उन्हें और क्या चाहिये
जिनका दौलत करती हो सम्मान।
तलवे चाटने के लिये
कुछ पल मिल उनके पांव मिलने पर
लोग मानते है सम्मान।
चाहे कितने भी प्रशस्ति पत्र
उनके इर्दगिर्द सजा लो
जिन पर हाथ रखेंगे
उसी का ही होगा सम्मान।
दौलत और शौहरत कर देती है
कई लोगों को जमाने से परे
जिसके हाथ से लें सम्मान
वही सम्मानित हो जाता
जिसको ठुकरा दें उसका
होता अपमान
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मान करें या अपमान
कहां जायें उनके बिना
मिलता नहीं कोई दूसरा ठौर।
कान से सुने नहीं
मूंह से बोले नहीं
नजरें सीधी न हो तो
टेढ़ी भी चलेंगी
इस बात पर ही तसल्ली
करे लेंगे कि उन्होंने किया
हमारी तरफ गौर।
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