्र सभी गाते
बहू ऐसी हो हर कोई यही समझाये
पर बेटी को राज करने के गुर भी
हर कोई बताये।
………………..

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कवि और संपादक-दीपक भारतदीप

2 Comments

  1. Posted 30/09/2009 at 00:08 | Permalink

    पूरा जमाना बस यही चाहे
    दूसरे की बेटी सीता जैसी हो
    जो राजपाट पति के साथ छोड़कर वन को जाये।
    मगर अपनी बेटी कैकयी की तरह राज करे
    चाहे दुनियां इधर से उधर हो जाये।
    सीता का चरित्र सभी गाते
    बहू ऐसी हो हर कोई यही समझाये
    पर बेटी को राज करने के गुर भी
    हर कोई बताये।
    ………………..

    Aaj ke samaj ka sahee chitran.

  2. Posted 30/09/2009 at 10:06 | Permalink

    दोहरा चरित्र , ठीक कहा


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