रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है

रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि
दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि

कविवर रहीम का कथन है कि नीच व्यक्ति के संपर्क में रहने से सबको कलंक ही लगता है। मद्य बेचने वाले व्यक्ति के हाथ में दूध होने पर भी लोग उसे मदिरा ही समझते हैं।

रहिमन निज संपत्ति बिना, कोउ न विपति सहाय
बिनु पानी ज्यों जलज को, नहिं रवि सकै बचाय

कविवर रहीम कहते हैं कि अपने धन के अतिरिक्त आपत्ति आने पर अन्य कोई सहायता नहीं करता जैसे बिना जल के कमल के मुरझाने पर सूर्य भी उसको जीवन प्रदान नहीं कर पाता।

2 Responses to “रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है”

  1. सुन्दर दोहे प्रेषित किए हैं।

  2. पहले दोहे के मुताविक ही कहा गया है “”ऐ मैन इस नोन बाई दी कम्पनी ही कीप्स
    दूसरे के वारे में निवेदन है की कहीं इसीलिए तो लोग सम्पत्ती इकट्ठा करने में नहीं लगे हुए हैं

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