दर्द से लड़ते आंसू सूख गये-हिंदी शायरी

जब हकीकतें होती बहुत कड़वी
वह मीठे सपनों के टूटने की
चिंता किसी को नहीं सताती
जहां आंखें देखती हैं
हादसे दर हादसे
वहां खूबसूरत ख्वाब देखने की
सोच भला दिमाग में कहा आती

दर्द से लड़ते आंसू सूख गये है जिसके
हादसों पर उसकी हंसी को मजाक नहीं कहना
उसकी बेरुखी को जज्बातों से परे नही समझना
कई लोग रोकर इतना थक जाते
कि हंसकर ही दर्द से दूर हो पाते
जिक्र नहीं करते वह लोग अपनी कहानी
क्योंकि वह हो जाती उनके लिये पुरानी
रोकर भी जमाना ने क्या पाता है
जो लोग जान जाते हैं
अपने दिल में बहने वाले आंसू वह छिपाते हैं
इसलिये उनकी कशकमश
शायरी बन जाती
शब्दों में खूबसूरती या दर्द न भी हो तो क्या
एक कड़वे सच का बयान तो बन जाती
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3 Comments

  1. amansingla
    Posted 16/11/2009 at 16:53 | Permalink

    जब हकीकतें होती बहुत कड़वी
    वह मीठे सपनों के टूटने की
    चिंता किसी को नहीं सताती
    जहां आंखें देखती हैं
    हादसे दर हादसे
    वहां खूबसूरत ख्वाब देखने की
    सोच भला दिमाग में कहा आती

  2. aryan pandit
    Posted 17/11/2009 at 15:11 | Permalink

    kabhi kisi se pyaar mat karna

  3. saawariya sharma
    Posted 27/11/2009 at 17:47 | Permalink

    hsane ka bad rulati duniya
    pyar karne ke bad thukrati duniya
    kya jindgi koe kasar rha gai
    jo marne ke bad jalati hea duniya
    saawariya sharma


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