Monthly Archives: March 2009

मर्द की असलियत और नारी मुक्ति-व्यंग्य क्षणिकाएं

पीता जाए चुपचाप दर्द.
घर की नारी करें हैरान
ससुराल वाले धमकाकर करें परेशान
पर खामोश रहे वही है असली मर्द.
पसीना बहाकर कितना भी थक जाता हो
फिर भी नींद पर उसका हक़ नहीं हैं
अगर नारी का हक़ भूल जाता हो
घर में भीगी बिल्ली की तरह रहे
भले ही बाहर शेर नज़र आता हो
मुश्किलों [...]

ज्ञान का चिराग-लघुकथा

डूबता हुआ सूरज रोज अट्टहास के साथ अपने से ही सवाल करता था कि ‘इस दुनियां में सबसे बड़ा कौन?’
फिर दोबारा अट्टहास करते हुए स्वयं ही जवाब देता था कि ‘मैं’! मेरी रौशनी के बिना इस संसार के उस हिस्से में अंधेरा छा जाता है जहां से मैं विदा लेता हूं।’
एक दिन डूबने से पहले [...]

बंदर, चिंपौजी और इंसान का नैतिक आधार-व्यंग्य

अब यह भला क्या बात हुई कि बंदर तथा चिंपौजी में भी नैतिकता होती है। कुछ पश्चिमी विशेषज्ञों ने अपने प्रयोग से बात यह बात अब जाकर जानी है कि बंदर और चिंपौजी में भी वैसे ही नैतिक भावना होती है जैसे कि इंसानों (?) में होती है। बंदर और चिपौजी भी अपने साथ किये [...]

शराब पीना बन गयी है आज़ादी का पैमाना -हिंदी व्यंग्य कविता

अब खूब पीना शराब
नहीं कहेगा कोई खराब
क्योंकि वह आजादी का पैमाना बन गयी है
कदम बहकने की फिक्र मत करना
इंसानी हकों के के नाम पर लड़ने वाले
तुम्हें संभाल लेंगे
इंतजार में खड़े हैं मयखानों के बाहर
कोई लड़खड़ाता हुआ आये तो
उसे सजा सकें अपनी महफिल में
हमदर्दी के व्यापार के लिये
उनके ठिकानों पर दर्द लेकर आने वालों की
भीड़ [...]

श्रीलंका क्रिकेट टीम के घायल खिलाड़ियों का खेल जीवन खतरे में पड़ सकता है-आलेख

कल लाहौर में श्रीलंका क्रिकेट टीम पर हमले के बाद बहुत कम लोगों ने इस बारे में सोचा है कि उसके घायल खिलाडि़यों का भविष्य अब खेल की दृष्टि से अंधकारमय भी हो सकता है। इस हमले में सभी खिलाड़ी जीवित बच गये पर उनके शरीरों पर गोली के घाव हैं जो शरीर के [...]