सावन और बसंत के मौसम पर
शीतल हवाओं के चलने की बात
लिखना अब मजाक लगता है
अगर कोई प्रियतम अपने प्रेयसी को
लिखे खूबसूरत मौसम की बात
समझो उसे ठगता है
घुली है प्राणवायु में विषैली गैस
सांस में भला अब सुगंध कहाँ से आये
सब जगह तो आसमान से
जलता अंगारा बरसता है
बरसात का पानी भी
कई बार विषैला लगता है
सर्दी हो या गर्मी
कवि हृदय में कितनी भी लहलहाएं
श्रंगार रस से ओत-प्रोत कवितायेँ
भला मौसम को कहाँ पता लगता है
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One Comment
वर्तमान हालत को ब्याँ करती सटीक कविता….
लिखते रहें….