पहले अपनी नीयत बताओ

कहते हैं रामजी के होने के
भौतिक सबूत हमारे सामने लाओ
नहीं ला सकते तो उन्हें भूल जाओ
राम जी की माया अपरम्पार
जिस पर माया का भूत चढा दें
अपना नाम भी भुलवा दें
सोने के सिंहासन पर बैठते ही
भगवान् की तरह पूजने की चाह
उन्हें अंधा बना देती है
रामजी का नाम रहते यह संभव नहीं
अमीर तो क्या गरीब के मन भी
उनका नाम बसता है कहीं न कहीं
दिलों के नाम मिटाने के लिए
वह कहते है
उनके होने का सबूत लाओ

राम के नाम का उनको कितना खौफ है
गरीबी, शोषण और बीमारी के दवा के लिए
लोगों को इधर उधर भटकाते हैं
राम की प्रस्तर की प्रतिमा को
पूजने से मना करने वाले ही
मुर्दों के नाम पर पत्थर लगाकर
उस पर माला चढाते हैं
कहीं अपना काम न बने तो
पत्थर लगवाने के लिए
जिंदा इंसान को ही मुर्दा बनाते हैं
राम का नाम फिर भी लेते हैं
यह कहने के लिए उसे भूल जाओ

रामभक्त भी सबूत जुटा लेंगे
अपने भक्तों के लिए रामजी भी
अपनी कृपा उन पर लुटा देंगे
पर सवाल करने वाले भी
इसके पीछे जो उनके दिल की नीयत है
क्या वह अपनी हथेली पर रखकर दिखा देंगे
कर सकते हैं तभी कहें कि
‘राम जी के होने के सबूत लाओ’
———————————–

2 Comments

  1. Posted 10/12/2007 at 17:17 | Permalink

    सब वोट बैंक का चक्कर है बाबू….
    उन्हें लुभाने की खातिर ये अपनों को गवाने से भी परहेज़ नहीं कर रहे और हम हैँ कि…
    कोई पंजे के साथ जुडा बैठा है तो कोई कमल के साथ चिपका बैठा है…
    कोई माया के चक्कर में हाथी पे सवार तो कोई मुलायम हुए बैठा है…

    और वो हैँ कि सब के सब एक जुट हो अपनी ताकत बढाते चले जा रहे हैँ

  2. Gourav
    Posted 18/05/2009 at 20:53 | Permalink

    In democracy every person want take gain with the name of RAM


Post a Comment

Your email is never published nor shared. Required fields are marked *

*
*