मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव
रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय
कविवर रहीम कहते हैं कि जब दही को लगातार माथा जाता है तो उसमें से मक्खन अलग हो जाता है और दही मट्ठे में विलीन होकर मक्खन को अपने ऊपर आश्रय देती है, इसी प्रकार सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति आने पर भी साथ नहीं छोड़ता।
भावार्थ-सच्चा दोस्त वक्त पर ही परखा जाता है जिस प्रकार दही मट्ठे में परिवर्तित होकर मक्खन को अपने ऊपर आश्रय देती है वैसे ही सच्चा मित्र विपति में अपने मित्र को बचाने के लिए अपना अस्तित्व समाप्त कर देता है।
मनिसिज माली के उपज, कहि रहीम नहिं जाय
फल श्यामा के उर लगे, फूल श्याम उर आय
कविवर रहीम कहते हैं कि कामदेव रुपी माली की पैदावार का शब्दों में बखान नहीं किया जा सकता। राधा के हृदय पर जो फल लगे हुए हैं उसके फूल श्याम के हृदय पर ही उगे हैं।
रहिमन गली है सांकरी, दूजो न ठहराहिं
आपु अहैं तो हरि नहीं, हरि आपुन नाहि
संत शिरोमणि रहीम कहते हैं की प्रेम की गली बहुत पतली होती है उसमें दूसरा व्यक्ति नहीं ठहर सकता, यदि मन में अहंकार है तो भगवान का निवास नहीं होगा और यदि दृदय में ईश्वर का वास है तो अहंकार का अस्तित्व नहीं होगा।




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sachha mitra jivan ko aasan banata hai.
friend means forever relations in everywhere, never die, YAA HINDI ME DOST= D=DOOR RAHKAR BHI JO PASS HO,
O= ORO SE KHAS HO,
S= SABSE PYARA JISKA EHSAAS HO,
T= TAQDEER SE JYADA JIS PAR VISHWAS HO,=DOST KAHLATA HAI,”DOSTI RISHTA NAHI HAI DHARAM HAI EMAAN HAI, YAAR KI YAARI KHUDA HAI DUSHMANI SHAITAN HAI-NAYAK
“KHAREED LETE UNHE JINDGI BECHKAR,YADI KHAREED SAKTE, PAR KUCHH LOG/DOST-”"KIMAT SE NAHI, KISMAT SE” MILA KARTE HAI- DOSTI EK ANMOL TOHFA HAI JISKE BARE ME KUCHH KAHA HI NAHI JAA SAKTA HAI, HUM DOST OR DOSTI KA ABHINANDAN KARTE HAI OR EK ACHHE DOST KE LIYE HAMESHA JITE HAI MARTE HAI-”LIVE LONG FOREVER FRIENDS”- NAYAK
har ghari sochte hain bhalai teri,sun nahi sakte burai teri,haste-haste ro padti hain aankhein meri,istarah se sehte hain judai teri.
true yaar frndship can’t b described in words, it’s just…….