अपनी असली पहचान खोते जाते-कविता

प्रसिद्ध होने के लिए
चले जाते है उस राह पर
जहां बुरे नाम वाले हो जाते हैं
अगर नाम चमका आकाश में तो
जमीन पर गिरकर चकनाचूर
होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं

पत्थरों पर नाम लिखवाने से
लोगों के हृदय में जगह नहीं मिल जाती
हंसी की करतूतों पर लोगों के ताली बजाने से
कुछ पल अच्छा लगता है
पर कोई इज्जत नहीं बढ़ जाती
कुछ पलों की प्रशंसा से
क्यों फूल कर कुप्पा हो जाते हैं
आकाश में उड़ने की ख्वाहिश रखने वालों
पहले जमीन पर चलना सीख लो
जहां खड़े रहने से ही
तुम्हारे पांव लड़खड़ने लग जाते हैं
दूसरे की आंखों में पहचान ढूंढने की
निरर्थक कोशिश में
अपनी असली पहचान खोते चले जाते हैं
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